



पीएम मोदी ने ‘वीर बाल दिवस’ पर दी श्रद्धांजलि, साहिबजादों की वीरता को किया नमन
आज देशभर में ‘वीर बाल दिवस’ श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया जा रहा है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित विशेष कार्यक्रम में भाग लिया। यह दिवस सिख धर्म के दसवें गुरु गुरु गोबिंद सिंह जी के साहिबजादों—बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह—की अद्वितीय शहादत और वीरता की स्मृति में मनाया जाता है।
वीर बाल दिवस का ऐतिहासिक महत्व
वीर बाल दिवस उन बाल वीरों के बलिदान को स्मरण करने का दिन है जिन्होंने अल्पायु में भी धर्म, न्याय और सत्य के लिए सर्वोच्च त्याग किया। गुरु गोबिंद सिंह जी के साहिबजादों ने मुगल शासक के अत्याचारों के सामने झुकने से इनकार करते हुए अदम्य साहस का परिचय दिया। उनकी शहादत भारतीय इतिहास में धैर्य, दृढ़ता और नैतिक साहस की अमिट मिसाल है।
भारत मंडपम में भव्य आयोजन
नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित कार्यक्रम में देशभर से छात्र, शिक्षक, बाल पुरस्कार विजेता और गणमान्य अतिथि शामिल हुए। मंच से प्रधानमंत्री ने साहिबजादों की वीरता को याद करते हुए कहा कि उनका बलिदान आने वाली पीढ़ियों को कर्तव्य, साहस और देशभक्ति की प्रेरणा देता रहेगा। कार्यक्रम के दौरान सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से सिख इतिहास और साहिबजादों के जीवन प्रसंगों को जीवंत किया गया।
प्रधानमंत्री का संबोधन: मूल्यों पर जोर
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वीर बाल दिवस केवल अतीत को स्मरण करने का अवसर नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य को दिशा देने का संकल्प है। उन्होंने युवाओं से सत्य, साहस और सेवा के मार्ग पर चलने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि बच्चों में नेतृत्व, नवाचार और नैतिक मूल्यों का विकास राष्ट्र निर्माण की नींव है।
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार विजेताओं से संवाद
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार विजेताओं के साथ संवाद किया। विज्ञान, सामाजिक सेवा, खेल, कला और नवाचार जैसे क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बच्चों ने अपने अनुभव साझा किए। प्रधानमंत्री ने बच्चों की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि ये युवा प्रतिभाएं नए भारत की ताकत हैं।
साहिबजादों की शहादत: प्रेरणा का स्रोत

इतिहासकारों के अनुसार, साहिबजादों की शहादत केवल सिख समुदाय के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने अत्याचार के सामने अडिग रहकर यह संदेश दिया कि धर्म और मानवता की रक्षा सर्वोपरि है। यही कारण है कि वीर बाल दिवस को राष्ट्रीय स्तर पर मनाकर बच्चों में चरित्र-निर्माण और नैतिक शिक्षा को प्रोत्साहन दिया जा रहा है।
सरकार की पहल और उद्देश्य
सरकार का उद्देश्य वीर बाल दिवस के माध्यम से बच्चों और युवाओं को देश के महान इतिहास से जोड़ना है। स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों में विशेष कार्यक्रम, वाद-विवाद, निबंध और सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन कर देशभक्ति और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को सशक्त किया जा रहा है।
सामाजिक और शैक्षणिक प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे राष्ट्रीय दिवस बच्चों में आत्मविश्वास, संवेदनशीलता और नेतृत्व क्षमता विकसित करने में सहायक होते हैं। साहिबजादों की कहानी बच्चों को यह सिखाती है कि उम्र छोटी हो सकती है, लेकिन साहस और संकल्प असीम होते हैं।
देशभर में आयोजन और श्रद्धांजलि
वीर बाल दिवस के अवसर पर देश के विभिन्न राज्यों में गुरुद्वारों, स्कूलों और सार्वजनिक स्थलों पर श्रद्धांजलि सभाएं आयोजित की गईं। कई स्थानों पर प्रभात फेरियां, कीर्तन और शैक्षिक कार्यक्रमों के जरिए साहिबजादों की वीरता को याद किया गया।
वीर बाल दिवस भारत के इतिहास में बाल वीरता और नैतिक साहस का प्रतीक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भारत मंडपम में दी गई श्रद्धांजलि और बच्चों से संवाद ने इस दिवस के संदेश को और सशक्त किया है। साहिबजादों का बलिदान आज भी देश के बच्चों और युवाओं को सत्य, साहस और सेवा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।








