बेंगलुरु की एक विशेष अदालत ने शनिवार को जनता दल (सेक्युलर) (JDS) के पूर्व सांसद प्रज्वल रेवन्ना को बलात्कार के एक मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई है। इस फैसले को भारतीय न्यायपालिका में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है, क्योंकि यह मामला देश के सबसे हाई-प्रोफाइल राजनीतिक परिवारों में से एक से जुड़ा है।
फैसले से जुड़ी मुख्य बातें
- सजा और जुर्माना: अदालत ने 34 वर्षीय प्रज्वल रेवन्ना को उम्रकैद की सजा सुनाने के साथ-साथ 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माने की इस राशि में से 7 लाख रुपये पीड़ित महिला को मुआवजे के रूप में दिए जाएंगे।
- मामला: यह मामला एक 47 वर्षीय घरेलू सहायिका के साथ दुष्कर्म का है, जिसने आरोप लगाया था कि प्रज्वल ने 2021 में उसके साथ दो बार दुष्कर्म किया और इसका वीडियो भी बनाया।
- तेज़ सुनवाई: इस मामले की सुनवाई सिर्फ 14 महीनों में पूरी हो गई, जो ऐसे जटिल मामलों के लिए काफी तेज गति से हुई।
- भावनाएं और बयान: सजा सुनाए जाने के दौरान प्रज्वल रेवन्ना अदालत में भावुक हो गए। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया है और उन पर लगे आरोप राजनीति से प्रेरित हैं। उन्होंने कोर्ट से कम सजा देने की अपील करते हुए कहा, “मैंने अपनी जिंदगी में सिर्फ एक गलती की है, वो है राजनीति में तेज़ी से आगे बढ़ना।”
- अन्य मामले: यह प्रज्वल के खिलाफ दर्ज चार मामलों में से पहला मामला है जिसमें फैसला आया है। बाकी तीन मामलों में भी सुनवाई चल रही है।
राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव
यह फैसला एक ऐसे समय में आया है जब देश में महिलाओं के खिलाफ यौन अपराधों पर कड़ी कार्रवाई की मांग लगातार बढ़ रही है। पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा के पोते होने के कारण प्रज्वल रेवन्ना का यह मामला राजनीतिक हलकों में भी खूब चर्चा में रहा। इस मामले के सामने आने के बाद, जेडीएस ने उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया था, और वह हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में हसन सीट से हार भी गए थे।
इस फैसले को एक मजबूत संदेश माना जा रहा है कि कानून से कोई भी बड़ा नहीं है, भले ही वह किसी भी प्रभावशाली राजनीतिक परिवार से क्यों न हो।




