IMD का अलर्ट: तमिलनाडु के 10 जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है

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मौसम विभाग (IMD) ने तमिलनाडु के 10 जिलों में भारी बारिश की संभावना जताई है। कई इलाकों में तेज हवाओं और गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। प्रशासन ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और आवश्यक सावधानियां बरतने की सलाह दी है।

क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र द्वारा 20 जून को जारी नवीनतम मौसम बुलेटिन के अनुसार, 21 जून से मौसम के मिजाज में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है, जिससे दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगमन का मार्ग प्रशस्त होगा।

पश्चिमी घाट क्षेत्र में बने ऊपरी वायु परिसंचरण और ट्रफ के प्रभाव के कारण 21 जून 2026 से तमिलनाडु के 10 से अधिक जिलों में भारी बारिश होने की संभावना है।

भारत में मानसून की रफ्तार फिलहाल धीमी बनी हुई है और देशभर में वर्षा सामान्य से करीब 35% कम दर्ज की गई है। इसी बीच मौसम विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि “सुपर एल नीनो” की स्थिति विकसित होती है, तो इसका असर मानसून की तीव्रता और वर्षा के वितरण पर पड़ सकता है।

क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र (RMC) द्वारा शनिवार, 20 जून 2026 को जारी ताजा बुलेटिन के अनुसार, रविवार से मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है, जिससे दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने की परिस्थितियां अनुकूल होंगी।

मौसम विभाग ने तमिलनाडु के नीलगिरि, इरोड, सलेम, धर्मपुरी, कृष्णागिरि, कोयंबटूर, थेनी, डिंडीगुल और कन्याकुमारी जिलों के साथ-साथ तिरुनेलवेली जिले के घाट क्षेत्रों में कुछ स्थानों पर भारी बारिश की संभावना जताई है।

संक्षिप्त संस्करण:

मौसम विभाग के अनुसार रविवार से मौसम का मिजाज बदलने वाला है, जिससे दक्षिण-पश्चिम मानसून को गति मिल सकती है। हालांकि देश में अब भी 35% वर्षा की कमी बनी हुई है। तमिलनाडु के कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है, जबकि विशेषज्ञ सुपर एल नीनो के संभावित प्रभावों पर भी नजर बनाए हुए हैं।

निष्कर्ष:

भारत में मानसून की धीमी प्रगति और 35% वर्षा की कमी चिंता का विषय बनी हुई है। हालांकि मौसम विभाग द्वारा मौसम में बदलाव और दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने के संकेत राहत देने वाले हैं। आने वाले दिनों में तमिलनाडु समेत कई क्षेत्रों में होने वाली बारिश मानसून की स्थिति को बेहतर बना सकती है। वहीं, संभावित “सुपर एल नीनो” के प्रभाव पर लगातार निगरानी रखी जा रही है, क्योंकि यह देश में वर्षा के पैटर्न और कृषि क्षेत्र को प्रभावित कर सकता है।

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