रांची: झारखंड के राजनीतिक परिदृश्य में आज एक युग का अंत हो गया है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के संस्थापक और राज्य के तीन बार मुख्यमंत्री रहे, शिबू सोरेन का 81 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे लंबे समय से बीमार थे और उनका निधन झारखंड के लिए एक अपूरणीय क्षति है।
‘गुरुजी’ का संघर्ष: एक अलग राज्य की बुनियाद
शिबू सोरेन को झारखंड की राजनीति में एक कद्दावर और दूरदर्शी नेता के रूप में याद किया जाएगा। उन्हें प्यार से ‘गुरुजी’ कहा जाता था। उन्होंने झारखंड को अलग राज्य बनाने के आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाई थी। उनका संघर्ष केवल राजनीतिक नहीं था, बल्कि यह झारखंड के आदिवासी और मूलनिवासी लोगों के हक, जल, जंगल, जमीन और पहचान के लिए था। उनके अथक प्रयासों से ही 15 नवंबर 2000 को झारखंड एक अलग राज्य के रूप में अस्तित्व में आया।
राजनीतिक सफर: संघर्ष और शासन का संगम
शिबू सोरेन का राजनीतिक जीवन उतार-चढ़ाव भरा रहा। वे पहली बार 1977 में लोकसभा सदस्य बने। उन्होंने कई बार लोकसभा और राज्यसभा का प्रतिनिधित्व किया। वे केंद्र सरकार में कोयला मंत्री भी रह चुके थे।
झारखंड के मुख्यमंत्री के रूप में उनका कार्यकाल तीन बार रहा, लेकिन उनका कोई भी कार्यकाल पूरा नहीं हो पाया। इसके बावजूद, उन्होंने राज्य के विकास और कल्याण के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने हमेशा आदिवासियों और वंचितों के उत्थान के लिए काम किया।
शोक की लहर: राष्ट्र ने दी श्रद्धांजलि
शिबू सोरेन के निधन की खबर से पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है। उनके बेटे और झारखंड के वर्तमान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया पर इस दुखद खबर की पुष्टि की। उन्होंने लिखा, “झारखंड के लिए लड़ने वाले और हमारे प्रेरणास्रोत, मेरे पिता शिबू सोरेन अब नहीं रहे। यह हम सबके लिए एक अपूरणीय क्षति है।”
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। सभी ने शिबू सोरेन के योगदान को याद किया और उनके परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं।
अंतिम संस्कार: राजकीय सम्मान के साथ विदाई
शिबू सोरेन का पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए रांची में उनके आवास पर रखा गया है, जहां हजारों लोग अपने प्रिय नेता को श्रद्धांजलि देने पहुंच रहे हैं। उनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा, जिसमें राज्य और देश भर से गणमान्य व्यक्ति शामिल होंगे।
शिबू सोरेन का निधन एक युग का अंत है। उनके संघर्ष और उनकी विरासत को हमेशा याद रखा जाएगा। उनकी पहचान एक ऐसे नेता के रूप में रहेगी, जिन्होंने झारखंड के लोगों के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। उनका जीवन झारखंड के इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।




