आज शाम 5:30 बजे (भारतीय समयानुसार) अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में एक नया अध्याय लिखा जाएगा, जब भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA का महत्वाकांक्षी निसार (NISAR) सैटेलाइट लॉन्च किया जाएगा। यह मिशन पृथ्वी के अध्ययन और जलवायु परिवर्तन को बेहतर ढंग से समझने की हमारी क्षमता में क्रांति लाने के लिए तैयार है।
NISAR क्या है और यह इतना खास क्यों है?
NISAR (NASA-ISRO Synthetic Aperture Radar) अपनी तरह का पहला ऐसा सैटेलाइट होगा जो पृथ्वी की सतह पर होने वाले सूक्ष्म परिवर्तनों को मापने के लिए दो अलग-अलग रडार आवृत्तियों (L-बैंड और S-बैंड) का उपयोग करेगा। यह दोहरी-आवृत्ति क्षमता इसे बेहद शक्तिशाली बनाती है, जिससे यह बादलों और घनी वनस्पति के माध्यम से भी डेटा एकत्र कर सकता है, जो पारंपरिक ऑप्टिकल उपग्रहों के लिए संभव नहीं है।

मिशन के मुख्य उद्देश्य:
- भूमि और बर्फ के विरूपण का अध्ययन: NISAR भूकंप, ज्वालामुखी गतिविधि, भूस्खलन और धंसने सहित पृथ्वी की सतह में होने वाले छोटे बदलावों को ट्रैक करेगा। यह वैज्ञानिकों को इन प्राकृतिक आपदाओं को बेहतर ढंग से समझने और भविष्यवाणी करने में मदद करेगा।
- पारिस्थितिक तंत्र की निगरानी: यह वनों, आर्द्रभूमि और कृषि क्षेत्रों में परिवर्तन की निगरानी करेगा, जिससे वनस्पति बायोमास और कार्बन चक्र को समझने में महत्वपूर्ण जानकारी मिलेगी।
- समुद्री और ग्लेशियर अध्ययन: उपग्रह समुद्र की बर्फ, ग्लेशियरों और बर्फ की चादरों की गतिशीलता का विस्तृत अवलोकन प्रदान करेगा, जो जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
- जल संसाधनों का प्रबंधन: NISAR मिट्टी की नमी और भूजल स्तर में परिवर्तन को मापने में भी सहायता करेगा, जो जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के लिए आवश्यक है।
यह संयुक्त मिशन अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते सहयोग का एक प्रमाण है। NISAR से प्राप्त डेटा वैज्ञानिकों, नीति निर्माताओं और आपदा प्रबंधन एजेंसियों के लिए मुफ्त और खुले तौर पर उपलब्ध होगा, जिससे वैश्विक स्तर पर अनुसंधान और जलवायु कार्रवाई को बढ़ावा मिलेगा।
आज की ऐतिहासिक लॉन्चिंग के लिए ISRO और NASA को शुभकामनाएं! हम इस अभूतपूर्व मिशन से मिलने वाले अविश्वसनीय अंतर्दृष्टि की प्रतीक्षा कर रहे हैं।




