भारत और मंगोलिया के रिश्तों में नई ऊर्जा: राष्ट्रपति खुरेलसुख उखना की चार दिवसीय भारत यात्रा से बढ़ेगी साझेदारी

भारत और मंगोलिया के रिश्तों में नई ऊर्जा: राष्ट्रपति खुरेलसुख उखना की चार दिवसीय भारत यात्रा से बढ़ेगी साझेदारी
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भारत में मंगोलिया के राष्ट्रपति खुरेलसुख उखना का स्वागत

भारत और मंगोलिया के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रिश्तों में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है।
मंगोलिया के राष्ट्रपति खुरेलसुख उखना (Ukhnaa Khurelsukh) आज यानी 13 अक्टूबर 2025 को चार दिवसीय राजकीय दौरे पर भारत पहुंचे।
यह उनका पहला आधिकारिक भारत दौरा है, जिसे दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई देने वाला माना जा रहा है।

राष्ट्रपति खुरेलसुख का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भारत और मंगोलिया दोनों एशियाई क्षेत्र में अपने रणनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत कर रहे हैं।


नई दिल्ली में भव्य स्वागत

दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति खुरेलसुख का औपचारिक स्वागत किया जाएगा।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनसे मुलाकात करेंगे।
इस दौरान गार्ड ऑफ ऑनर, राष्ट्रीय गान, और द्विपक्षीय वार्ता का कार्यक्रम तय किया गया है।

प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति खुरेलसुख के बीच होने वाली वार्ता में व्यापार, ऊर्जा, खनन, रक्षा सहयोग, और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।


भारत-मंगोलिया संबंधों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत और मंगोलिया के बीच संबंध दो हजार साल से भी अधिक पुराने हैं।
दोनों देशों के रिश्ते बौद्ध धर्म की साझा विरासत पर आधारित हैं।
1955 में जब भारत ने मंगोलिया के साथ राजनयिक संबंध स्थापित किए, तब से दोनों देशों के बीच गहरा राजनीतिक और सांस्कृतिक सहयोग बना हुआ है।

भारत उन पहले देशों में से एक था जिसने मंगोलिया की स्वतंत्रता को मान्यता दी।
दोनों देशों के बीच “Strategic Partnership” का दर्जा 2015 में प्रधानमंत्री मोदी की मंगोलिया यात्रा के दौरान दिया गया था।


दौरे के मुख्य उद्देश्य

राष्ट्रपति खुरेलसुख की भारत यात्रा के तीन प्रमुख उद्देश्य बताए जा रहे हैं —

  1. व्यापारिक संबंधों का विस्तार:
    भारत और मंगोलिया के बीच वर्तमान में वार्षिक व्यापार लगभग 50 मिलियन डॉलर का है।
    इस दौरे के दौरान व्यापारिक सहयोग को 200 मिलियन डॉलर तक बढ़ाने की दिशा में नए समझौते होने की उम्मीद है।
  2. ऊर्जा और खनन क्षेत्र में साझेदारी:
    मंगोलिया कोयला और दुर्लभ खनिज संसाधनों से समृद्ध देश है। भारत इन संसाधनों में निवेश करना चाहता है, जिससे ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हो सके।
  3. संस्कृतिक और धार्मिक सहयोग:
    दोनों देशों के बीच बौद्ध धरोहर स्थलों के संरक्षण और सांस्कृतिक विनिमय कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जाएगा।

बौद्ध कूटनीति: धर्म और संस्कृति का पुल

भारत और मंगोलिया दोनों ही बौद्ध सभ्यता के केंद्र हैं।
खुरेलसुख उखना अपनी यात्रा के दौरान बोधगया और सारनाथ जैसे बौद्ध तीर्थ स्थलों का दौरा भी करेंगे।
मंगोलिया के बौद्ध समुदाय का भारत के प्रति गहरा सम्मान है क्योंकि बौद्ध धर्म का प्रसार भारत से ही वहां हुआ था।

प्रधानमंत्री मोदी ने भी कई बार कहा है किIndia and Mongolia are spiritual brothers connected by Buddhism”।
इस दौरे में दोनों देशों के बीच Buddhist Heritage Trail विकसित करने पर समझौता होने की संभावना है।


