यूनेस्को (UNESCO) के 20वें सत्र की मेजबानी कर रहा भारत — लाल किले से शुरू हुआ सांस्कृतिक धरोहर का वैश्विक उत्सव
भारत के लिए आज का दिन अत्यंत गर्व का अवसर है। नई दिल्ली में यूनेस्को की इंटरगवर्नमेंटल कमेटी फॉर द सेफगार्डिंग ऑफ द इनटेंजिबल कल्चरल हेरिटेज (ICH) के 20वें सत्र की शुरुआत हो रही है। यह आयोजन भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक समुदाय के सामने प्रस्तुत करने का एक अभूतपूर्व मंच है। उद्घाटन समारोह का आयोजन विश्व–प्रसिद्ध लाल किले (Red Fort) में किया गया, जिसने इस आयोजन को और अधिक ऐतिहासिक बना दिया।
यह कार्यक्रम केवल सांस्कृतिक महत्व तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत के बढ़ते वैश्विक प्रभाव, नेतृत्व क्षमता और सांस्कृतिक कूटनीति को भी दर्शाता है।
🔶 यूनेस्को ICH कमेटी क्या है और इसका महत्व क्या है?
UNESCO की Intangible Cultural Heritage (ICH) कमेटी विश्वभर की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर (जैसे पारंपरिक कला, शिल्प, नृत्य, संगीत, त्योहार, ज्ञान–परंपराएँ) के संरक्षण और प्रोत्साहन के लिए काम करती है।
यह कमेटी हर वर्ष बैठक करती है, जहाँ—
- विभिन्न देशों की सांस्कृतिक विरासतों को सूचीबद्ध करने,
- संरक्षण योजनाओं पर निर्णय लेने,
- वैश्विक साझेदारी विकसित करने
जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होती है।
भारत इस क्षेत्र में दुनिया के सबसे धनी देशों में से एक है और ICH सूची में भारत के कई कलात्मक एवं सांस्कृतिक तत्व पहले से शामिल हैं।
🔶 20वें सत्र की मेजबानी — भारत के लिए विशेष क्यों?
इस सत्र की मेजबानी भारत के लिए कई मायनों में महत्वपूर्ण है:
1. वैश्विक मंच पर सांस्कृतिक नेतृत्व का अवसर
भारत दुनिया की सबसे पुरानी सभ्यताओं में से एक है। ऐसे में UNESCO ICH सत्र का आयोजन भारत के सांस्कृतिक प्रभाव को मजबूत करता है।
2. विरासत संरक्षण के क्षेत्र में भारत की नीतियों को प्रदर्शित करने का अवसर
भारत ने वर्षों से सांस्कृतिक संरक्षण को बढ़ावा दिया है—चाहे योग हो, कुंभ मेला, या पारंपरिक शास्त्रीय संगीत।
3. पर्यटन और कूटनीति दोनों के लिए लाभकारी
दुनिया भर से विशेषज्ञ, प्रतिनिधि और सांस्कृतिक दूत इस सत्र में भाग ले रहे हैं, जिससे भारत की soft power और भी मजबूत होगी।
🔶 लाल किला बना सांस्कृतिक संवाद का केंद्र
सत्र की शुरुआत प्रतिष्ठित लाल किले से हुई।
लाल किले का चयन प्रतीकात्मक महत्व रखता है—
- यह भारत की स्वाधीनता का प्रतीक है,
- यह भारत के गौरव, इतिहास और विरासत को दर्शाता है,
- यह अंतरराष्ट्रीय अतिथियों के सामने भारत की सभ्यतागत गहराई की पहचान करवाता है।
उद्घाटन समारोह में पारंपरिक भारतीय संगीत, लोक नृत्य और कला प्रदर्शन का सुंदर समावेश किया गया, जिससे भारत की विविधता और सांस्कृतिक परंपरा का जीवंत परिचय मिला।
🔶 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश — ‘विकास भी, विरासत भी’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर को भारत की नीतियों से जोड़ते हुए कहा कि “भारत के लिए विकास और विरासत दोनों एक साथ चलते हैं।”
