IMF की चेतावनी: वैश्विक व्यापार पर मंडरा रहा टैरिफ और आर्थिक अस्थिरता का खतरा
वाशिंगटन, 18 अक्टूबर 2025:
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने एक बार फिर दुनिया को चेताया है कि बढ़ते टैरिफ और व्यापारिक तनाव वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा बन रहे हैं।
IMF की ताज़ा ‘वैश्विक वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (Global Financial Stability Report)’ में कहा गया है कि अगर देश अपनी संरक्षणवादी नीतियों पर अड़े रहे, तो आने वाले वर्षों में विश्व व्यापार और निवेश प्रवाह में भारी गिरावट देखी जा सकती है।
IMF का विश्लेषण — बढ़ते टैरिफ से घटेगा विकास
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका, चीन और यूरोपीय देशों द्वारा एक-दूसरे के उत्पादों पर लगाए जा रहे आयात शुल्क (tariffs) का असर अब पूरी वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर दिखने लगा है।
IMF का अनुमान है कि यदि टैरिफ बढ़ाने की यह प्रवृत्ति जारी रही, तो अगले दो वर्षों में वैश्विक GDP विकास दर में 0.8% तक की गिरावट आ सकती है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि
“दुनिया भर के निवेशक और नीति निर्माता वर्तमान स्थिति को कम आंक रहे हैं। यदि व्यापार युद्ध और राजनीतिक तनाव और गहराए, तो यह मंदी का रूप ले सकता है।”
व्यापारिक तनाव और भू-राजनीतिक जोखिम
IMF ने विशेष रूप से अमेरिका-चीन व्यापार विवाद, रूस-यूक्रेन संघर्ष, और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव को वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के मुख्य कारणों में गिना है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि ऊर्जा और खाद्य कीमतों में अस्थिरता से न केवल गरीब देशों पर बोझ बढ़ा है, बल्कि निवेश और उपभोक्ता मांग में गिरावट भी देखने को मिली है।
इसके अलावा, कई देशों में राजकोषीय घाटा और कर्ज का स्तर ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंच चुका है, जिससे सरकारों की नीतिगत क्षमता कमजोर हो रही है।
IMF की सिफारिशें:
IMF ने देशों से अपील की है कि वे
- टैरिफ और व्यापारिक प्रतिबंधों में कमी करें,
- वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की स्थिरता सुनिश्चित करें,
- और केंद्रीय बैंकों को मौद्रिक नीति में संतुलन बनाए रखने की सलाह दी है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि विकासशील देशों को निवेश आकर्षित करने के लिए पारदर्शी नीतियां अपनानी चाहिए, ताकि वैश्विक पूंजी प्रवाह बना रहे।
वित्तीय बाजार में बढ़ता जोखिम
IMF ने अपनी रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि वित्तीय बाजारों में “आत्मसंतुष्टि (complacency)” बढ़ रही है।
निवेशक यह मानकर चल रहे हैं कि ब्याज दरें जल्द ही स्थिर होंगी और महंगाई पर काबू पा लिया जाएगा, जबकि वास्तविकता इसके उलट हो सकती है।
“वित्तीय प्रणाली में बढ़ती तरलता, जोखिम भरे निवेश और अति-मूल्यांकित शेयर बाजार संकेत दे रहे हैं कि एक नया संकट उत्पन्न हो सकता है,” — IMF रिपोर्ट।
संस्था ने कहा कि यदि ब्याज दरों में तेजी से बदलाव हुआ, तो कर्जग्रस्त देशों और कंपनियों के लिए यह “वित्तीय झटका” साबित हो सकता है।
वैश्विक व्यापार का गिरता ग्राफ
विश्व व्यापार संगठन (WTO) के आंकड़ों के अनुसार, 2024 में वैश्विक व्यापार वृद्धि दर मात्र 1.7% रही — जो महामारी के बाद सबसे कम है।
IMF का कहना है कि यदि मौजूदा नीतिगत अस्थिरता बनी रही, तो यह दर 2026 तक 1% से भी नीचे जा सकती है।
अमेरिका, यूरोप और एशिया के बीच सप्लाई चेन डाइवर्सिफिकेशन की प्रक्रिया तेज हुई है, लेकिन इससे लागत बढ़ी है और उत्पादकता घटी है।
टेक्नोलॉजी और व्यापार विभाजन का खतरा
IMF ने रिपोर्ट में एक और अहम मुद्दे पर ध्यान दिलाया है — तकनीकी “डिकप्लिंग” (decoupling) का।
दुनिया की बड़ी शक्तियां अब तकनीकी क्षेत्र (जैसे सेमीकंडक्टर, AI, और साइबर सुरक्षा) में एक-दूसरे से अलग नीतियां बना रही हैं।
इससे वैश्विक नवाचार की गति धीमी हो सकती है और डिजिटल व्यापार में बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं।
रिपोर्ट के अनुसार,
“यदि टेक्नोलॉजी सेक्टर में विभाजन बढ़ता गया, तो वैश्विक उत्पादन क्षमता और निवेश का प्रवाह दोनों प्रभावित होंगे।”
भारत और अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं की भूमिका
IMF ने भारत, इंडोनेशिया और ब्राज़ील जैसे देशों को “स्थिरता के स्तंभ” बताया है।
भारत को विशेष रूप से मजबूत घरेलू मांग, डिजिटल अर्थव्यवस्था में तेजी और संरचनात्मक सुधारों के कारण सकारात्मक रेटिंग मिली है।
हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत जैसे देशों को टैरिफ नीति में पारदर्शिता और विदेशी निवेश आकर्षण पर और ध्यान देना होगा।
IMF की रिपोर्ट का संदेश
IMF की ‘Global Financial Stability Report’ का सार यह है कि:
- वैश्विक व्यापारिक युद्ध और टैरिफ नीति से आर्थिक मंदी का खतरा बढ़ रहा है।
- वित्तीय बाजारों की स्थिरता खतरे में है।
- देशों को संवाद और सहयोग के माध्यम से समाधान निकालना होगा।
- निवेशकों को आत्मसंतुष्टि छोड़कर सतर्क रहना चाहिए।
विश्लेषण: आगे की राह
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि IMF की चेतावनी को नज़रअंदाज़ करना बड़ी भूल होगी।
2020 के दशक की शुरुआत में हुई महामारी और यूक्रेन युद्ध ने पहले ही वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को कमजोर कर दिया था।
अब यदि टैरिफ युद्ध गहराता गया, तो अंतर्राष्ट्रीय व्यापार 1930 के दशक जैसी मंदी का सामना कर सकता है।
भारत के लिए यह अवसर और चुनौती दोनों है — अवसर इसलिए कि वह वैकल्पिक उत्पादन केंद्र बन सकता है, और चुनौती इसलिए कि उसे विनिर्माण, निर्यात और वित्तीय स्थिरता तीनों मोर्चों पर सतर्क रहना होगा।
IMF की यह चेतावनी सिर्फ एक आर्थिक रिपोर्ट नहीं, बल्कि आगामी वैश्विक संकट की घंटी है।
दुनिया के सभी प्रमुख देशों को यदि जल्द ही संरक्षणवाद छोड़कर सहयोग की राह नहीं अपनाई, तो आने वाले वर्षों में वैश्विक अर्थव्यवस्था गहरी मंदी में फंस सकती है।








