देश की सर्वोच्च अदालत, सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए अब अपने कर्मचारियों की सीधी भर्ती और प्रोन्नति में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षण लागू कर दिया है। 24 जून, 2025 को जारी एक सर्कुलर के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट ने अपने सभी कर्मचारियों को इस बारे में सूचित किया है।
यह पहली बार है जब सुप्रीम कोर्ट में कर्मचारियों के लिए आरक्षण नीति लागू की गई है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के न्यायाधीशों की नियुक्तियों में आरक्षण लागू नहीं होता, फिर भी नियुक्तियों में हर वर्ग और हर क्षेत्र के प्रतिनिधित्व का ध्यान रखा जाता है। लेकिन कर्मचारियों की भर्ती में अभी तक यह नीति नहीं थी।
मुख्य बिंदु:
- 200-पॉइंट रोस्टर प्रणाली: सीधी भर्ती में SC और ST को आरक्षण का लाभ देने के लिए 200-पॉइंट की रोस्टर प्रणाली लागू की गई है। यह रोस्टर 23 जून, 2025 को जारी किया गया था।
- आरक्षण प्रतिशत: इस नीति के तहत, अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के लिए 15 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के लिए 7.5 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है।
- प्रभावी तिथि: यह आरक्षण नीति औपचारिक रूप से 23 जून, 2025 से प्रभावी मानी जाएगी।
- दीर्घकालिक इंतजार: केंद्र सरकार ने सरकारी नौकरियों में आरक्षण लागू करने के लिए 2 जुलाई, 1997 को आदेश जारी किया था। इसके लगभग 28 वर्षों बाद अब सुप्रीम कोर्ट में कर्मचारियों की सीधी भर्ती और प्रोन्नति में यह आरक्षण लागू हुआ है।
- किन पदों पर लागू: इस नीति के मुताबिक, आरक्षण का लाभ रजिस्ट्रार, वरिष्ठ निजी सहायकों, सहायक पुस्तकालयाध्यक्षों, कनिष्ठ न्यायालय सहायकों और चैंबर अटेंडेंट जैसे पदों पर उपलब्ध होगा।
- आपत्ति दर्ज करने का प्रावधान: सुप्रीम कोर्ट ने 24 जून, 2025 को जारी सर्कुलर में बताया है कि मॉडल आरक्षण रोस्टर को सुप्रीम कोर्ट के आंतरिक ईमेल नेटवर्क (Supnet) पर अपलोड कर दिया गया है। यदि किसी कर्मचारी को रोस्टर या रजिस्टर में गलतियों या अशुद्धियों के बारे में कोई आपत्ति या प्रतिवेदन है, तो वे रजिस्ट्रार (भर्ती) को इसकी जानकारी दे सकते हैं।








