बुजुर्गों में वर्कआउट से अधिक फायदेमंद ये जापानी वॉकिंग ट्रेनिंग :
अगर आप दिल की सेहत सुधारना चाहते हैं और भारी-भरकम एक्सरसाइज नहीं कर सकते, तो ‘जापानी वॉकिंग’ आपके लिए अच्छा विकल्प हो सकता है। इसे इंटरवल वॉकिंग ट्रेनिंग (आईडब्ल्यूटी) भी कहा जाता है, जिसे जापानी वैज्ञानिकों ने खासतौर पर 60 वर्ष से ऊपर के लोगों की सेहत सुधारने के लिए विकसित किया था। यह तकनीक अब दुनियाभर में लोकप्रिय हो रही है क्योंकि इसमें शरीर पर ज्यादा दबाव डाले बिना कार्डियो मेटाबॉलिक सेहत को बेहतर किया जा सकता है।
60 से अधिक उम्र है तो जापानी वॉकिंग अपनाएं; डायबिटीज और बीपी सुधरेगा :
डॉक्टरों का कहना है कि यह तकनीक डायबिटीज के मरीजों के लिए भी बेहद फायदेमंद है। शरीर की क्षमता जैसे-जैसे बढ़े, तेज वॉक का समय बढ़ा सकते हैं। जानते हैं इसके बारे में….
जापानी वॉकिंग ट्रेनिंग करने वालों के बीपी और शुगर में सुधार :
एक स्टडी में 200 से ज्यादा लोगों को दो ग्रुप में बांटा गया। इसमें एक ने सामान्य वॉकिंग की और दूसरा ने जापानी वॉकिंग की। नतीजा ये कि जापानी वॉकिंग करने वालों के बीपी, शुगर, बीएमआई, मसल स्ट्रेंथ और फिटनेस में ज्यादा सुधार था। इतना ही नहीं, 95% लोग इस रूटीन को लंबे समय तक बनाए रख पाए, यानी यह अभ्यास टिकाऊ भी है।
क्या होती है जापानी वॉकिंग :
इस वॉकिंग में पहले 3 मिनट तेज फिर 3 मिनट सामान्य गति से चलना होता है। यह एक सेट होता है। एक दिन में 5 सेट करने की सलाह दी जाती है, यानी 30 मिनट की वॉकिंग। हफ्ते में 5 दिन इसे करना फायदेमंद है। डॉक्टरों की सलाह है कि अगर 30 मिनट मुश्किल लगे तो छोटे लक्ष्यों से शुरू करें। तेज चलने के समय अगर आप लगातार बात नहीं कर पा रहे, तो सही गति है।
हाई इंटेंसिटी इंटरवेल ट्रेनिंग से अलग होती है जापानी वॉकिंग :
हाई इंटेंसिटी ट्रेनिंग यानी रेगुलर वर्कआउट शरीर पर ज्यादा प्रेशर डालती है, जिससे खासकर बुजुर्गों को चोट लगने की संभावना भी बढ़ जाती है। लेकिन जापानी वॉकिंग सुरक्षित और हर उम्र के लिए उपयुक्त है। इसमें दिल की गति तो बढ़ती ही है और शरीर पर ज्यादा बोझ नहीं पड़ता है। इसलिए यह 60+ उम्र वालों की पसंद है।