श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपतराय ने कहा-परकोटे और शेषावतार मंदिर का ही चल रहा है कार्य : अक्टूबर तक जन्मभूमि परिसर का कार्य पूर्ण हो जाएगा:-
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपतराय ने कहा-परकोटे और शेषावतार मंदिर का ही चल रहा है कार्य : अक्टूबर तक जन्मभूमि परिसर का कार्य पूर्ण हो जाएगा:-
अक्टूबर तक श्रीराम जन्मभूमि परिसर का कार्य पूर्ण हो जाएगा :-
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपतराय ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि परिसर का समस्त कार्य इसी वर्ष अक्टूबर तक पूर्ण हो जाएगा। तब्ब तक परिसर में परकोटा का निर्माण पूरा हो जाएगा। साथ ही इसके मध्य निर्मित पूरक मंदिरों तक आने-जाने का संपर्क मार्ग भी बन जाएगा।
चंपतराय ने शुक्रवार दोपहर पत्रकारों से बातचीत में कहा, परिसर में यहां-वहां बिखरे पड़े पत्थरों को यथास्थान सुरक्षित स्खवा दिया जाएगा। अक्टूबर तक श्रीराम मंदिर के द्वितीय तल का भी अवशेष कार्य पूरा हो जाएगा। शेषावतार मंदिर का शिखर भी बन जाने की संभावना है।
श्रीराम मंदिर ट्रस्ट ने पत्रकारों को कराए रामलला व राम दरबार के दर्शन :
इससे पूर्व ट्रस्ट की ओर से डेढ़ सौ पत्रकारों को आमंत्रित कर रामलला व राम दरबार के दर्शन कराए गए। चंपतराय के नेतृत्व में पत्रकारों ने पहले राम मंदिर के भूतल पर विराजमान रामलला के दर्शन किए, इसके बाद प्रथम तल पर पहुंच कर बारी-बारी से राम दरबार के।
इस दौरान साथ में रहे चंपतराय, ट्रस्ट के सदस्य डा. अनिल कुमार मिश्र, श्रीराम मंदिर के व्यवस्थापक गोपाल राव व आरजेबी के प्रोजेक्ट मैनेजर जगदीश आफले ने पत्रकारों की जिज्ञासाओं को शांत किया।
पत्रकारों से वार्ता करते श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपतराय ने कहा-परकोटे और शेषावतार मंदिर का ही चल रहा है कार्य :
दर्शनोपरांत परिसर में ही पत्रकारों से बात करते हुए चंपतराय ने कहा, वर्तमान में रामजन्मभूमि परिसर में मुख्य रूप से परकोटे व शेषावतार मंदिर का ही कार्य चल रहा है। परकोटे में एक लाख, 20 हजार घनफीट पत्थर लगने शेष हैं। इसमें कुल लगभग साढ़े आठ लाख घनफीट पत्थर लगाए जाने थे। टावर क्रेन की आवाजाही के कारण परकोटे का पूर्व व पश्चिम में 10-15 फीट हिस्सा नहीं बन पाया है।
अब टावर क्रेन का कार्य समाप्त हो गया है, इसलिए अवशेष परकोटे का निर्माण शीघ्र कराने का निर्देश कार्यदायी संस्था लार्सन एंड टुब्रो को दिया गया है। शेषावतार मंदिर में भी लगभग चार हजार घनफीट पत्थर लगना बाकी है। 16 हजार घनफीट में से 12 हजार घनफीट पत्थर लगाया जा चुका है। वर्तमान में इसके शिखर का निर्माण चल रहा है। इसके बाद कलश स्थापना के साथ धर्मध्वज दंड स्थापित कराया जाएगा। अक्टूबर के बाद ही परकोटे के मंदिरों में दर्शन सुलभहो पाने की संभावना है।