अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस 2025: उत्तर प्रदेश में बाघों की संख्या में ऐतिहासिक वृद्धि, M-Stripes प्रणाली बनी संवाहक

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आज, अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस के शुभ अवसर पर, उत्तर प्रदेश के लिए एक बेहद सुखद और उत्साहवर्धक खबर सामने आई है। राज्य में बाघों की संख्या में लगातार और महत्वपूर्ण वृद्धि दर्ज की गई है, जो वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि है। इस सफलता का श्रेय मुख्य रूप से M-Stripes (Monitoring System for Tigers – Intensive Protection and Ecological Status) जैसी उन्नत निगरानी प्रणाली और समर्पित संरक्षण प्रयासों को दिया जा रहा है।

बाघों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि:

उत्तर प्रदेश, जो अपनी समृद्ध जैव विविधता के लिए जाना जाता है, ने बाघ संरक्षण के क्षेत्र में एक नया मील का पत्थर स्थापित किया है। आंकड़ों के अनुसार, राज्य में बाघों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) अनुराधा वेमुरी ने बताया कि उत्तर प्रदेश में बाघों की संख्या 2018 में 173 से बढ़कर 2022 में 222 हो गई है, और यह वृद्धि जारी है। राज्य के विभिन्न टाइगर रिजर्व्स में, दुधवा टाइगर रिजर्व 135 बाघों के साथ सबसे आगे है, जो इसकी सघनता और प्रभावी प्रबंधन को दर्शाता है।

M-Stripes: संरक्षण का आधुनिक हथियार:

इस वृद्धि में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका M-Stripes (मॉनिटरिंग सिस्टम फॉर टाइगर्स – इंटेंसिव प्रोटेक्शन एंड इकोलॉजिकल स्टेटस) प्रणाली की रही है। यह एक अत्याधुनिक तकनीक-आधारित निगरानी प्रणाली है जिसे बाघों की आबादी, उनके आवास और अवैध शिकार विरोधी गतिविधियों पर नज़र रखने के लिए डिज़ाइन किया गया है। M-Stripes के माध्यम से वनकर्मी बाघों की गतिविधियों, उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़ी हर जानकारी को वास्तविक समय में दर्ज कर सकते हैं। यह प्रणाली डेटा-संचालित निर्णय लेने में मदद करती है, जिससे संरक्षण रणनीतियाँ अधिक प्रभावी बन पाती हैं।

समर्पित संरक्षण प्रयास:

बाघों की संख्या में यह वृद्धि केवल M-Stripes प्रणाली का ही परिणाम नहीं है, बल्कि वन विभाग के कर्मचारियों और स्थानीय समुदायों के अथक प्रयासों का भी नतीजा है। वन विभाग के कर्मचारी नियमित रूप से गहन गश्त करते हैं, जो प्रति माह 1.5 लाख किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करती है। इस गश्त में विभिन्न माध्यमों का उपयोग किया जाता है, जिनमें वाहन, नावें, हाथी, साइकिल और पैदल गश्त शामिल हैं, ताकि बाघों के आवासों के हर कोने की निगरानी की जा सके।

इसके अतिरिक्त, ‘बाघ मित्र’ पहल ने भी बाघ संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस कार्यक्रम के तहत 120 से अधिक ग्रामीणों को प्रशिक्षित किया गया है, जो बाघों या अन्य वन्यजीवों के दिखने की जानकारी तुरंत वन विभाग को व्हाट्सएप और एक आधिकारिक ऐप के माध्यम से देते हैं। इस पहल ने मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने में भी मदद की है, क्योंकि समय पर जानकारी मिलने से वन विभाग स्थिति को संभालने और संभावित खतरों को टालने में सक्षम होता है।

वन्यजीव संरक्षण में मील का पत्थर:

उत्तर प्रदेश में बाघों की संख्या में यह वृद्धि राज्य के मजबूत वन्यजीव संरक्षण प्रयासों की सफलता को दर्शाती है। यह न केवल बाघों जैसी लुप्तप्राय प्रजातियों के लिए एक सुरक्षित वातावरण प्रदान कर रहा है, बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य और जैव विविधता के संरक्षण में भी योगदान दे रहा है। अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस पर यह खबर अन्य राज्यों और देशों को भी वन्यजीव संरक्षण के लिए अधिक प्रभावी कदम उठाने के लिए प्रेरित करेगी।

यह उपलब्धि दर्शाती है कि सही रणनीति, आधुनिक तकनीक और समुदाय की भागीदारी के साथ वन्यजीवों का संरक्षण संभव है और हम अपनी प्राकृतिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रख सकते हैं।


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