परिसीमन विवाद: ‘अगर दक्षिण के साथ अन्याय हुआ तो 1960 दोहराया जाएगा’ – CM स्टालिन की केंद्र को दो-टूक
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और DMK प्रमुख एम.के. स्टालिन ने केंद्र की भाजपा सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने लोकसभा सीटों के परिसीमन (Delimitation) को लेकर चेतावनी दी है कि यदि उत्तर भारतीय राज्यों को अनुचित लाभ दिया गया और दक्षिण की आवाज दबाई गई, तो तमिलनाडु में 1960 के दशक जैसा भीषण हिंदी-विरोधी और केंद्र-विरोधी आंदोलन फिर से शुरू हो सकता है।
क्या है मुख्य विवाद?
स्टालिन का तर्क है कि तमिलनाडु और अन्य दक्षिणी राज्यों ने दशकों से केंद्र के कहने पर जनसंख्या नियंत्रण कार्यक्रमों को सफलतापूर्वक लागू किया। अब यदि 2026 के परिसीमन में सीटों का बंटवारा केवल जनसंख्या के आधार पर होता है, तो:
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उत्तर भारतीय राज्यों (जैसे UP, बिहार) की लोकसभा सीटें काफी बढ़ जाएंगी।
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जनसंख्या नियंत्रण करने वाले दक्षिणी राज्यों की राजनीतिक हिस्सेदारी संसद में कम हो जाएगी।
“इसे धमकी न समझें, यह तमिलनाडु की ओर से चेतावनी है। हम अपने अधिकारों के लिए पूरे देश का ध्यान खींचना जानते हैं।” — एम.के. स्टालिन
1960 के आंदोलन का जिक्र क्यों?
1960 का दशक तमिलनाडु के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ था। उस समय ‘हिंदी थोपने’ के विरोध में हुए आंदोलनों ने राज्य की राजनीति को हमेशा के लिए बदल दिया और कांग्रेस को सत्ता से बाहर कर द्रविड़ पार्टियों का उदय हुआ। स्टालिन का इस आंदोलन का जिक्र करना यह दर्शाता है कि वे परिसीमन को केवल प्रशासनिक मुद्दा नहीं, बल्कि तमिल अस्मिता और राजनीतिक अस्तित्व की लड़ाई मानते हैं।
लोकसभा सीटों पर संभावित प्रभाव (अनुमानित)
अगर 2026 में नई जनगणना के आधार पर परिसीमन हुआ, तो सीटों का गणित कुछ इस तरह बदल सकता है:
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उत्तर प्रदेश: वर्तमान 80 से बढ़कर 140+ सीटें हो सकती हैं।
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तमिलनाडु: 39 सीटों में बहुत मामूली बढ़ोत्तरी या अनुपात में भारी कमी हो सकती है।




