उत्तर प्रदेश में अवैध धर्मांतरण के एक बड़े और सुनियोजित रैकेट का खुलासा हुआ है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों को भी चौंका दिया है। आगरा और प्रतापगढ़ में हुई बड़ी कार्रवाई में कुल 18 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें आगरा से 10 और प्रतापगढ़ से 8 लोग शामिल हैं। इस गिरोह के तार केवल भारत में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठनों और कट्टरपंथी नेटवर्क से भी जुड़े होने का संदेह है।
“चंगाई सभा” की आड़ में धर्मांतरण का धंधा
गिरफ्तार किए गए आरोपियों पर आरोप है कि वे “चंगाई सभा” के नाम पर भोले-भाले लोगों को बरगला रहे थे और उनका अवैध तरीके से धर्मांतरण करवा रहे थे। “चंगाई सभा” आमतौर पर धार्मिक सभाएं होती हैं, जहाँ शारीरिक और मानसिक बीमारियों से मुक्ति दिलाने का दावा किया जाता है। लेकिन, इस गिरोह ने इसकी आड़ में लोगों की आस्था का फायदा उठाया और उन्हें धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित किया। यह एक गंभीर मामला है क्योंकि यह सीधे तौर पर लोगों की धार्मिक स्वतंत्रता का हनन और उनकी भेद्यता का दुरुपयोग है।
आतंकी संगठनों से कनेक्शन और विदेशी फंडिंग
जांच के दौरान जो सबसे चौंकाने वाली बात सामने आई है, वह इस गिरोह के आईएसआईएस (ISIS), लश्कर-ए-तैयबा और आईएसआई (ISI) जैसे खूंखार आतंकी संगठनों से जुड़े होने की संभावना है। खुफिया एजेंसियों के अनुसार, इस अवैध धर्मांतरण रैकेट के तार कट्टरपंथी उपदेशक जाकिर नाईक से भी जुड़ रहे हैं। जाकिर नाईक, जो अपने भड़काऊ भाषणों के लिए जाना जाता है, पहले से ही भारत में कई मामलों में वांछित है।
यह भी पता चला है कि इन गिरोहों को विदेशों से भारी मात्रा में फंडिंग मिलती थी। उनका नेटवर्क केवल भारत तक सीमित नहीं था, बल्कि अमेरिका, कनाडा, दुबई और पाकिस्तान सहित कई अन्य देशों में भी फैला हुआ था। इतनी व्यापक पहुंच और अंतरराष्ट्रीय फंडिंग यह संकेत देती है कि यह सिर्फ एक छोटा-मोटा गिरोह नहीं, बल्कि एक संगठित और बड़ा नेटवर्क है जिसका उद्देश्य बड़े पैमाने पर धर्मांतरण करवाना था। प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी अब इस मामले में सक्रिय हो गया है और जाकिर नाईक से जुड़ी संस्थाओं की फंडिंग और संपत्तियों की पड़ताल कर रहा है।
राष्ट्रीय सुरक्षा पर खतरा और आगे की जांच
इस रैकेट का पर्दाफाश राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण है। आतंकी संगठनों से संभावित संबंध और विदेशी फंडिंग का मतलब है कि यह केवल धार्मिक धोखाधड़ी का मामला नहीं, बल्कि देश के आंतरिक सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा है।
उत्तर प्रदेश पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं। यह पता लगाया जा रहा है कि इस रैकेट में और कौन-कौन शामिल हैं, इसका असली मकसद क्या है, और यह देश के किन-किन हिस्सों में सक्रिय है। इन गिरफ्तारियों से अवैध धर्मांतरण के खिलाफ एक मजबूत संदेश गया है, लेकिन इस पूरे षड्यंत्र को पूरी तरह से बेनकाब करने में अभी समय लगेगा।








