भारत-रूस रक्षा संबंध मजबूत: पुतिन की यात्रा से पहले RELOS समझौते को मंजूरी
भारत और रूस के बीच सामरिक साझेदारी एक नई ऊँचाई पर पहुंच रही है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की आगामी भारत यात्रा से पहले रूस की संसद ने भारत के साथ एक महत्वपूर्ण रक्षा समझौते RELOS (Reciprocal Exchange of Logistics Support Agreement) को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। यह समझौता दोनों देशों की सेनाओं के लिए नई रणनीतिक संभावनाएँ खोलता है और रक्षा सहयोग को और मजबूत करता है।
RELOS एक ऐसा तंत्र है जो भारतीय और रूसी सेना, नौसेना और वायुसेना को एक-दूसरे की सैन्य सुविधाओं, बेस, ईंधन भरने की सेवाओं और लॉजिस्टिक सपोर्ट का उपयोग करने की अनुमति देगा। वैश्विक परिदृश्य में बदलते सामरिक समीकरणों के बीच यह समझौता भारत और रूस के बीच ऐतिहासिक भरोसे और दीर्घकालिक साझेदारी का प्रतीक है।
RELOS समझौता क्या है?
RELOS यानी Reciprocal Exchange of Logistics Support Agreement एक सैन्य लॉजिस्टिक सपोर्ट व्यवस्था है। इसकी प्रमुख विशेषताएँ:
- दोनों देशों की सेनाएँ एक-दूसरे के सैन्य बेस, पोर्ट और एयरफील्ड का उपयोग कर सकेंगी
- ईंधन, भोजन, मरम्मत, गोला-बारूद और स्पेयर पार्ट्स जैसी लॉजिस्टिक सुविधाओं का एक्सेस
- सैन्य अभ्यास (Military Exercises) अधिक आसान और सुचारू होंगे
- मानवीय सहायता, आपदा राहत और नौसैनिक मिशनों में तेजी
इस तरह का समझौता भारत ने अमेरिका (LEMOA), फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर और जापान जैसे देशों के साथ पहले ही कर रखा है। रूस के साथ RELOS जुड़ने से भारत की सामरिक क्षमता और भी बढ़ जाएगी।
रूस की मंजूरी का महत्व
रूस की संसद द्वारा इस समझौते को मंजूरी मिलना कई मायनों में महत्वपूर्ण है:
1. पुतिन की भारत यात्रा का एजेंडा मजबूत
राष्ट्रपति पुतिन की भारत यात्रा के दौरान यह समझौता केंद्र में रहने वाला है। यह दोनों देशों के रक्षा भरोसे को दर्शाता है।
2. भारत-रूस रक्षा सहयोग का विस्तार
दोनों देश पहले से ही:
- ब्रह्मोस मिसाइल
- सुखोई-30
- टी-90 टैंक
- S-400 सिस्टम
— जैसे कई क्षेत्रों में साथ काम कर रहे हैं।
RELOS इस रक्षा सहयोग को लॉजिस्टिक और ऑपरेशनल स्तर पर और भी मजबूत करेगा।
3. इंडो-पैसिफिक में रणनीतिक क्षमता बढ़ेगी
हाल के वर्षों में भारतीय नौसेना की वैश्विक पहुँच और ऑपरेशनल रेंज को बढ़ाने में लॉजिस्टिक समझौते बड़ी भूमिका निभाते हैं। रूस के साथ RELOS भारत को आर्कटिक, प्रशांत महासागर और यूरो-एशियाई क्षेत्रों में अतिरिक्त ऑपरेशनल लाभ देगा।
RELOS से भारत को क्या लाभ होगा?
1. भारतीय नौसेना की ऑपरेशनल रेंज बढ़ेगी
रूसी आर्कटिक बेस और प्रशांत तट का उपयोग भारतीय नौसेना के मिशनों को अधिक सक्षम बनाएगा।
2. सैन्य अभ्यास अधिक सुगम होंगे
भारत और रूस नियमित रूप से “इंद्रा एक्सरसाइज” और नौसैनिक अभ्यास करते हैं। RELOS से:
- फ्यूलिंग
- मरम्मत
- तकनीकी सपोर्ट
— आसानी से उपलब्ध होगा।
3. रक्षा सहयोग में लागत कम होगी
भारतीय सैन्य दलों को विदेशों में तैनाती और प्रशिक्षण के दौरान लॉजिस्टिक खर्च कम होगा।
4. संकट और युद्ध की स्थिति में मदद
किसी भी आपातकाल, आपदा या सैन्य संकट में भारत को रूस की सुविधाओं का एक्सेस मिलेगा — और रूस को भारत की।
रूस को क्या फायदा होगा?
