पटना, बिहार: 17 जुलाई 2025 को पटना के शास्त्रीनगर थाना क्षेत्र स्थित पारस हॉस्पिटल में दिनदहाड़े हुए चंदन कुमार मिश्रा हत्याकांड ने पूरे शहर में दहशत फैला दी थी। इस जघन्य वारदात ने न सिर्फ कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए थे, बल्कि बिहार पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी उंगलियां उठाई थीं। अब इस मामले में पुलिस को एक बड़ी सफलता मिली है। हत्याकांड के मुख्य आरोपी तौसीफ उर्फ बादशाह को कोलकाता से धर दबोचा गया है। इस गिरफ्तारी के साथ ही, इस हाई-प्रोफाइल मर्डर केस की गुत्थी सुलझती दिख रही है, क्योंकि पुलिस ने कुल 5 लोगों को हिरासत में लिया है।

हत्याकांड की पूरी कहानी: जेल की रंजिश बनी मौत की वजह
पुलिस जांच में सामने आया है कि 17 जुलाई को चंदन मिश्रा को गोली मारने के बाद, शूटर तौसीफ उर्फ बादशाह को नीशू खान ने अपने घर में पनाह दी थी। नीशू खान की गिरफ्तारी से पुलिस को तौसीफ तक पहुंचने में अहम सुराग मिला।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, चंदन मिश्रा की हत्या के पीछे की मुख्य वजह जेल में बंद कुख्यात अपराधी शेरू सिंह से उसकी पुरानी रंजिश थी। बताया जा रहा है कि चंदन और शेरू सिंह के बीच जेल में ही किसी बात को लेकर दुश्मनी हो गई थी, जिसकी परिणति चंदन की हत्या के रूप में हुई। शेरू सिंह के गुर्गों ने ही इस हत्याकांड को अंजाम दिया। यह घटना जेल के अंदरूनी गैंगवार और आपराधिक सांठगांठ की ओर इशारा करती है, जहां जेल के भीतर की दुश्मनी बाहर आकर खूनी खेल में बदल जाती है।
बिहार पुलिस पर सवाल और कार्रवाई
चंदन मिश्रा हत्याकांड के बाद बिहार पुलिस को चौतरफा आलोचना का सामना करना पड़ा था। दिनदहाड़े एक अस्पताल के पास हुई हत्या ने कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। बढ़ते जनदबाव और पुलिस की फजीहत के बाद, प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए 5 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया। निलंबित होने वालों में एक पुलिस अवर निरीक्षक, दो सहायक अवर निरीक्षक और दो सिपाही शामिल हैं। यह कदम दर्शाता है कि पुलिस प्रशासन ने अपनी चूक स्वीकार की है और मामले में लापरवाही बरतने वालों पर जवाबदेही तय करने का प्रयास किया है।
आगे की जांच और चुनौतियां
मुख्य आरोपी और अन्य सहयोगियों की गिरफ्तारी के बाद, अब पुलिस इस हत्याकांड की हर परत खोलने की कोशिश कर रही है। शेरू सिंह की इस साजिश में क्या भूमिका थी, और कितने अन्य लोग इस गैंगवार का हिस्सा थे, इन सभी पहलुओं पर गहन पूछताछ जारी है। इस मामले में आगे और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
यह घटना बिहार में आपराधिक गतिविधियों को नियंत्रित करने और कानून-व्यवस्था को मजबूत करने की चुनौती को फिर से उजागर करती है। पुलिस के सामने अब यह सुनिश्चित करने की चुनौती है कि ऐसे अपराधी जेल के अंदर से भी अपने नेटवर्क को सक्रिय न रख पाएं और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
क्या आपको लगता है कि पुलिस की यह कार्रवाई बिहार में अपराध नियंत्रण के लिए पर्याप्त है, या अभी और बड़े बदलावों की आवश्यकता है?








