नई दिल्ली: सार्वजनिक क्षेत्र की दूरसंचार कंपनी महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड (MTNL) गंभीर वित्तीय संकट में घिर गई है। कंपनी ने सार्वजनिक क्षेत्र के 7 प्रमुख बैंकों का लगभग ₹8,585 करोड़ का कर्ज (मूलधन और ब्याज दोनों मिलाकर) नहीं चुकाया है। इस चौंकाने वाली खबर के सामने आते ही बुधवार को MTNL के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों में हड़कंप मच गया।
कर्ज का पहाड़ और बैंक जिनसे है बकाया
MTNL, जो कभी भारत की दूरसंचार सेवाओं का एक प्रमुख हिस्सा थी, अब वित्तीय चुनौतियों से जूझ रही है। कंपनी पर बैंकों का कुल बकाया ₹8,585 करोड़ से अधिक है। जिन बैंकों का यह पैसा MTNL पर बकाया है, उनमें शामिल हैं:
- यूनियन बैंक ऑफ इंडिया
- बैंक ऑफ इंडिया
- पंजाब नेशनल बैंक
- स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI)
- यूको बैंक
- पंजाब एंड सिंध बैंक
- इंडियन ओवरसीज बैंक
यह बकाया राशि इन बैंकों के लिए भी एक चिंता का विषय है, खासकर जब गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (NPA) को कम करने के प्रयासों पर जोर दिया जा रहा है।
₹34,484 करोड़ का कुल वित्तीय ऋण: एक बड़ी चुनौती
आंकड़ों के मुताबिक, 30 जून 2025 तक MTNL का कुल वित्तीय ऋण ₹34,484 करोड़ है। ₹8,585 करोड़ का यह डिफ़ॉल्ट इस बड़े ऋण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। कंपनी कई वर्षों से लगातार घाटे में चल रही है और राजस्व सृजन में कमी के कारण अपने परिचालन खर्चों और ऋण दायित्वों को पूरा करने में कठिनाइयों का सामना कर रही है।
कंपनी की यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है जब सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSU) के प्रदर्शन में सुधार पर जोर दे रही है। MTNL और BSNL जैसी दूरसंचार कंपनियों को पुनर्जीवित करने के लिए सरकार ने अतीत में कई पैकेज और योजनाएं घोषित की हैं, जिनमें वॉलंटरी रिटायरमेंट स्कीम (VRS) और 4G स्पेक्ट्रम का आवंटन शामिल है। हालांकि, मौजूदा वित्तीय आंकड़े दर्शाते हैं कि ये प्रयास अभी तक पूरी तरह सफल नहीं हो पाए हैं।
निवेशकों पर असर और आगे की राह
इस खबर के बाद MTNL के शेयरों में आई तेज गिरावट निवेशकों के बढ़ते अविश्वास को दर्शाती है। कंपनी के भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। सरकार और दूरसंचार मंत्रालय को अब इस स्थिति से निपटने के लिए तत्काल कदम उठाने होंगे। इसमें कंपनी के लिए एक ठोस पुनरुद्धार योजना, ऋण पुनर्गठन या रणनीतिक निवेश जैसे विकल्प शामिल हो सकते हैं।
यह घटना सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के सामने आने वाली चुनौतियों और प्रभावी प्रबंधन व समय पर नीतिगत हस्तक्षेप की आवश्यकता को भी रेखांकित करती है ताकि वे वित्तीय रूप से व्यवहार्य बनी रहें और देश की अर्थव्यवस्था में योगदान दे सकें। MTNL का भविष्य अब सरकार के अगले कदम और कंपनी की अपनी वित्तीय स्थिति को सुधारने की क्षमता पर निर्भर करेगा।