उनके बयान के मुख्य बिंदु थे:
- भारत आधुनिकता और परंपरा में संतुलन बनाकर चलता है।
- वैश्विक मंच पर सांस्कृतिक सहयोग और विरासत संरक्षण भारत की प्राथमिकता है।
- अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर केवल कला नहीं, बल्कि समाज, आध्यात्म, इतिहास और जीवनशैली का मिश्रण है।
यह संदेश दुनिया को बताता है कि भारत केवल आर्थिक विकास की ओर नहीं, बल्कि सांस्कृतिक आत्मसम्मान और संरक्षण पर भी बराबर ध्यान दे रहा है।
🔶 भारत की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत—वैश्विक मान्यता की दिशा में
UNESCO की ICH सूची में भारत के कई तत्व पहले से शामिल हैं, जैसे—
- योग
- रामलीला
- कुंभ मेला
- नवकथन कथकली
- भुत्तो डांस
- दुर्गा पूजा
- तंत्र संगीत
- वड्यार वादन
और भी कई परंपराएँ।
20वें सत्र में भारत कुछ और सांस्कृतिक तत्वों को सूची में शामिल कराने का प्रयास कर रहा है।
🔶 सत्र के दौरान होने वाली प्रमुख चर्चाएँ
यह सत्र 5 दिनों तक चलेगा, जिसमें निम्न विषयों पर विस्तृत विचार–विमर्श होगा:
- अमूर्त सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण मॉडल
- डिजिटल तकनीक का उपयोग कर विरासत के दस्तावेजीकरण
- सांस्कृतिक उद्योगों को बढ़ावा देना
- युवा पीढ़ी में परंपरागत कला के प्रति जागरूकता
- विरासत के आर्थिक रूपांतरण और रोजगार सृजन
यह चर्चा न केवल भारत बल्कि दुनिया भर के देशों को नए मार्गदर्शन देगी।
🔶 अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों का स्वागत—भारत ने दिखाया आतिथ्य और संस्कृति का संगम
इस सत्र में 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।
उद्घाटन में भारत ने ‘अतिथि देवो भव’ की भावना को सुंदर रूप से प्रस्तुत किया—
- पारंपरिक स्वागत
- संगीत और नृत्य प्रस्तुतियाँ
- हस्तशिल्प और कला प्रदर्शनी
- भारतीय खानपान का स्वाद
इससे भारत की rich cultural identity का विश्व-स्तर पर शानदार प्रदर्शन हुआ है।
🔶 आर्थिक और सामाजिक लाभ
इस आयोजन से भारत को कई सकारात्मक लाभ मिलने की संभावना है—
- सांस्कृतिक और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा
- लोक कलाकारों और शिल्पकारों के लिए नए अवसर
- सांस्कृतिक परियोजनाओं में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग
- भारत के soft power में वृद्धि
- देश की सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था को गति
🔶 निष्कर्ष — भारत की विरासत और विश्व नेतृत्व का संगम
यूनेस्को के ICH कमेटी के 20वें सत्र की मेजबानी भारत के लिए सांस्कृतिक इतिहास का गौरवपूर्ण अध्याय है।
यह सत्र यह संदेश देता है कि—
भारत आधुनिकता की दिशा में आगे बढ़ते हुए भी अपनी जड़ों से गहराई से जुड़ा हुआ है।
“विकास भी, विरासत भी” का मंत्र आज वैश्विक स्तर पर भारत की पहचान का केंद्रीय तत्व बन रहा है।
यह आयोजन केवल सम्मेलन नहीं, बल्कि भारत के सांस्कृतिक नेतृत्व का प्रतीक है—एक ऐसा नेतृत्व जो विविधता, संवेदनशीलता, संरक्षण और वैश्विक सहभागिता को साथ लेकर चलता है।








