नई दिल्ली/भोपाल:
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भारत में निर्मित तीन कफ सिरप पर वैश्विक चेतावनी (Global Alert) जारी की है।
यह अलर्ट मध्य प्रदेश में कई बच्चों की संदिग्ध मौतों के बाद जारी किया गया है।
WHO का कहना है कि इन सिरप में जहरीले रसायन — डाइएथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) और एथिलीन ग्लाइकॉल (EG) होने की आशंका है, जो गंभीर विषाक्तता और किडनी फेल्योर का कारण बन सकते हैं।
🔹 घटना की शुरुआत — मध्य प्रदेश में बच्चों की मौत
मध्य प्रदेश के खंडवा और बैतूल जिलों में पिछले दो हफ्तों में 8 बच्चों की मौत की खबर सामने आई थी।
सभी बच्चे बुखार और सर्दी-खांसी से पीड़ित थे और स्थानीय दवा दुकानों से एक ही ब्रांड का कफ सिरप खरीदकर सेवन कर रहे थे।
जब बच्चों की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी, तो परिजन उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें बचा नहीं सके।
राज्य स्वास्थ्य विभाग ने तुरंत जांच शुरू की, जिसमें पाया गया कि सिरप एक ही निर्माता कंपनी से जुड़ा हुआ है।
WHO ने इन घटनाओं पर संज्ञान लेते हुए भारत सरकार को रिपोर्ट भेजी और चेतावनी जारी की।
🔹 WHO का बयान — “सावधानी बरतें, बच्चों को तुरंत रोकें”
WHO ने अपने आधिकारिक बयान में कहा:
“इन सिरप के नमूनों में संदिग्ध स्तर के विषैले रसायन पाए गए हैं। जो भी देश या व्यक्ति इन सिरप का उपयोग कर रहा है, उसे तत्काल रोक देना चाहिए।”
WHO ने सभी देशों से अपील की है कि वे सप्लाई चैन की निगरानी करें और सुनिश्चित करें कि ये सिरप बाजार में उपलब्ध न रहें।
संगठन ने यह भी कहा कि जांच पूरी होने तक इन दवाओं की बिक्री और वितरण पर अस्थायी रोक लगाई जाए।
🔹 भारत की दवा नियामक एजेंसियाँ सक्रिय
WHO अलर्ट के बाद भारत की सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSCO) और ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने जांच तेज कर दी है।
मध्य प्रदेश के राज्य औषधि नियंत्रण विभाग ने भी संबंधित कंपनियों के सैंपल सील कर लिए हैं।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया,
“हमने तीनों सिरप के नमूने जांच के लिए केंद्रीय प्रयोगशाला भेज दिए हैं।
अगर इनमे डाइएथिलीन ग्लाइकॉल या एथिलीन ग्लाइकॉल की पुष्टि होती है, तो निर्माता कंपनी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।”
🔹 कौन-कौन से सिरप पर WHO का अलर्ट?
हालांकि WHO ने फिलहाल दवा कंपनियों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं,
लेकिन सूत्रों के अनुसार ये सिरप “ब्रॉन्कोवेल”, “कफीक्योर” और “कफमेड” जैसे उत्पादों से जुड़े हो सकते हैं।
WHO की रिपोर्ट के मुताबिक, ये सिरप अफ्रीकी देशों और दक्षिण एशिया में भी निर्यात किए गए थे।
🔹 DEG और EG क्या हैं और क्यों घातक हैं?
डाइएथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) और एथिलीन ग्लाइकॉल (EG) सामान्यत: औद्योगिक सॉल्वेंट्स होते हैं —
इनका उपयोग एंटीफ्रीज और ब्रेक फ्लुइड जैसे रसायनों में होता है।
यदि ये पदार्थ दवाओं में मिल जाएँ, तो ये किडनी फेल्योर, लिवर डैमेज, और तंत्रिका तंत्र की खराबी का कारण बन सकते हैं।
WHO की रिपोर्ट में कहा गया है कि इन रसायनों की थोड़ी मात्रा भी शिशुओं के लिए घातक हो सकती है।
🔹 भारत में पहले भी हो चुके हैं ऐसे मामले
यह पहली बार नहीं है जब भारत निर्मित दवाओं पर सवाल उठे हैं।
2022 में गाम्बिया में 66 बच्चों की मौत के बाद भी WHO ने मैडेन फार्मास्युटिकल्स (हरियाणा) के सिरप पर अलर्ट जारी किया था।
इसके बाद 2023 में उज्बेकिस्तान में भी इसी तरह की घटना हुई थी।
हालांकि भारत सरकार ने उस समय कहा था कि WHO ने पर्याप्त वैज्ञानिक साक्ष्य नहीं दिए थे,
लेकिन अब लगातार तीसरी बार भारतीय दवा निर्माताओं के खिलाफ WHO की चेतावनी चिंता का विषय बन गई है।
🔹 सरकार की प्रतिक्रिया
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने WHO से रिपोर्ट मांगी है और कहा है कि
“हम इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं। जांच पूरी होने तक संबंधित दवाओं की बिक्री रोक दी गई है।”
मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री ने कहा,
“राज्य में बच्चों की मौत की घटनाओं की हर एंगल से जांच होगी। अगर लापरवाही साबित होती है, तो कंपनी के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाएगा।”
🔹 दवा उद्योग में मचा हड़कंप
WHO के इस अलर्ट के बाद भारतीय फार्मा उद्योग में भी चिंता और असमंजस की स्थिति है।
फार्मा विशेषज्ञों का कहना है कि
“भारत दुनिया का सबसे बड़ा जेनरिक दवा निर्माता है।
इस तरह की घटनाएँ देश की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा सकती हैं।”
इंडियन फार्मास्युटिकल एसोसिएशन ने कहा है कि सभी कंपनियों को
क्वालिटी कंट्रोल स्टैंडर्ड्स का सख्ती से पालन करना चाहिए ताकि इस तरह के हादसे न हों।
🔹 WHO की सलाह — निगरानी और पारदर्शिता
WHO ने भारत समेत सभी सदस्य देशों से कहा है कि वे
अपने बाजारों में नकली या संदिग्ध गुणवत्ता वाली दवाओं की पहचान करें।
संगठन ने यह भी कहा कि देशों को अपने दवा नियामक तंत्र को मजबूत करना चाहिए ताकि
दवाओं के निर्माण और निर्यात में किसी भी तरह की चूक न हो।
🔹 जनता के लिए सलाह
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि
वे बच्चों को कोई भी सिरप देने से पहले डॉक्टर की सलाह लें।
स्थानीय दुकानों से बिना प्रिस्क्रिप्शन के खरीदी गई दवाओं का सेवन न करें।
अगर सिरप पीने के बाद उल्टी, कमजोरी, या पेशाब में कमी जैसे लक्षण दिखें,
तो तुरंत अस्पताल जाएं।
🔹सख्त कार्रवाई की ज़रूरत
WHO का यह अलर्ट भारत के दवा उद्योग के लिए एक बड़ा सबक है।
पिछले कुछ वर्षों में दवाओं की गुणवत्ता को लेकर उठे सवालों ने भारत की “फार्मेसी ऑफ द वर्ल्ड” की छवि को चुनौती दी है।
अब जरूरत है पारदर्शिता, निगरानी और जवाबदेही की।
अगर इस बार सरकार और नियामक संस्थाएं सख्त कदम उठाती हैं,
तो यह आने वाले समय में भारत की दवा विश्वसनीयता को दोबारा स्थापित कर सकता है।








