संसद में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर गरमागरम बहस: गृह मंत्री और प्रधानमंत्री के संबोधन से तय होगी दिशा!

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संसद में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर गरमागरम बहस: गृह मंत्री और प्रधानमंत्री के संबोधन से तय होगी दिशा

 

भारतीय संसद में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर आज भी राजनीतिक गहमागहमी जारी है। इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में गहन बहस चल रही है, जिसमें सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं। आज केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और संभवतः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन से इस चर्चा को एक नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

क्या है ‘ऑपरेशन सिंदूर’?

‘ऑपरेशन सिंदूर’ पाकिस्तान के खिलाफ भारत द्वारा की गई एक जवाबी कार्रवाई से संबंधित है। यह अभियान अप्रैल 2025 में हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद शुरू किया गया था, जिसका मुख्य उद्देश्य सीमा पार स्थित आतंकवादी शिविरों और उनके समर्थकों को निशाना बनाना और उन्हें नष्ट करना था। इस ऑपरेशन का मकसद आतंकवाद के खिलाफ भारत की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को स्पष्ट करना था।

लोकसभा में गरमागरम बहस:

लोकसभा में सोमवार को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर सरकार का पक्ष रखा। आज, मंगलवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह दोपहर में लोकसभा को संबोधित करेंगे। उनके संबोधन में इस ऑपरेशन के विभिन्न पहलुओं, इसकी सफलता और भविष्य की रणनीतियों पर विस्तृत जानकारी दिए जाने की संभावना है।

हालांकि, विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस, इस मुद्दे पर सरकार पर पारदर्शिता की कमी और रणनीतिक गलतियों का आरोप लगाते हुए लगातार हमलावर है। विपक्ष ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उन दावों पर भी सवाल उठाए हैं, जिनमें उन्होंने 26 बार यह कहा है कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान शत्रुता को व्यापार रोकने की धमकी देकर समाप्त किया। विपक्ष ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के अचानक रुकने पर भी सवाल उठा रहा है और कुछ हलकों से खुफिया विफलता के दावों की भी बात की गई है।

राज्यसभा में भी चर्चा जारी:

राज्यसभा में भी आज रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इस महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा की शुरुआत करेंगे। दोनों सदनों में सरकार का लक्ष्य इस ऑपरेशन के औचित्य और उसकी सफलताओं को स्थापित करना है, जबकि विपक्ष सरकार से अधिक स्पष्टता और जवाबदेही की मांग कर रहा है।

प्रधानमंत्री का समापन भाषण संभावित:

आज शाम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भी संसद में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर समापन भाषण देने की संभावना है। उनके संबोधन से सरकार की अंतिम स्थिति और भविष्य की रणनीति पर प्रकाश पड़ने की उम्मीद है।

अंतर्राष्ट्रीय समर्थन और विरोध:

चर्चा के दौरान यह भी सामने आया कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सहित 193 देशों में से केवल तीन देशों ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का विरोध किया है। यह दर्शाता है कि अधिकांश अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने भारत की इस कार्रवाई को आतंकवाद के खिलाफ एक वैध प्रतिक्रिया के रूप में देखा।

संसद में यह बहस न केवल ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के सैन्य और रणनीतिक पहलुओं पर रोशनी डालेगी, बल्कि भारत की विदेश नीति, राष्ट्रीय सुरक्षा और राजनीतिक परिदृश्य पर भी इसके गहरे प्रभावों को दर्शाएगी।


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