माओवादी हिंसा प्रभावित क्षेत्र के युवा महज दो माह के प्रशिक्षण से उत्साहित, सीखा उद्यमी बनने का गुर : बस्तर के युवा बनेंगे उद्यमी, आइआइएम व आइआइटी का मिला सहारा :-
माओवादी हिंसा प्रभावित क्षेत्र के युवा महज दो माह के प्रशिक्षण से उत्साहित, सीखा उद्यमी बनने का गुर : बस्तर के युवा बनेंगे उद्यमी, आइआइएम व आइआइटी का मिला सहारा :-
माओवादी हिंसा प्रभावित क्षेत्र के युवा महज दो माह के प्रशिक्षण से उत्साहित, सीखा उद्यमी बनने का गुर :-
माओवादी हिंसा का केंद्र रहे बस्तर संभाग के युवा अब मुख्यधारा से जुड़कर अपने सपनों की उड़ान भरने को तैयार है। कुछ समय पहले तक माओवादियों की हिंसक गतिविधियों के गवाह रहने वाले दंतेवाड़ा जिले में अब रोशन मंडावी, रोशनी गुप्ता, स्नेहलता राव और ओम साहू जैसे युवा उद्यमी बनने का ख्वाब देख रहे हैं। बदलाव की यह नींव सुरक्षा स्थिति में बदलाव से आई है। इसके साथ ही आइआइएम रायपुर और आइआइटी भिलाई युवाओं को उद्यमिता से जोड़ने की मजबूत आधारशिला रख रहे हैं। इन संस्थानों ने दंतेवाड़ा के 50 युवाओं को गहन उद्यमिता प्रशिक्षण दिया है. जिससे वे आत्मनिर्भरता की और कदम बढ़ा रहे हैं।
बस्तर के युवा बनेंगे उद्यमी, आइआइएम व आइआइटी का मिला सहारा :
आइआइएम रायपुर अब बस्तर के विकास में सक्रिय भागीदार बन गया है। इस संस्थान ने दंतेवाड़ा के युवाओं को उद्यमिता का दो महीने का सर्टिफिकेट कोर्स करवाया है। इस प्रशिक्षण के माध्यम से युवा अब ’99’ और ’49’ स्टोर जैसे अभिनव व्आवसायिक विचारों पर काम कर रहे हैं, जिनका उद्देश्य स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजित करना और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है। बचेली गांव की रोशनी गुप्ता ने बताया कि उनके पिता आइसक्रीम और गुपचुप बेचते है।
आइआइएम के प्रशिक्षण के ब्राद उनके पास अब एक स्पष्ट व्यावसायिक योजना है। वे 99′ और 49′ स्टोर खोलने जा रही हैं, जिनमें प्लास्टिक, किचन, स्टेशनरी व दैनिक उपयोग की वस्तुएं मिलेंगी। उन्होंने बताया, ‘मैंने यह कांसेप्ट पहले केवल इंटरनेट मीडिया पर देखा था। अब मैं इसे हकीकत में बदलूंगी।” आइआइएम से प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले दंतेवाड़ा में चुरेली गांव के रोशन मंडावी इलेक्ट्रानिक्स सामानों की मार्केटिंग और सर्विसिंग का काम शुरू करने की योजना बना रहे हैं। 12वीं पास कर चुके रोशन भी अब अपने परिवार के बेहतर भविष्य के बारे में सोच रहे हैं।
राजीव प्रकाश, निदेशक, आइमाइटी भिलाई :
“आदिवासी विकास और शोध के लिए आदिवासी शोच्च संस्थान तैयार किया जा रहा है। युवाओं को स्टार्टअप इकोसिस्टम में सफल बनाने और रोजगार सर्जक तैयार करने के लिए राज्य सरकार के साथ एक नया समझौता भी किया जा रहा है।”
प्रो. रामकुमार ककानी निर्देशका आइआइएम रायपुर :
“50 प्रतिभागियों को विश्व प्रसिद्ध गेम मोनोपाली से वित्त और अकाउंटिंग का प्रशिक्षण दिया गया। वहीं उनकी संचार क्षमताओं को विकसित करने के लिए विएटर ग्रुप की मदद ली गई। प्रतिभागियों को अपने-अपने क्षेत्र में उद्यमिता के ध्वजवाहक बनने के सभी गुर सिखाए गए है।”
कुणाल दूदावत कलेक्टर, दतेवाड़ा :
“आइआइटी भिलाई जिले की भविष्य की जरूरतों की योजना बनाने और उनके क्रियान्वयन में सहयोगी है, जबकि आइआइएम रायपुर जिले के युवाओं को भावी उद्यमी बनाने के प्रयासों में साझेदार है।”
बिजनेस मैनेजमेंट व मार्केटिंग के गुर सीखेः
स्नेहलता राव आइआइएम के इस प्रशिक्षण से बेहद प्रभावित हैं। स्नातक कर चुकीं स्नेहलता यूथ हब केंद्र के माध्यम से आइआइएम पहुंचीं। उन्होंने बताया कि कोर्स के दौरान उन्हें बिजनेस मैनेजमेंट, मार्केटिंग और लेबर ला जैसी कई चीजें सिखाई गई, जो उन्हें अपने ब्यूटी पार्लर व्यवसाय को सफल बनाने में मदद करेंगी। उनका लक्ष्य है कि वे घर-घर जाकर ब्यूटी पार्लर सेवाएं उपलब्ध कराएं। दंतेवाड़ा के एक डिप्लोमा धारक युवा ओम साहू आइआइएम से प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद अब मिलेट प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने की योजना बना रहे हैं। वे मिलेट से विभिन्न उत्पाद बनाकर व्यवसाय करना चाहते हैं।
दीर्वकालिक विकास और ट्राइवत रिसर्च पार्क पर आइआइटी का फोकस:
आइआइटी भिलाई दंतेवाड़ा के समग्र विकास में जिला प्रशासन का सहयोगी बन गया है। आइआइटी खनिज न्यास निधि से दंतेवाड़ा को सालाना मिलने वाले लगभग दो सौ करोड़ रुपये के उचित उपयोग और भविष्योन्मुखी योजनाओं पर काम कर रहा है। जिला प्रशासन के अनुसार संस्थान जिले के दीर्घकालिक विकास और स्थानीय जीवन स्तर में सुधार के लिए अपनी विशेषज्ञता साझा कर रहा है। इसके अलावा आइआइटी के इंजीनियरों की टीम दंतेवाड़ा में एक ट्राइबल रिसर्च पार्क विकसित करने में भी सहयोग कर रही है।