आसियान शिखर सम्मेलन 2025: भारत की कूटनीतिक सक्रियता का नया अध्याय
कुआलालंपुर (मलेशिया) में चल रहे आसियान शिखर सम्मेलन 2025 में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने अपनी सक्रिय कूटनीतिक भूमिका से एक बार फिर यह साबित किया कि भारत इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की स्थिरता और सहयोग में केंद्रीय भूमिका निभाने को तैयार है। इस सम्मेलन में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीस और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन से अलग-अलग द्विपक्षीय मुलाकातें कीं।
भारत-ऑस्ट्रेलिया: रक्षा और शिक्षा पर नया जोर
जयशंकर और अल्बनीस के बीच हुई बैठक में रक्षा, शिक्षा, व्यापार और तकनीकी सहयोग जैसे कई प्रमुख मुद्दों पर चर्चा हुई।
दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच बढ़ते रक्षा संबंध इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा संतुलन बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
जयशंकर ने ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय की बढ़ती भूमिका की भी सराहना की और कहा कि “भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंध केवल सरकारों के बीच नहीं, बल्कि जनता के बीच विश्वास और सांस्कृतिक जुड़ाव पर आधारित हैं।”
दोनों देशों ने शिक्षा के क्षेत्र में और अधिक सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा की, ताकि छात्र एक्सचेंज प्रोग्राम और रिसर्च प्रोजेक्ट्स को और सशक्त बनाया जा सके।
भारत-न्यूजीलैंड: व्यापार और जलवायु परिवर्तन पर एकमत
इसके बाद जयशंकर ने न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन से मुलाकात की। इस वार्ता में दोनों देशों ने व्यापार, कृषि, खाद्य सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों पर अपने विचार साझा किए।
भारत और न्यूजीलैंड ने इस बात पर सहमति जताई कि टिकाऊ विकास (Sustainable Development) के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए हरित तकनीक (Green Technology) और क्लीन एनर्जी के क्षेत्र में मिलकर काम करना होगा।
जयशंकर ने कहा कि भारत “जलवायु न्याय” के सिद्धांत के साथ विकासशील देशों की आवाज को मजबूती से उठा रहा है, और न्यूजीलैंड इसमें एक भरोसेमंद साझेदार बन सकता है।
इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका
आसियान शिखर सम्मेलन में जयशंकर ने जोर दिया कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की स्थिरता और सुरक्षा भारत के लिए प्राथमिकता है। भारत की “एक्ट ईस्ट नीति” (Act East Policy) और “इंडो-पैसिफिक ओशन इनिशिएटिव (IPOI)” के माध्यम से भारत क्षेत्रीय सहयोग, कनेक्टिविटी और आर्थिक प्रगति को मजबूत करना चाहता है।
उन्होंने कहा कि आसियान देशों के साथ भारत का संबंध विश्वास, पारदर्शिता और पारस्परिक सम्मान पर आधारित है। भारत इस क्षेत्र में “साझा समृद्धि (Shared Prosperity)” के लक्ष्य को आगे बढ़ाना चाहता है।
महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा
जयशंकर की मुलाकातों में निम्नलिखित प्रमुख मुद्दों पर चर्चा हुई –
- सुरक्षा सहयोग: हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी उपायों पर।
- व्यापार: आपसी व्यापार को संतुलित और विविधतापूर्ण बनाने पर जोर।
- शिक्षा एवं तकनीक: विश्वविद्यालयों और तकनीकी संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने पर सहमति।
- जलवायु परिवर्तन: स्वच्छ ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन और सतत विकास परियोजनाओं पर साझेदारी।
भारत की विदेश नीति का विस्तार
जयशंकर की ये मुलाकातें भारत की विदेश नीति की “वसुधैव कुटुम्बकम” भावना को भी प्रतिबिंबित करती हैं — जो यह संदेश देती है कि भारत अपने पड़ोसियों और साझेदार देशों के साथ विश्व शांति और विकास के लिए समान रूप से प्रतिबद्ध है।
भारत अब केवल एक क्षेत्रीय शक्ति नहीं बल्कि वैश्विक मंच पर एक उत्तरदायी शक्ति (Responsible Power) के रूप में उभर रहा है।
निष्कर्ष: कूटनीति से विकास की ओर
कुआलालंपुर में आयोजित इस आसियान शिखर सम्मेलन ने एक बार फिर यह साबित किया कि भारत की विदेश नीति “संवाद, सहयोग और स्थिरता” पर आधारित है।
जयशंकर की ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्रियों से मुलाकातें इस दिशा में एक और मजबूत कदम हैं, जो न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक साझेदारी को नई दिशा देंगी।
भारत आने वाले वर्षों में आसियान देशों के साथ मिलकर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति, प्रगति और पारस्परिक विकास को बढ़ावा देने के लिए अपने कूटनीतिक प्रयासों को और तेज करेगा।








