पीएमआर-116 दवा का परीक्षण, जो कैंसर विकास तंत्र को वाधित करने के लिए डिजाइन की गई : असाध्य कैंसर के खिलाफ शोधकर्ताओं ने शुरू किया परीक्षण

Spread the love

आस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी की टीम ने एमवाइसी प्रोटीन पर केंद्रित किया, जो 70 प्रतिशत मानव कैंसर में शामिल है :-

शोधकर्ताओं ने एक महत्वपूर्ण क्लीनिकल परीक्षण की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य उन आक्रामक कैंसर से लड़ना है जिन्हें पहले असाध्य माना जाता था। यह परीक्षण आस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी (एएनयू) की एक टीम द्वारा संचालित किया जा रहा है, जो एमवाइसी प्रोटीन द्वारा संचालित कैंसर पर केंद्रित है। एमवाइसी प्रोटीन मानव कैंसर के 70 प्रतिशत मामलों में शामिल है, जैसा कि शिन्हुआ समाचार एजेंसी ने रिपोर्ट किया है।

कैंसर के घातक रोगों का होगा इलाज :

टीम ने कहा कि इस परीक्षण की सफलता वैश्विक स्तर पर आक्रामक कैंसर के उपचार के मानकों को पुनर्परिभाषित कर सकती है और अन्य जटिल बीमारियों से निपटने के लिए ढांचा प्रदान कर सकती है। यह अध्ययन एक प्रयोगात्मक दवा पीएमआर-116, का परीक्षण करेगा, जिसे प्रोस्टेट, स्तन, अंडाशय और रक्त कैंसर या एमवाइसी प्रेरित ट्यूमर वाले मरीजों में कैंसर विकास तंत्र को बाधित करने के लिए डिजाइन किया गया है। एमवाइसी प्रोटीन कोशिका वृद्धि का एक प्रमुख नियामक है और यह अक्सर कैंसर में शामिल होता है, जिससे ट्यूमर का विकास होता है।

2025 के अंत में मरीज होंगे भर्ती क्लीनिकल परीक्षण का नेतृत्व करने वाले एएनयू के प्रोफेसर मार्क पोलिजोटो ने कहा, एमवाइसी सबसे कुख्यात कैंसर कारक जीन में से एक है और एमवाइसी के अधिक अभिव्यक्ति द्वारा प्रेरित ट्यूमर अक्सर सबसे आक्रामक और उपचार में कठिन होते हैं। उन्होंने आगे कहा, एमवाइसी को लंबे समय से ‘अङ्कग्गेबल’ माना गया है, लेकिन पीएमआर-116 के प्रारंभिक परिणाम इस धारणा को बदलने में आशा दिखाते हैं।

पीएमआर-116 को लेकर किया गया परीक्षण :

एएनयू और कैनबरा की स्वास्थ्य सेवाओं द्वारा संचालित यह परीक्षण एक बास्केट दृष्टिकोण अपनाता है, जिसमें प्रतिभागियों को कैंसर के प्रकार के बजाय मालीक्यूलर बायोमार्कर्स पर पर समूहित किया जाता है। यह विधि एमवाइसी के डाउनस्ट्रीम प्रभावों को लक्षित कर अनुसंधान को सरल बनाती है। यह उन प्रक्रियाओं को अवरुद्ध करती है जो एमवाइसी कोशिका को सक्रिय करती है। पीएमआर-116, जिसे एएनयू के शोधकर्ताओं व बायोटेक फर्म पिमेरा थेराप्यूटिक्स ने विकसित किया, राइबोसोमल बायोजेनेसिस को अवरुद्ध करता है, जो एक कोशीय प्रक्रिया है जिसका लाभ ट्यूमर उमें ठाते हैं।

इसे लेकर 2025 के अंत में आस्ट्रेलिया के प्रमुख अस्पतालों में मरीजों की भर्ती शुरू होगी :

शोध टीम ने बताया कि यह परीक्षण 2025 के अंत में कैनबरा, मेलबर्न और सिडनी के प्रमुख अस्पतालों में मरीजों की भर्ती शुरू करेगा। यह प्राथमिकता में उन मरीजों को दी जाएगी, जिनके कैंसर के मानक उपचारों का प्रतिरोध करते हैं। पीएमआर-116 के सह-विकासकर्ता और एएनयूके प्रोफेसर रास हैनन ने इस दृष्टिकोण को सटीक आंकोलाजी में एक नई दिशा के रूप में उजागर किया, जो कैंसर के मालिक्यूलर ड्राइवर पर ध्यान केंद्रित करता है, इसके स्थान के बजाय, जो दुनिया भर में कई मरीजों के लिए उपचार को तेज कर सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »