यमन में मौत की सजा का सामना कर रही केरल की भारतीय नर्स निमिषा प्रिया का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है, और उनकी रिहाई को लेकर भारत में चिंता बनी हुई है। ताजा घटनाक्रम में, मुस्लिम धर्मगुरुओं के एक समूह ने निमिषा की जान बचाने के लिए आगे आकर पीड़ित परिवार से बातचीत करने की पहल की है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब उनकी फांसी की सजा को लेकर अनिश्चितता और बढ़ गई है।
मामला क्या है?
निमिषा प्रिया केरल के पलक्कड़ जिले की निवासी हैं। उन पर यमन के एक नागरिक तालाल अब्दो महदी की हत्या का आरोप है। यह घटना 2017 में हुई थी। निमिषा ने दावा किया था कि महदी ने उनका पासपोर्ट जब्त कर लिया था और उन्हें अपनी ‘पत्नी’ के रूप में व्यवहार करने के लिए मजबूर कर रहा था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि महदी उन्हें प्रताड़ित करता था और उनके क्लिनिक से होने वाली कमाई को भी हथिया लेता था। निमिषा के अनुसार, उन्होंने महदी को शांत करने के लिए उसे कुछ दवाएं दी थीं, जिसके कारण उसकी आकस्मिक मृत्यु हो गई। मौत के बाद, उन्होंने घबराकर महदी के शरीर को ठिकाने लगाने की कोशिश की थी।
यमन की निचली अदालत ने 2021 में निमिषा प्रिया को महदी की हत्या का दोषी ठहराया और मौत की सजा सुनाई। बाद में, यमन की सर्वोच्च न्यायालय ने भी अप्रैल 2024 में इस सजा को बरकरार रखा, जिससे उनकी कानूनी लड़ाई लगभग समाप्त हो गई थी।
‘ब्लड मनी’ और न्याय की आखिरी उम्मीद
यमन में इस्लामिक शरिया कानून लागू है। इस कानून के तहत, मृत्युदंड के मामलों में, यदि दोषी ‘दीया’ (Diya) या ‘ब्लड मनी’ (रक्त धन) का भुगतान करता है, और यदि मृतक का परिवार इसे स्वीकार कर लेता है, तो मृत्युदंड को माफ किया जा सकता है। यह ‘ब्लड मनी’ मृतक के परिवार के लिए मुआवजे के रूप में काम करती है।
निमिषा प्रिया के मामले में, ‘ब्लड मनी’ ही उनकी जान बचाने की आखिरी उम्मीद मानी जा रही है। मृतक तालाल अब्दो महदी का परिवार पहले ‘ब्लड मनी’ स्वीकार करने को तैयार नहीं था, जिससे मामला और जटिल हो गया था।
मुस्लिम धर्मगुरुओं की मध्यस्थता
अब, केरल के कुछ प्रमुख मुस्लिम धर्मगुरुओं ने निमिषा प्रिया की रिहाई के लिए मध्यस्थता करने की पहल की है। इन धर्मगुरुओं ने यमन में महदी के परिवार से संपर्क स्थापित करने और उन्हें ‘ब्लड मनी’ स्वीकार करने के लिए राजी करने का प्रयास शुरू किया है। इस तरह की मध्यस्थता का इस्लामिक समाजों में काफी महत्व होता है और यह अक्सर विवादों को सुलझाने में सहायक होती है। यह कदम निमिषा के लिए एक नई उम्मीद जगाता है।
भारत सरकार और ‘सेव निमिषा प्रिया’ अभियान के प्रयास
- भारत सरकार के प्रयास: भारत सरकार, विशेष रूप से विदेश मंत्रालय (MEA) और भारतीय दूतावास (हालांकि यमन में गृहयुद्ध के कारण दूतावास का संचालन चुनौतीपूर्ण है), निमिषा प्रिया की रिहाई के लिए लगातार कूटनीतिक प्रयास कर रहे हैं। भारतीय अधिकारी यमन के अधिकारियों के साथ संपर्क में हैं और न्यायिक प्रक्रियाओं के बारे में जानकारी प्राप्त कर रहे हैं।
- ‘सेव निमिषा प्रिया’ एक्शन काउंसिल: भारत में, ‘सेव निमिषा प्रिया’ एक्शन काउंसिल (Save Nimisha Priya Action Council) का गठन किया गया है, जो उनकी रिहाई के लिए धन जुटाने और कानूनी सहायता प्रदान करने का काम कर रही है। इस काउंसिल ने ‘ब्लड मनी’ के लिए फंड जुटाने हेतु लोगों से दान की अपील भी की है।
- मानवीय अपील: निमिषा की एक छोटी बेटी है, जिसकी परवरिश अब उसकी दादी कर रही हैं। यह मामला एक गंभीर मानवीय संकट में बदल गया है, और उनकी रिहाई के लिए भारत और विदेशों से कई मानवीय अपीलें की जा रही हैं।
चुनौतियाँ
यमन में जारी गृहयुद्ध और अस्थिर राजनीतिक स्थिति के कारण निमिषा के मामले को सुलझाना और भी जटिल हो गया है। वहां तक पहुँच और कूटनीतिक चैनलों के प्रभावी उपयोग में बाधाएं आ रही हैं। इसके बावजूद, भारत सरकार और विभिन्न संगठन हर संभव प्रयास कर रहे हैं।
निष्कर्ष
निमिषा प्रिया का मामला एक जटिल कानूनी और मानवीय चुनौती प्रस्तुत करता है। मुस्लिम धर्मगुरुओं की मध्यस्थता एक सकारात्मक कदम है, जो ‘ब्लड मनी’ के माध्यम से समाधान की संभावना को बढ़ाती है। भारत उम्मीद कर रहा है कि सभी प्रयासों से निमिषा प्रिया को यमन में मौत की सजा से बचाया जा सकेगा और वह जल्द ही अपने परिवार के पास लौट सकेंगी। इस संवेदनशील मामले पर भारतीय जनता की गहरी निगाहें हैं।




