नई दिल्ली: इस सप्ताह अमेरिका द्वारा कई देशों पर नए शुल्कों की घोषणा के बावजूद, भारत के लिए शुल्क की तस्वीर अभी भी स्पष्ट नहीं है। हालांकि, अच्छी खबर यह है कि वाणिज्य मंत्रालय का एक उच्च-स्तरीय दल व्यापार समझौते पर जारी गतिरोध को दूर करने के लिए एक बार फिर अमेरिका जा रहा है। जानकारों का मानना है कि दोनों देशों के बीच जल्द ही एक व्यापार समझौते की उम्मीद है, जिससे व्यापारिक संबंधों में नया अध्याय जुड़ सकता है।
क्या है मौजूदा स्थिति?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही में कई देशों, जिनमें जापान, दक्षिण कोरिया, बांग्लादेश, मलेशिया और दक्षिण अफ्रीका जैसे राष्ट्र शामिल हैं, पर नए शुल्क लगाने की घोषणा की है, जो 1 अगस्त से प्रभावी होंगे। इन घोषणाओं के बीच, भारत को इन नई शुल्क अधिसूचनाओं की सूची से बाहर रखा गया है, जो एक सकारात्मक संकेत है।
भारत पर पहले 2 अप्रैल को 26% प्रतिशोधात्मक शुल्क लगाने का ऐलान किया गया था, जिसे बाद में 90 दिनों के लिए स्थगित कर दिया गया था। यह स्थगन 9 जुलाई को समाप्त होने वाला था, लेकिन इसे अब 1 अगस्त तक बढ़ा दिया गया है। यह विस्तार दोनों पक्षों को लंबित मुद्दों को सुलझाने और अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए अतिरिक्त समय प्रदान करता है।
भारतीय दल की अमेरिका यात्रा का महत्व
वाणिज्य मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में भारतीय वार्ताकारों की टीम अगले सप्ताह वाशिंगटन का दौरा करेगी। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य व्यापार समझौते में आने वाली बाधाओं, विशेष रूप से कृषि और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों से संबंधित शुल्कों पर चर्चा करना और उन्हें सुलझाना है।
दोनों देशों की प्राथमिकताएं:
- भारत की मांगें: भारत श्रम-गहन क्षेत्रों जैसे वस्त्र, चमड़ा और जूते-चप्पल उत्पादों के लिए अमेरिकी बाजार में कम शुल्क और अधिक पहुंच चाहता है। भारत ने संवेदनशील क्षेत्रों जैसे डेयरी और कृषि को समझौते से बाहर रखने पर जोर दिया है। इसके अलावा, भारत स्टील और एल्यूमीनियम पर अमेरिकी शुल्कों के जवाब में WTO मानदंडों के तहत जवाबी शुल्क लगाने का प्रस्ताव भी संशोधित कर रहा है।
- अमेरिका की मांगें: अमेरिका भारत में अपने कृषि और डेयरी उत्पादों, विशेषकर जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) फसलों और पशु आहार के लिए अधिक बाजार पहुंच चाहता है। अमेरिका यह भी चाहता है कि भारत चुनिंदा क्षेत्रों में टैरिफ में कमी करे।
समझौते की उम्मीदें और चुनौतियां:
जानकारों का मानना है कि भारत और अमेरिका एक “मिनी ट्रेड डील” को अंतिम रूप देने के करीब हैं। राष्ट्रपति ट्रम्प ने भी कहा है कि अमेरिका भारत के साथ एक समझौते के “बेहद करीब” है। यदि यह समझौता होता है, तो यह दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव को कम करने और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।
हालांकि, ट्रम्प प्रशासन की अप्रत्याशित नीतियां और “BRICS देशों पर 10% शुल्क” जैसे बयान अनिश्चितता पैदा करते हैं। भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह केवल पारस्परिक रूप से लाभकारी समझौते पर ही हस्ताक्षर करेगा, न कि किसी समय-सीमा के दबाव में।
आगे क्या?
आने वाले सप्ताह में भारतीय वार्ताकारों की अमेरिका यात्रा निर्णायक साबित हो सकती है। यदि दोनों पक्ष लंबित मुद्दों पर सहमति बनाने में सफल होते हैं, तो जल्द ही एक प्रारंभिक व्यापार समझौते की घोषणा देखी जा सकती है। यह समझौता भारत के लिए अमेरिकी बाजार में अपने निर्यात को बढ़ाने और वैश्विक व्यापार में अपनी स्थिति मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण अवसर होगा।
यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह यात्रा व्यापारिक संबंधों में मौजूदा धुंध को साफ कर पाती है और दोनों देशों के लिए एक नए व्यापारिक युग की शुरुआत करती है।




