जीएसटी काउंसिल से पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अप्रत्यक्ष कर बोर्ड के साथ 20 जून को अहम बैठक :-
GST प्रणाली में बदलाव को लेकर सरकार फिर सक्रिय हुई है। जीएसटी काउंसिल को आगामी बैठक से पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क (सीबी आइसी) के अधिकारियों के साथ आगामी 20 जून को अहम बैठक करने जा रही है।
पिछले छह महीनों से नहीं हुई जीएसटी काउंसिल की बैठक, चलन के मुताबिक हर तीन महीने में होनी चाहिए :
हालांकि इस दिन वित्त मंत्री आयकर विभाग के साथ भी बैठक करेंगी, लेकिन जीएसटी दरों में बदलाव और क्षतिपूर्ति सेस के मुद्दे की वजह से सीबीआइसी के साप होने वाली बैठक अहम मानी जा रही है। बैठक में जीएसटी संग्रह के रुख, दरों में तार्किक बदलाव, जीएसटी पंजीयन से जुड़े नियम और क्षतिपूर्ति सेस जैसे मुद्दों पर सीबीआइसी के साथ चर्चा की जाएगी। माना जा रहा है बैठक के बाद ही जीएसटी काउंसिल की अगली बैठक आयोजित की जाएगी। पिछले छह महीनों से जीएसटी काउंसिल की बैठक नहीं बुलाई गई है जबकि चलन के मुताबिक हर तीन माह में एक बार जीएसटी काउंसिल की बैठक बुलाना जरूरी है।
12 प्रतिशत के स्लैब को हटाया जा सकता है, इसमें शामिल उत्पादों को पांच और 18 प्रतिशत में कर सकते हैं ट्रांसफर :
गत दिसंबर में जीएसटी काउंसिल को आखिरी बैठक में यह निर्णय लिया गया था कि आगामी बैठक से जीएसटी की दरों को लेकर चर्चा की जाएगी ताकि जीएसटी के स्लैब में बदलाव किया जा सके। इसे लेकर मंत्रियों के एक समूह का भी गठन किया गया था और सूत्रों के मुताबिक समूह ने काउंसिल को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है।
सूत्रों का कहना है कि जीएसटी की मौजूदा प्रणाली से 12 प्रतिशत के स्लैब को हटाया जा सकता है और इस स्लैब में शामिल उत्पाद को उनकी जरूरत के मुताबिक पांच प्रतिशत और 15 प्रतिशत के स्लैब में स्थानांतरित किया जा सकता है। अभी पांच, 12, 18 और 28 प्रतिशत के स्लैब हैं।
दरों में बदलाव से कर संग्रह में नहीं पड़े कोई फर्क :
सूत्रों के मुताविक आगामी 20 जून को वित्त मंत्री के नेतृत्व में मंत्रालय के अधिकारी सीवीआइसी के साथ दरों के बदलाव को लेकर चर्चा करेंगे, क्योंकि सरकार किसी भी बदलाव से पहले यह आश्वस्त होना चाहती है कि दरों में बदलाव से जीएसटी संग्रह में कोई कमी नहीं आएगी। चालू वित्त वर्ष 2025-26 के पहले दो महीनों में जीएसटी का मासिक संग्रह दो लाख करोड़ से ऊपर रहा है।
कई कारोबारियों को आइटीसी रिफंड मिलने में होती है दिक्कत :
सीबीआइसी के साथ बैठक में इनपुट क्रेडिट टैक्स (आइटीसी) के रिफंड को लेकर भी गंभीर चर्चा की जाएगी क्योंकि वर्तमान नियमों की वजह से कई कारोबारियों को इनपुट क्रेडिट टैक्स मिलने में परेशानी होती है। जिस कारोबारी को वह अपना माल बेचते हैं और अगर उसने अपना जीएसटी रिटर्न दाखिल नहीं किया है ते उसे विक्रेत कारोबारी को इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं मिल पाता है। इनपुट क्रेडिट टैक्स के रिफंड से जुड़ी इस प्रकार की दिक्कतों को दूर करने को लेकर बात की जाएगी।
अगले वर्ष खत्म हो रही क्षतिपूर्ति सेस की वैधता :
बैठक में क्षतिपूर्ति सेस के भविष्य पर भी चर्चा होगी। इसकी वैधता अगले वर्ष मार्च में समाप्त हो रही है। उसके बाद इस सेस को किस रूप में जारी रखना है या नहीं रखना, इसे लेकर भी सीबीआइसी के साथ और फिर जीएसटी काउंसिल की बैठक में चर्चा की जाएगी। क्षतिपूर्ति सेस के भविष्य को लेकर वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी के नेतृत्व में समूह का गठन किया गया है। समूह को 30 जून तक अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा गया था।