यह अत्यंत गौरवपूर्ण क्षण है! छत्रपति शिवाजी महाराज के असाधारण सैन्य वास्तुकला के प्रतीक, ‘मराठा मिलिट्री लैंडस्केप्स’ को यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल सूची में शामिल कर लिया गया है। यह भारत के लिए 44वीं ऐसी संपत्ति है जिसे यह प्रतिष्ठित दर्जा प्राप्त हुआ है।
नई दिल्ली: भारत के गौरवशाली इतिहास और अदम्य शौर्य का प्रतीक, छत्रपति शिवाजी महाराज के “मराठा मिलिट्री लैंडस्केप्स” को संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (UNESCO) की विश्व धरोहर स्थलों की प्रतिष्ठित सूची में शामिल कर लिया गया है। यह घोषणा पेरिस में आयोजित विश्व धरोहर समिति के 47वें सत्र के दौरान की गई, जिससे भारत के लिए यह एक ऐतिहासिक और अत्यंत गौरव का क्षण बन गया है।
क्या है ‘मराठा मिलिट्री लैंडस्केप्स’?
‘मराठा मिलिट्री लैंडस्केप्स’ एक सामूहिक नामांकन है जिसमें 17वीं से 19वीं शताब्दी के बीच मराठा साम्राज्य द्वारा निर्मित और विकसित 12 किले शामिल हैं। ये किले न केवल सैन्य रणनीति और इंजीनियरिंग के अद्भुत उदाहरण हैं, बल्कि मराठा शासनकाल के दौरान विकसित हुई विशिष्ट वास्तुकला और रक्षा प्रणालियों को भी दर्शाते हैं। ये किले विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में फैले हुए हैं, जिनमें पहाड़ी, तटीय और पठारी किले शामिल हैं, जो मराठा शासकों की सामरिक दूरदर्शिता को प्रदर्शित करते हैं।
शामिल किए गए 12 किले:

इस सूची में कुल 12 किले शामिल किए गए हैं, जिनमें से 11 महाराष्ट्र में और एक तमिलनाडु में स्थित है:
महाराष्ट्र के 11 किले:
- साल्हेर किला (Salher Fort): महाराष्ट्र का सबसे ऊँचा किला, रणनीतिक महत्व रखता है।
- शिवनेरी किला (Shivneri Fort): छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्मस्थान।
- लोहगढ़ (Lohagad Fort): पुणे जिले में स्थित, अपनी मजबूत संरचना के लिए प्रसिद्ध।
- खंडेरी किला (Khanderi Fort): रायगढ़ जिले में समुद्र के बीच एक द्वीप पर स्थित, समुद्री सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण।
- रायगढ़ किला (Raigad Fort): मराठा साम्राज्य की राजधानी और छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्याभिभिषेक स्थल।
- राजगढ़ किला (Rajgad Fort): मराठा साम्राज्य की पहली राजधानी, स्वराज्य की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- प्रतापगढ़ किला (Pratapgad Fort): सतारा जिले में स्थित, अफजल खान की घटना के लिए प्रसिद्ध।
- सुवर्णदुर्ग (Suvarnadurg Fort): रत्नागिरी जिले में स्थित एक तटीय किला, मराठा नौसेना की शक्ति का प्रतीक।
- पन्हाला किला (Panhala Fort): कोल्हापुर के पास स्थित, कई ऐतिहासिक घटनाओं का गवाह।
- विजयदुर्ग (Vijaydurg Fort): महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग जिले में एक तटीय किला, अपनी अभेद्य समुद्री दीवारों के लिए जाना जाता है।
- सिंधुदुर्ग (Sindhudurg Fort): समुद्र तट पर निर्मित एक और अभेद्य किला, जिसका निर्माण शिवाजी महाराज ने स्वयं करवाया था।
तमिलनाडु का 1 किला:
12. जिंजी किला (Gingee Fort): तमिलनाडु में स्थित, यह किला मराठा साम्राज्य के विस्तार और दक्षिणी भारत में उनकी सैन्य उपस्थिति को दर्शाता है।
महत्व और प्रभाव:
- वैश्विक पहचान: यह निर्णय छत्रपति शिवाजी महाराज की सैन्य प्रतिभा और मराठा साम्राज्य की स्थापत्य कला को वैश्विक मानचित्र पर लाता है।
- संरक्षण को बढ़ावा: यूनेस्को का दर्जा इन किलों के संरक्षण, रखरखाव और प्रचार के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन और फंडिंग को आकर्षित करेगा।
- पर्यटन को बढ़ावा: विश्व धरोहर स्थल का दर्जा प्राप्त होने से इन ऐतिहासिक स्थलों पर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होगी, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ मिलेगा।
- सांस्कृतिक गौरव: यह भारत के समृद्ध इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करता है, जिससे देशवासियों में गर्व की भावना बढ़ती है।
- शोध और अध्ययन: यह इन किलों और मराठा सैन्य इतिहास पर आगे के शोध और अध्ययन के लिए नए अवसर प्रदान करेगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री तथा उपमुख्यमंत्री ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर खुशी व्यक्त की है। यह केवल महाराष्ट्र के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे भारत के लिए एक गौरवशाली क्षण है, जो हमारी समृद्ध विरासत और अदम्य भावना को दर्शाता है।




