पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से लगा बड़ा झटका, अग्रिम जमानत पर कोर्ट ने लगाई रोक
नई दिल्ली: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता पवन खेड़ा की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (15 अप्रैल 2026) को एक अहम सुनवाई के दौरान तेलंगाना हाई कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें उन्हें ‘ट्रांजिट अग्रिम जमानत’ दी गई थी।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुयान शर्मा द्वारा दर्ज कराई गई एक FIR से जुड़ा है। पवन खेड़ा पर आरोप है कि उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुख्यमंत्री की पत्नी के खिलाफ फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ‘तीन पासपोर्ट’ होने के गंभीर और मानहानिकारक आरोप लगाए थे।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चांदुरकर की पीठ ने तेलंगाना हाई कोर्ट के फैसले पर हैरानी जताते हुए कहा:
“हमें आश्चर्य है कि हाई कोर्ट ने उस मामले में राहत कैसे दी जिसका क्षेत्राधिकार (Jurisdiction) वहां बनता ही नहीं था।”
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट में दलील दी कि पवन खेड़ा ने ‘फोरम शॉपिंग’ (अपनी पसंद की अदालत चुनना) करने की कोशिश की है। उन्होंने बताया कि अपराध और FIR असम में है, जबकि याचिका तेलंगाना में दायर की गई।
प्रमुख बिंदु:
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नोटिस जारी: सुप्रीम कोर्ट ने पवन खेड़ा को नोटिस जारी कर 3 हफ्ते के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
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हाई कोर्ट के आदेश पर रोक: तेलंगाना हाई कोर्ट ने खेड़ा को एक सप्ताह की सुरक्षा दी थी, जिस पर अब रोक लग गई है।
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असम जाने की सलाह: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि खेड़ा अग्रिम जमानत चाहते हैं, तो उन्हें संबंधित क्षेत्राधिकार वाली असम की अदालत में जाना चाहिए।
इस फैसले के बाद अब पवन खेड़ा पर गिरफ्तारी की तलवार लटक सकती है, बशर्ते वे असम की निचली अदालत से तुरंत कोई राहत प्राप्त न कर लें।
पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से लगा बड़ा झटका, अग्रिम जमानत पर कोर्ट ने लगाई रोक
नई दिल्ली: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता पवन खेड़ा की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (15 अप्रैल 2026) को एक अहम सुनवाई के दौरान तेलंगाना हाई कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें उन्हें ‘ट्रांजिट अग्रिम जमानत’ दी गई थी।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुयान शर्मा द्वारा दर्ज कराई गई एक FIR से जुड़ा है। पवन खेड़ा पर आरोप है कि उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुख्यमंत्री की पत्नी के खिलाफ फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ‘तीन पासपोर्ट’ होने के गंभीर और मानहानिकारक आरोप लगाए थे।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चांदुरकर की पीठ ने तेलंगाना हाई कोर्ट के फैसले पर हैरानी जताते हुए कहा:
“हमें आश्चर्य है कि हाई कोर्ट ने उस मामले में राहत कैसे दी जिसका क्षेत्राधिकार (Jurisdiction) वहां बनता ही नहीं था।”
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट में दलील दी कि पवन खेड़ा ने ‘फोरम शॉपिंग’ (अपनी पसंद की अदालत चुनना) करने की कोशिश की है। उन्होंने बताया कि अपराध और FIR असम में है, जबकि याचिका तेलंगाना में दायर की गई।
प्रमुख बिंदु:
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नोटिस जारी: सुप्रीम कोर्ट ने पवन खेड़ा को नोटिस जारी कर 3 हफ्ते के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
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हाई कोर्ट के आदेश पर रोक: तेलंगाना हाई कोर्ट ने खेड़ा को एक सप्ताह की सुरक्षा दी थी, जिस पर अब रोक लग गई है।
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असम जाने की सलाह: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि खेड़ा अग्रिम जमानत चाहते हैं, तो उन्हें संबंधित क्षेत्राधिकार वाली असम की अदालत में जाना चाहिए।
इस फैसले के बाद अब पवन खेड़ा पर गिरफ्तारी की तलवार लटक सकती है, बशर्ते वे असम की निचली अदालत से तुरंत कोई राहत प्राप्त न कर लें।
पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से लगा बड़ा झटका, अग्रिम जमानत पर कोर्ट ने लगाई रोक
नई दिल्ली: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता पवन खेड़ा की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (15 अप्रैल 2026) को एक अहम सुनवाई के दौरान तेलंगाना हाई कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें उन्हें ‘ट्रांजिट अग्रिम जमानत’ दी गई थी।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुयान शर्मा द्वारा दर्ज कराई गई एक FIR से जुड़ा है। पवन खेड़ा पर आरोप है कि उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुख्यमंत्री की पत्नी के खिलाफ फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ‘तीन पासपोर्ट’ होने के गंभीर और मानहानिकारक आरोप लगाए थे।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चांदुरकर की पीठ ने तेलंगाना हाई कोर्ट के फैसले पर हैरानी जताते हुए कहा:
“हमें आश्चर्य है कि हाई कोर्ट ने उस मामले में राहत कैसे दी जिसका क्षेत्राधिकार (Jurisdiction) वहां बनता ही नहीं था।”
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट में दलील दी कि पवन खेड़ा ने ‘फोरम शॉपिंग’ (अपनी पसंद की अदालत चुनना) करने की कोशिश की है। उन्होंने बताया कि अपराध और FIR असम में है, जबकि याचिका तेलंगाना में दायर की गई।
प्रमुख बिंदु:
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नोटिस जारी: सुप्रीम कोर्ट ने पवन खेड़ा को नोटिस जारी कर 3 हफ्ते के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
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हाई कोर्ट के आदेश पर रोक: तेलंगाना हाई कोर्ट ने खेड़ा को एक सप्ताह की सुरक्षा दी थी, जिस पर अब रोक लग गई है।
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असम जाने की सलाह: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि खेड़ा अग्रिम जमानत चाहते हैं, तो उन्हें संबंधित क्षेत्राधिकार वाली असम की अदालत में जाना चाहिए।
इस फैसले के बाद अब पवन खेड़ा पर गिरफ्तारी की तलवार लटक सकती है, बशर्ते वे असम की निचली अदालत से तुरंत कोई राहत प्राप्त न कर लें।
पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से लगा बड़ा झटका, अग्रिम जमानत पर कोर्ट ने लगाई रोक
नई दिल्ली: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता पवन खेड़ा की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (15 अप्रैल 2026) को एक अहम सुनवाई के दौरान तेलंगाना हाई कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें उन्हें ‘ट्रांजिट अग्रिम जमानत’ दी गई थी।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुयान शर्मा द्वारा दर्ज कराई गई एक FIR से जुड़ा है। पवन खेड़ा पर आरोप है कि उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुख्यमंत्री की पत्नी के खिलाफ फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ‘तीन पासपोर्ट’ होने के गंभीर और मानहानिकारक आरोप लगाए थे।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चांदुरकर की पीठ ने तेलंगाना हाई कोर्ट के फैसले पर हैरानी जताते हुए कहा:
“हमें आश्चर्य है कि हाई कोर्ट ने उस मामले में राहत कैसे दी जिसका क्षेत्राधिकार (Jurisdiction) वहां बनता ही नहीं था।”
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट में दलील दी कि पवन खेड़ा ने ‘फोरम शॉपिंग’ (अपनी पसंद की अदालत चुनना) करने की कोशिश की है। उन्होंने बताया कि अपराध और FIR असम में है, जबकि याचिका तेलंगाना में दायर की गई।
प्रमुख बिंदु:
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नोटिस जारी: सुप्रीम कोर्ट ने पवन खेड़ा को नोटिस जारी कर 3 हफ्ते के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
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हाई कोर्ट के आदेश पर रोक: तेलंगाना हाई कोर्ट ने खेड़ा को एक सप्ताह की सुरक्षा दी थी, जिस पर अब रोक लग गई है।
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असम जाने की सलाह: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि खेड़ा अग्रिम जमानत चाहते हैं, तो उन्हें संबंधित क्षेत्राधिकार वाली असम की अदालत में जाना चाहिए।
इस फैसले के बाद अब पवन खेड़ा पर गिरफ्तारी की तलवार लटक सकती है, बशर्ते वे असम की निचली अदालत से तुरंत कोई राहत प्राप्त न कर लें।








