आज, 21 जुलाई 2025 से संसद का मॉनसून सत्र शुरू हो गया है, जो 21 अगस्त तक चलेगा। इस सत्र के दौरान देश की राजनीति में एक बार फिर गरमाहट देखने को मिलेगी, क्योंकि सरकार और विपक्ष दोनों ही अपनी-अपनी रणनीतियों के साथ तैयार हैं। स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रमों के चलते 12 अगस्त से 18 अगस्त तक सत्र स्थगित रहेगा।
सरकार की बिल लाने की तैयारी
सरकार इस मॉनसून सत्र में कई महत्वपूर्ण बिल पेश करने की तैयारी में है। इन विधेयकों का उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों में सुधार और विकास लाना है। हालांकि, इन बिलों पर विपक्ष की कड़ी नजर रहेगी और उन पर तीखी बहस होने की पूरी संभावना है।
विपक्ष के तेवर और मुख्य मुद्दे
विपक्ष ने इस सत्र में सरकार को घेरने के लिए कई गंभीर और ज्वलंत मुद्दों को चुना है। इनमें शामिल हैं:
- “ऑपरेशन सिंदूर”: यह मुद्दा राष्ट्रीय सुरक्षा और आंतरिक मामलों से संबंधित हो सकता है, जिस पर विपक्ष सरकार से स्पष्टीकरण और जवाबदेही की मांग करेगा।
- बिहार में SIR (सामुदायिक घुसपैठ रिकॉर्ड): बिहार से जुड़ा यह मुद्दा सामाजिक और प्रशासनिक प्रभावों को लेकर चर्चा में आ सकता है, जिस पर विपक्ष सरकार की नीतियों पर सवाल उठाएगा।
- पहलवानों पर हमला: खिलाड़ियों से जुड़ा यह संवेदनशील मुद्दा, जिसमें पहलवानों पर कथित हमले की बात है, सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है।
- अहमदाबाद प्लेन हादसा: हाल ही में हुए इस हादसे को लेकर विपक्ष सरकार से सुरक्षा मानकों और जांच की प्रगति पर जवाब मांगेगा।
- सीजफायर पर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का दावा और विदेश नीति: अंतरराष्ट्रीय संबंधों और देश की विदेश नीति से जुड़े इन मुद्दों पर भी विपक्ष सरकार को घेरने का प्रयास करेगा, खासकर अगर अमेरिकी राष्ट्रपति के दावे का भारत पर कोई प्रभाव पड़ा हो।
मॉनसून का कहर: आपदा पर जवाबदेही की मांग
इसके अलावा, हाल ही में हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में हुई भारी बारिश और भूस्खलन से हुए व्यापक नुकसान को लेकर भी विपक्ष सरकार से जवाबदेही की मांग कर सकता है। इन प्राकृतिक आपदाओं में जान-माल के भारी नुकसान के बाद राहत और बचाव कार्यों तथा भविष्य की तैयारियों को लेकर सरकार पर दबाव रहेगा।
इस मॉनसून सत्र में विभिन्न मुद्दों पर तीखी बहस, विरोध प्रदर्शन और हंगामे के आसार हैं। यह सत्र देश के लिए कई महत्वपूर्ण फैसलों और राजनीतिक घमासान का गवाह बनेगा। सभी की निगाहें इस बात पर टिकी होंगी कि सरकार अपने एजेंडे को कैसे आगे बढ़ाती है और विपक्ष किन मुद्दों पर सरकार को कितनी मजबूती से घेर पाता है।








