होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) संकट: अमेरिका-ईरान तनाव से दुनिया भर में तेल की किल्लत का डर
विश्व व्यापार के सबसे महत्वपूर्ण रास्तों में से एक, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz), एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में है। अमेरिका और ईरान के बीच हालिया सैन्य गतिविधियों और बयानबाजी ने वैश्विक तेल बाजार में हलचल पैदा कर दी है।
क्यों महत्वपूर्ण है होर्मुज जलडमरूमध्य?
होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच एक संकरा समुद्री मार्ग है। इसे दुनिया की ‘आर्थिक धमनी’ कहा जाता है क्योंकि:
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दुनिया के कुल कच्चे तेल के व्यापार का लगभग 20% से 25% इसी रास्ते से गुजरता है।
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सऊदी अरब, यूएई, कुवैत और इराक जैसे बड़े तेल निर्यातक इसी मार्ग का उपयोग करते हैं।
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तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) की बड़ी खेप भी यहीं से होकर गुजरती है।
तनाव की मुख्य वजह (April 2026 Update)
अप्रैल 2026 में तनाव तब चरम पर पहुंच गया जब अमेरिका ने ईरान की बंदरगाहों पर सैन्य नाकाबंदी की घोषणा की। इसके जवाब में ईरान ने जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर कड़ा नियंत्रण और ‘टोल टैक्स’ वसूलने की धमकी दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मार्ग बंद होता है, तो कच्चे तेल की कीमतें $120 प्रति बैरल के पार जा सकती हैं।
वैश्विक तेल व्यापार पर संभावित असर
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सप्लाई चेन में रुकावट: मार्ग बाधित होने से एशियाई देशों (विशेषकर भारत और चीन) को होने वाली तेल आपूर्ति ठप हो सकती है।
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महंगाई में उछाल: कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि का सीधा असर परिवहन और माल ढुलाई पर पड़ेगा, जिससे वैश्विक स्तर पर महंगाई बढ़ेगी।
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शिपिंग इंश्योरेंस: युद्ध जैसे हालात के कारण समुद्री जहाजों का बीमा प्रीमियम बढ़ गया है, जिससे आयात-निर्यात महंगा हो गया है।
भारत के लिए चिंता का विषय
भारत अपनी जरूरत का लगभग 80% तेल आयात करता है, जिसका बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आता है। होर्मुज में अस्थिरता का मतलब है भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी और आर्थिक विकास की गति में धीमापन।








