महाराजा सूरजमल का यशोगान : यही वह दिन था जब आगरा किला पर पहली बार मुगल ध्वज की जगह भरतपुर रियासत का झंडा फ़हरा  था।

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आगरा किला में आज गूंजेगा महाराजा सूरजमल का यशोगान :

भारत पर मुगलिया सल्तनत के गवाह रहे आगरा किला में गुरुबर शाम भरतपुर नरेश महाराज सूरजमल का यशोगन गूंजेग। महाराजा सूरजमल ने आगरा किला पर 12 जून 1761 को अधिकार किया था। 13 वर्ष तक उनके अंशजों का करूल रहा। आगरा किला वर्ष पर महाराजा सूरजमल की जीत के के पूरा होने पर पर्यटन विभाग कार्यक्रम आयोजित करा रहा है। शाम सात से रात 10 बजे तक होने वाले कार्यक्रम के करीब 600 दर्शक साक्षी बनेंगे

आगरा किला में महाराष्ट्र के देवगिरी का अजिक्य देवगिरी प्रतिष्ठान तीन वर्षों से 19 फरवरी की छत्रपति शिजी की जयंती मना रहा है। आगरा किला में 12 जून की विजय दिवस के आयेजन के लिए विधायक डा. जीएस धर्मेश के नेतृत्व में प्रगतिशखेल जाट महासभा का प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिला था। इसके बाद आगरा किला में विजय दिवस की तैयारी शुरू हुई।

भारतीय पुरातत्वसर्वेक्षण के महानिदेशक से इसके लिए अनुमति प्राप्त की गई। आगरा किला में गुरुवार शाम जहांगीरी महल के सामने होने वाले कार्यक्रम में पुष्पांजलि के साथ, नृत्य नाटिका और रागिनी की प्रस्तुति होगी। कार्यक्रम की अवधि १० मिनट लगे। मुख्य अतिथि पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह रहेंगे। इससे पूर्व 19 फरवरी को छत्रपति शिवाजी की जयंती पर भी यहीं कार्यक्रम हुआ था। क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी शक्ति सिंह ने बताया कि कार्यक्रम की तैयारी पूरी हो चुकी है। कार्यक्रम में प्रवेश आमंत्रण पत्र के माध्यम से होगा।

40 दिन तक घेराबंदी कर किया था अधिकार :

12 जून 17611, यही वह दिन था , जब आगरा किला पर पहली बार मुगल ध्वज  की जगह भरतपुर रियासत का झंडा फ़हरा  था। भरतपुर नरेश महाराजा सूरजमल ने 40 दिन की घेराबंदी के बाद अगरा किला पर अधिकार कर अपना दरवार लगाया था। करीब 13 वर्ष तक आगरा पर भरतपुर रियासत का शासन रहा। इस दौरान शहर के मोती कटरा, बेलनगंज, किनारी बाजार, सदर भट्टी में भगवान श्रीकृष्ण और बाऊजी के कई मंदिर बनवाए थे।आगरा किला में स्थित रतन सिंह की हवेली को महाराजा सूरजमल के वंसज रतन सिंह ने बनवाई थी। पर्यटकों के लिए यह बंद है।

इतिहासविद राजकिशोर राजे की पुस्तक “तवारीख-ए-आगरा के अनुसार आगरा किला शाह आलम द्वितीय के अधीन था। यह दिल्ली में बैठता था। यहा किलेदार व्यवस्थाए देखते थे। महाराजा सूरजमल ने सेनानायक बलराम के नेतृत्व में चार हजार सैनिकों की फौज आगरा किला पर क़ब्ज़ा करने भेजी थी। यह तीन मई, 1761 की आगरा पहुंची। आगरा किला के किलेदार ने 400 सैनिकों के साथ उनका जाल विरोध किया। महाराजा सूरजमल चार जून 1761 को आगरा आए। किले पर कब्जा नहीं होने पर दुर्ग के हर शहर में रह रहे दुर्ग रक्षकों के स्वजनों को बंधक बना लिया गया। इससे दुर्ग रक्षकों का मनोवल टूट गया।

जून 1761 को आगरा किला पर हिंदू शासक का अधिकार हुआ। आगरा किला  में महाराजा सूरजमल को गोला-बारूद, तीथ और 50 लाख रुपये की संपति मिली थी। इसे डींग  व भरतपुर के किले में भिजवा दिया गया था। ताजमहल में शाहजहा व मुमताज की कब के कक्ष पर लगे चादी के दरवाज़े उतरवा लिए गए थे। महाराजा सूरजमल ने अगरा किला में दरबार लगाया था।

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