भारत ने आज सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में ‘रन फॉर यूनिटी’ कार्यक्रम में हिस्सा लिया और देशवासियों को एकता की शपथ दिलाई। जानिए सरदार पटेल के जीवन, उनके योगदान और इस दिवस के महत्व के बारे में विस्तार से।
भूमिका: एकता के प्रतीक सरदार पटेल
भारत आज अपने लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती मना रहा है। हर साल 31 अक्टूबर को देश “राष्ट्रीय एकता दिवस (National Unity Day)” के रूप में इस महान नेता को श्रद्धांजलि देता है।
सरदार पटेल केवल एक स्वतंत्रता सेनानी ही नहीं थे, बल्कि वे आधुनिक भारत के निर्माता भी थे जिन्होंने देश की रियासतों को एकसूत्र में बांधकर भारत की अखंडता सुनिश्चित की।
प्रधानमंत्री मोदी ने दिलाई ‘एकता की शपथ’
दिल्ली में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरदार पटेल की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की और देशवासियों को ‘एकता की शपथ’ (Pledge for Unity) दिलाई।
उन्होंने कहा —
“सरदार पटेल ने हमें सिखाया कि जब देश के लोग एक दिशा में चलें, तो कोई भी ताकत हमारी एकता को तोड़ नहीं सकती।”
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने “रन फॉर यूनिटी (Run for Unity)” को हरी झंडी दिखाई, जिसमें हजारों युवाओं, पुलिस कर्मियों, एनसीसी कैडेट्स और नागरिकों ने हिस्सा लिया।
राष्ट्रीय एकता दिवस का महत्व
राष्ट्रीय एकता दिवस केवल एक स्मृति दिवस नहीं, बल्कि यह देश की अखंडता, समरसता और सामूहिक शक्ति का प्रतीक है।
2014 में इस दिवस को औपचारिक रूप से शुरू किया गया था ताकि सरदार पटेल के विचारों को पीढ़ी दर पीढ़ी पहुंचाया जा सके।
इस दिन देशभर में —
- रन फॉर यूनिटी का आयोजन किया जाता है
- ‘एकता की शपथ’ ली जाती है
- स्कूलों, कॉलेजों और सरकारी संस्थानों में विशेष कार्यक्रम आयोजित होते हैं
- सरदार पटेल के जीवन और कार्यों पर सेमिनार और प्रदर्शनियाँ आयोजित की जाती हैं
सरदार पटेल का जीवन परिचय
सरदार वल्लभभाई पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को गुजरात के नडियाड में हुआ था। वे एक साधारण किसान परिवार से थे, लेकिन उनके दृढ़ निश्चय और अदम्य साहस ने उन्हें भारत के लौह पुरुष (Iron Man of India) का दर्जा दिलाया।
उन्होंने इंग्लैंड में कानून की पढ़ाई की और भारत लौटकर स्वतंत्रता संग्राम में शामिल हो गए। महात्मा गांधी के सहयोगी के रूप में उन्होंने खेड़ा, बारडोली और नागपुर जैसे आंदोलनों का सफल नेतृत्व किया।
भारत के एकीकरण में योगदान
भारत की आज़ादी के बाद सबसे बड़ी चुनौती थी — देश की 562 रियासतों का एकीकरण।
सरदार पटेल ने अपनी राजनयिक कुशलता और दृढ़ संकल्प से अधिकांश रियासतों को भारत में विलय कराया।
उनकी रणनीति, दूरदर्शिता और नेतृत्व के कारण ही आज भारत एक एकीकृत राष्ट्र के रूप में खड़ा है।
हैदराबाद, जूनागढ़ और कश्मीर जैसी जटिल रियासतों को भारत का हिस्सा बनाना उनके राजनीतिक कौशल की मिसाल है।
स्टैच्यू ऑफ यूनिटी: उनकी विरासत का प्रतीक
गुजरात के नर्मदा जिले में स्थित “स्टैच्यू ऑफ यूनिटी”, सरदार पटेल को समर्पित विश्व की सबसे ऊँची प्रतिमा है।
- ऊँचाई: 182 मीटर
- उद्घाटन: 31 अक्टूबर 2018
- निर्मित: सरदार सरोवर डैम के पास
यह प्रतिमा न केवल उनकी विरासत का प्रतीक है बल्कि ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ के विचार को साकार रूप में प्रस्तुत करती है।
आज का भारत और पटेल की प्रेरणा
सरदार पटेल का मानना था कि “देश की ताकत उसकी एकता में है।”
आज भी उनका यह संदेश उतना ही प्रासंगिक है जितना स्वतंत्रता के समय था।
भारत की विविधता में एकता ही हमारी पहचान है, और यह भावना हर नागरिक में जीवित रहनी चाहिए।
शिक्षा संस्थानों में आयोजन
देश के विभिन्न स्कूलों और कॉलेजों में छात्रों ने सरदार पटेल की जयंती पर रैलियां, भाषण प्रतियोगिताएं, पोस्टर मेकिंग और क्विज का आयोजन किया।
शिक्षकों ने विद्यार्थियों को उनके जीवन से प्रेरणा लेकर देश की एकता और अखंडता की रक्षा का संकल्प दिलाया।
निष्कर्ष: एक भारत, श्रेष्ठ भारत
सरदार पटेल की जयंती हमें यह याद दिलाती है कि जब देश एकजुट होता है, तो कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती।
उनकी दूरदर्शिता, त्याग और नेतृत्व ने भारत को वह रूप दिया जिसे हम आज गर्व से देखते हैं।
राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर हमें उनके आदर्शों को अपने जीवन में उतारने और देश की प्रगति में योगदान देने का संकल्प लेना चाहिए।
“एकता ही भारत की सबसे बड़ी शक्ति है — और यही सरदार पटेल की सबसे बड़ी सीख है।”