RELOS भारत के लिए जितना फायदेमंद है, रूस के लिए भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
- रूस को हिंद महासागर, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में भारत की नौसैनिक सुविधाओं का एक्सेस मिलेगा
- एशिया में रूस की उपस्थिति मजबूत होगी
- भारत के साथ रक्षा संबंध और मजबूत बनेंगे
- सैन्य अभ्यास और तकनीकी सहयोग को गति मिलेगी
वैश्विक रणनीतिक संदर्भ
विश्व राजनीति आज कई मोर्चों पर तेजी से बदल रही है—
- अमेरिका-चीन तनाव
- यूरोप में अस्थिरता
- यूक्रेन युद्ध
- इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा
इन परिस्थितियों में भारत और रूस का करीब आना एक रणनीतिक संदेश देता है कि दोनों देश एक-दूसरे के लिए विश्वसनीय साझेदार बने हुए हैं।
भारत-रूस रक्षा संबंधों का लंबा इतिहास
भारत और रूस (पहले सोवियत संघ) के बीच रक्षा सहयोग दशकों पुराना है।
- 70% से ज्यादा हथियार रूस से
- संयुक्त उत्पादन
- रणनीतिक साझेदारी
- ब्रह्मोस जैसी अत्याधुनिक मिसाइल
यह इतिहास RELOS जैसे समझौतों को और भी महत्वपूर्ण बनाता है, क्योंकि यह सहयोग को अगली पीढ़ी के स्तर तक ले जाता है।
क्या यह समझौता चीन और अमेरिका के संदर्भ में महत्वपूर्ण है?
भारत-चीन तनाव
लद्दाख और हिमालयी सीमा क्षेत्र में चल रहे तनाव के बीच भारत की सैन्य पहुँच का बढ़ना एक महत्वपूर्ण रणनीतिक फायदा है।
भारत-अमेरिका संबंध
भारत अमेरिका के साथ भी लॉजिस्टिक समझौते कर चुका है। अब रूस को जोड़ने से भारत की बैलेंस्ड विदेश नीति मजबूत होती है।
रूस-चीन साझेदारी
रूस और चीन दोनों करीबी सहयोगी हैं, लेकिन भारत के साथ RELOS यह दिखाता है कि रूस भारत को भी समान प्राथमिकता देता है।
पुतिन की भारत यात्रा का बढ़ा महत्व
राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन जल्द ही भारत की यात्रा पर आने वाले हैं।
इस दौरान प्रमुख मुद्दे होंगे—
- रक्षा सहयोग
- ऊर्जा साझेदारी
- अंतरिक्ष सहयोग
- Indo-Pacific रणनीति
- यूक्रेन युद्ध के बीच रूस-भारत संबंध
RELOS समझौते की मंजूरी यात्रा को और भी महत्वपूर्ण बना देती है।
निष्कर्ष
भारत और रूस के रक्षा संबंध हमेशा से मजबूत रहे हैं, लेकिन RELOS समझौते की मंजूरी इस साझेदारी को नए युग में ले जाती है।
यह केवल एक लॉजिस्टिक समझौता नहीं, बल्कि दोनों देशों की रणनीतिक गहराई, भरोसा और सैन्य सहयोग का स्पष्ट संकेत है।
पुतिन की आगामी भारत यात्रा इस समझौते को आधिकारिक रूप से लागू करने और आगे की सैन्य साझेदारी को मजबूत करने का अवसर होगा।
RELOS के लागू होने के बाद भारत और रूस दोनों वैश्विक स्तर पर अधिक सक्षम, अधिक रणनीतिक और अधिक भरोसेमंद सैन्य साझेदार बनकर उभरेंगे।








