यूनेस्को ने ‘दीपावली’ को विश्व अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर का दर्जा दिया: भारत के लिए ऐतिहासिक गौरव का क्षण

यूनेस्को ने ‘दीपावली’ को विश्व अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर का दर्जा दिया
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यूनेस्को ने ‘दीपावली’ को विश्व अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर का दर्जा दिया: भारत की सांस्कृतिक पहचान को मिला वैश्विक सम्मान

भारत की संस्कृति, परंपराएँ और त्योहार सदियों से विश्वभर में प्रशंसा का केंद्र रहे हैं। इसी गौरवशाली यात्रा में अब एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया है। यूनेस्को (UNESCO) ने भारत के सबसे प्रमुख और व्यापक रूप से मनाए जाने वाले त्योहार दीपावली (Deepavali) को अपनी “मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर” (Intangible Cultural Heritage) की सूची में शामिल किया है।

यह फैसला नई दिल्ली के लाल किला परिसर में आयोजित यूनेस्को की विशेष बैठक में आधिकारिक रूप से घोषित किया गया। यह न सिर्फ भारत के लिए गर्व का विषय है, बल्कि यह भारतीय सभ्यता की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक गहराई को दुनिया के सामने एक नए रूप में प्रस्तुत करता है।


दीपावली को यह दर्जा क्यों मिला? यूनेस्को का उद्देश्य

अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर में उन परंपराओं, त्योहारों, कलाओं, लोककथाओं और सामाजिक प्रथाओं को शामिल किया जाता है जो समुदायों की सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित करती हैं।

दीपावली को यह सम्मान निम्न कारणों के आधार पर मिला:

1. प्रकाश और आध्यात्मिकता का वैश्विक संदेश

दीपावली अंधकार पर प्रकाश, अज्ञान पर ज्ञान और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। यह सार्वभौमिक संदेश पूरी मानवता को प्रेरित करता है।

2. बहु-धार्मिक और बहु-क्षेत्रीय महत्व

भारत के हर राज्य, हर समुदाय और कई देशों में दीवाली अलग-अलग रूपों में मनाई जाती है। यह त्योहार सांस्कृतिक विविधता और एकता का अद्भुत उदाहरण है।

3. सामुदायिक सहभागिता और सामाजिक बंधन

दीपावली में पूरा समाज एक साथ जुटता है — सफाई, पूजा, सजावट, भोजन, उपहार और उत्सव। यह सामाजिक सद्भाव को मजबूत बनाता है।

4. सांस्कृतिक कला और परंपराओं का संरक्षण

दीपावली के दौरान दीये बनाना, रंगोली सजाना, लोककला, पारंपरिक व्यंजन और वस्त्र — ये सभी भारतीय सांस्कृतिक पहचान को जीवित रखते हैं।

यूनेस्को ने माना कि दीपावली एक प्राचीन परंपरा है जिसने हजारों वर्षों से मानव समुदायों में आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक समावेश को बढ़ावा दिया है।


लाल किले में घोषणा: भारत में ही लिया गया वैश्विक निर्णय

इस घोषणा को और भी खास बनाने वाली बात यह है कि यह निर्णय भारत की राजधानी नई दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किला परिसर में आयोजित सत्र के दौरान हुआ।

  • यह आयोजन इंटरगवर्नमेंटल कमेटी फॉर द सेफगार्डिंग ऑफ द इंटैन्जिबल कल्चरल हेरिटेज का 20वां सत्र था।
  • विश्व के कई देशों के प्रतिनिधि इस बैठक में मौजूद थे।
  • निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया, जिससे भारत की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक सराहना मिली।

यह पहला अवसर था जब किसी प्रमुख भारतीय त्योहार को ऐसी प्रतिष्ठित वैश्विक मान्यता मिली।


पीएम मोदी की प्रतिक्रिया: “यह भारत की सांस्कृतिक विजय”

इस उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुशी व्यक्त करते हुए कहा:

“दीपावली का वैश्विक सम्मान भारत की हजारों वर्ष पुरानी सांस्कृतिक परंपरा का सम्मान है। यह निर्णय दिखाता है कि भारतीय जीवन दर्शन और आध्यात्मिक संदेश पूरी दुनिया के लिए कितने महत्वपूर्ण हैं।”

पीएम मोदी ने यह भी कहा कि यह सम्मान भारत के करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा है, जो अपनी सांस्कृतिक विरासत को संजोकर आगे बढ़ाते हैं।


भारत में उत्साह: सोशल मीडिया से मंदिरों तक जश्न

इस घोषणा के बाद पूरे देश में उत्साह का माहौल देखा गया।

  • सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर #DiwaliHeritage, #UNESCOTrend तेजी से वायरल हुए।
  • सांस्कृतिक संस्थानों, स्कूलों और मंदिरों ने इसे गर्व के रूप में मनाया।
  • कई राज्यों की सरकारों ने भी बधाई संदेश जारी किए।

देश के सामान्य नागरिक भी इसे अपने त्योहार की वैश्विक मान्यता के रूप में देख रहे हैं।


दीपावली की वैश्विक यात्रा: भारत से दुनिया तक

दीपावली सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है।
आज यह त्योहार मनाया जाता है:

  • नेपाल
  • श्रीलंका
  • मलेशिया
  • इंडोनेशिया (बाली)
  • सिंगापुर
  • मॉरीशस
  • फिजी
  • ट्रिनिडाड
  • गुयाना
  • अमेरिका, कनाडा, यूके जैसे प्रवासी भारतीयों वाले देशों में

इसी वैश्विक पहचान के कारण इसे विश्व सांस्कृतिक धरोहर के रूप में मान्यता मिली।


यह दर्जा भारत को क्या लाभ देगा?

सांस्कृतिक पर्यटन में वृद्धि

लाखों विदेशी पर्यटक भारत में दिवाली अनुभव करने आएंगे।

भारतीय कला, हस्तशिल्प और कारीगरों को प्रोत्साहन

दीयों, सजावट, रंगोली, वस्त्र और मिठाइयों की परंपरा विश्वस्तर पर पहचान पाएगी।

भारत की सॉफ्ट पावर मजबूत होगी

दीपावली का सम्मान विश्व मंच पर भारत की प्रतिष्ठा बढ़ाएगा।

सांस्कृतिक संरक्षण को बढ़ावा

सरकार और सांस्कृतिक संस्थाओं द्वारा दीपावली से जुड़ी परंपराओं के संरक्षण को नई गति मिलेगी।


यूनेस्को की सूची में शामिल अन्य भारतीय धरोहरें

दीपावली से पहले भारत की 14 से अधिक सांस्कृतिक धरोहरें यूनेस्को की सूची में शामिल थीं, जैसे:

  • योग
  • कुंभ मेला
  • रामलीला
  • छऊ नृत्य
  • कालबेलिया लोकनृत्य
  • दुर्गा पूजा

दीपावली का जुड़ना इस सूची को और प्रतिष्ठित बनाता है।


निष्कर्ष: दीपों का त्योहार अब पूरी मानवता की धरोहर

दीपावली को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर घोषित किया जाना सिर्फ भारत के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए महत्वपूर्ण है। यह दर्शाता है कि आध्यात्मिकता, शांति, सद्भाव और प्रकाश का संदेश सीमाओं से परे है।

भारत की सांस्कृतिक शक्ति, इसकी परंपराएँ, समाज और इतिहास — सभी विश्व द्वारा मान्यता प्राप्त कर चुके हैं। दीपावली अब सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि मानवता का साझा उत्सव बन चुकी है।

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