रक्षा और रणनीतिक सहयोग

भारत और मंगोलिया के बीच रक्षा सहयोग 2001 में शुरू हुआ था।
दोनों देश संयुक्त सैन्य अभ्यास “Nomadic Elephant” में हर साल भाग लेते हैं।
इस बार की मुलाकात में दोनों देशों के रक्षा मंत्रालय साइबर सुरक्षा, शांतिरक्षा मिशन, और सैन्य प्रशिक्षण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा करेंगे।

भारत एशिया में चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने के लिए मंगोलिया को एक “साझेदार राष्ट्र” के रूप में देखता है।
मंगोलिया, जो रूस और चीन के बीच स्थित है, भारत के लिए एक रणनीतिक मित्र के रूप में उभर रहा है।


ऊर्जा सहयोग: भारत की नई प्राथमिकता

मंगोलिया को “Land of Blue Sky” कहा जाता है, और यह कोयला, यूरेनियम और तांबा जैसे खनिजों का भंडार है।
भारत मंगोलिया में तेल रिफाइनरी प्रोजेक्ट और ग्रीन एनर्जी इनिशिएटिव्स में निवेश कर रहा है।
खुरेलसुख उखना के इस दौरे में दोनों देशों के बीच Renewable Energy Partnership को औपचारिक रूप से शुरू किया जा सकता है।

भारत के ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, यह साझेदारी आने वाले दशक में स्वच्छ ऊर्जा और हाइड्रोजन प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा देगी।


शिक्षा और तकनीकी सहयोग

भारत मंगोलिया के छात्रों को ICCR स्कॉलरशिप के तहत शिक्षा के अवसर प्रदान करता है।
वर्तमान में करीब 500 मंगोलियाई छात्र भारत के विश्वविद्यालयों में पढ़ रहे हैं।
दोनों देशों के बीच Digital India Cooperation Agreement और IT Training MoU भी इस यात्रा के दौरान साइन होने की संभावना है।


भारत-मंगोलिया व्यापार की नई दिशा

दोनों देशों के बीच व्यापार अभी सीमित है, लेकिन संभावनाएं बहुत बड़ी हैं।
भारत मुख्य रूप से दवाइयाँ, मशीनरी, और कृषि उत्पाद मंगोलिया को निर्यात करता है, जबकि कोयला और पशु उत्पाद मंगोलिया से आयात करता है।

नई दिल्ली में आयोजित India-Mongolia Business Forum में दोनों देशों के उद्योगपति निवेश और संयुक्त उपक्रमों पर चर्चा करेंगे।
सरकारों का लक्ष्य है कि 2030 तक India-Mongolia Bilateral Trade Volume को 1 बिलियन डॉलर तक पहुँचाया जाए।


कूटनीतिक संदेश और क्षेत्रीय महत्व

खुरेलसुख उखना की भारत यात्रा एशिया के कूटनीतिक समीकरणों में भी अहम मानी जा रही है।
यह दौरा चीन और रूस दोनों देशों के बीच स्थित मंगोलिया की “Third Neighbor Policy” का हिस्सा है, जिसमें भारत जैसे लोकतांत्रिक देशों के साथ सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया जाता है।

भारत इस नीति को समर्थन देता है और मंगोलिया को “Trusted Strategic Partner” के रूप में देखता है।


राष्ट्रपति खुरेलसुख उखना की यह चार दिवसीय भारत यात्रा भारत-मंगोलिया संबंधों के लिए नई शुरुआत साबित हो सकती है।
बौद्ध संस्कृति, व्यापारिक सहयोग, ऊर्जा साझेदारी और रक्षा संबंध — इन सभी क्षेत्रों में सहयोग के नए द्वार खुलेंगे।

यह यात्रा दोनों देशों के बीच आस्था, विश्वास और विकास के नए अध्याय की नींव रखेगी।
भारत और मंगोलिया के संबंध न केवल एशिया की स्थिरता में योगदान देंगे, बल्कि यह दिखाएँगे कि सांस्कृतिक जुड़ाव से भी मजबूत कूटनीति संभव है।

 

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