भारत-चीन व्यापार में उछाल, निर्यात 22% बढ़ा
भारत और चीन के बीच आर्थिक संबंधों में एक नई तेजी दर्ज की गई है। चालू वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही (अप्रैल से सितंबर 2025) में भारत का चीन को निर्यात 22% बढ़ा है। वाणिज्य मंत्रालय द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, यह निर्यात 6.90 अरब डॉलर से बढ़कर 8.41 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। यह वृद्धि ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका और चीन के बीच टैरिफ (शुल्क) विवाद अपने चरम पर है, जिससे भारतीय निर्यातकों को अप्रत्यक्ष रूप से लाभ हुआ है।
अमेरिका-चीन व्यापार तनाव का भारत को फायदा
वैश्विक स्तर पर अमेरिका और चीन के बीच व्यापार युद्ध के चलते कई उत्पादों पर आयात शुल्क बढ़ाए गए हैं। इससे चीन की अमेरिकी बाजारों पर निर्भरता कुछ हद तक कम हुई है और उसने अपने व्यापारिक सहयोगियों को विविध करने की नीति अपनाई है।
भारत इस स्थिति का लाभ उठाने वाले देशों में अग्रणी है। कई उत्पाद, जिन पर पहले अमेरिकी कंपनियां निर्भर थीं, अब चीन भारत से खरीद रहा है।
भारत से चीन को किन उत्पादों का निर्यात बढ़ा
2025 की पहली छमाही में भारत से चीन को जिन प्रमुख वस्तुओं का निर्यात बढ़ा, उनमें शामिल हैं:
- खनिज और धातु उत्पाद (Iron Ore, Copper, Aluminum)
- रसायन और दवा उत्पाद (Pharmaceuticals & Chemicals)
- ऑर्गेनिक केमिकल्स और इंटरमीडिएट्स
- कृषि उत्पाद – विशेष रूप से चाय, मसाले, और खाद्य तेल
- इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स और औद्योगिक उपकरण
चीन की मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री को सपोर्ट करने वाले कई रॉ मटेरियल भारत से बड़े पैमाने पर आयात किए जा रहे हैं।
आयात में भी हुई हल्की गिरावट
जहां भारत से चीन को निर्यात में बढ़ोतरी हुई है, वहीं चीन से भारत के आयात में मामूली गिरावट देखी गई है। पिछले वित्त वर्ष की तुलना में चीन से आयात लगभग 2.5% घटकर 55.2 अरब डॉलर पर आ गया है। यह गिरावट भारतीय उत्पादन क्षमता में सुधार और “मेक इन इंडिया” जैसी सरकारी योजनाओं की सफलता को दर्शाती है।
व्यापार संतुलन अभी भी चीन के पक्ष में
हालांकि निर्यात बढ़ने के बावजूद भारत और चीन के बीच ट्रेड डेफिसिट (व्यापार घाटा) अभी भी बड़ा है।
चीन से आयात अब भी निर्यात से कई गुना अधिक है।
2025-26 की पहली छमाही में भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा 46.8 अरब डॉलर दर्ज किया गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह अंतर धीरे-धीरे कम हो रहा है क्योंकि भारत अब अपनी निर्यात क्षमता को तकनीकी और औद्योगिक क्षेत्रों में बढ़ा रहा है।
सरकारी नीतियों और उद्योगों की भूमिका
भारत सरकार ने निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कई नई नीतियां लागू की हैं, जिनमें शामिल हैं —
- उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना (PLI Scheme)
- विदेश व्यापार नीति 2023 के तहत निर्यात प्रोत्साहन
- लॉजिस्टिक्स और बंदरगाह सुविधाओं में सुधार
- ‘मेक इन इंडिया’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान
इन नीतियों ने भारतीय उद्योगों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार किया है।
भारत की रणनीतिक बढ़त
भारत के पास एक बड़ी रणनीतिक बढ़त यह है कि वह दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच एक सेतु की भूमिका निभा रहा है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत आने वाले वर्षों में “सप्लाई चेन डाइवर्सिफिकेशन” का प्रमुख केंद्र बन सकता है।
चीन को भी अपने निर्माण क्षेत्र के लिए भारत से कच्चे माल और औद्योगिक इनपुट की जरूरत बनी रहेगी।
भविष्य की संभावनाएं
विश्लेषकों का अनुमान है कि अगर यही रफ्तार बनी रही तो वित्त वर्ष 2025-26 के अंत तक भारत का चीन को निर्यात 16 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।
सरकार ने निर्यातकों को डिजिटलाइजेशन, सर्टिफिकेशन और कस्टम प्रक्रिया को तेज करने के लिए विशेष प्रोत्साहन देने की योजना भी बनाई है।
विशेषज्ञों की राय
दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के प्रोफेसर अरुणाभ सेन का कहना है —
“भारत का निर्यात प्रदर्शन यह दिखाता है कि देश अब केवल उपभोक्ता नहीं बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का एक मजबूत हिस्सा बन रहा है।”
वहीं नीति आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार —
“भारत को अपनी टेक्नोलॉजी और वैल्यू ऐडेड प्रोडक्ट्स के निर्यात पर ध्यान देना चाहिए ताकि वह दीर्घकालिक आर्थिक बढ़त हासिल कर सके।”
निष्कर्ष
भारत-चीन व्यापार में आई यह वृद्धि न केवल भारत की निर्यात क्षमता का प्रमाण है, बल्कि यह वैश्विक आर्थिक असंतुलन में भारत की बढ़ती भूमिका को भी दर्शाती है।
जहां चीन के साथ व्यापार घाटा एक चिंता का विषय है, वहीं निर्यात में 22% की वृद्धि भारत की आर्थिक प्रगति और वैश्विक बाजार में उसकी मजबूती का संकेत है।








