दिवाली के बाद दिल्ली की हवा ‘ज़हरीली’: AQI 360 के पार, सांस लेना हुआ मुश्किल

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🌆 दिवाली के बाद दिल्ली में फिर लौट आया प्रदूषण का खतरा

दिवाली की चमक के बाद दिल्ली-एनसीआर की हवा एक बार फिर धुंधली और जहरीली हो गई है। पटाखों के धुएं, पराली जलाने और ठंडी हवा के कारण प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ गया है। आज सुबह अक्षरधाम, आनंद विहार, आईटीओ, नोएडा सेक्टर-62, गुरुग्राम और गाज़ियाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 360 से ऊपर दर्ज किया गया। यह स्तर “बहुत खराब” श्रेणी में आता है, जो गंभीर स्वास्थ्य प्रभाव डाल सकता है।


📉 AQI का क्या मतलब है?

वायु गुणवत्ता सूचकांक (Air Quality Index – AQI) हवा में मौजूद प्रदूषकों के स्तर को मापता है। यह 0 से 500 के बीच होता है:

  • 0-50: अच्छा
  • 51-100: संतोषजनक
  • 101-200: मध्यम
  • 201-300: खराब
  • 301-400: बहुत खराब
  • 401-500: गंभीर

वर्तमान में दिल्ली का औसत AQI 360-390 के बीच है, जो साफ तौर पर “बहुत खराब” श्रेणी में आता है।


🔥 दिवाली और प्रदूषण: क्या है मुख्य वजहें?

  1. पटाखों का धुआं:
    दिवाली के दौरान लाखों पटाखे जलाए जाते हैं, जिनसे कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड और सूक्ष्म कण (PM2.5, PM10) बड़ी मात्रा में निकलते हैं।
  2. पराली जलाना:
    हरियाणा, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पराली जलाने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। इससे धुआं हवा में मिलकर दिल्ली की ओर बहता है।
  3. मौसम की स्थिति:
    दिवाली के बाद तापमान गिरने और हवा की गति धीमी होने से प्रदूषक कण वातावरण में फंस जाते हैं, जिससे स्मॉग बनता है।
  4. वाहन उत्सर्जन:
    दिल्ली में करोड़ों वाहनों का धुआं प्रदूषण का सबसे बड़ा स्रोत है।
  5. निर्माण कार्य और सड़क धूल:
    निर्माण स्थलों से उठने वाली धूल भी वायु गुणवत्ता को बिगाड़ती है।

🏛️ सरकार और प्रशासन की तैयारी

दिल्ली सरकार और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के तहत कई नियम लागू किए हैं।

  • GRAP Stage-II लागू: निर्माण गतिविधियों पर रोक, सड़क धूल नियंत्रण, कूड़ा जलाने पर सख्त कार्रवाई।
  • स्कूल बंद करने पर विचार: यदि स्थिति और बिगड़ती है, तो स्कूलों को अस्थायी रूप से बंद किया जा सकता है।
  • पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर जोर: दिल्ली मेट्रो और DTC बसों की सेवाएं बढ़ाई जा रही हैं।
  • वॉटर स्प्रिंकलर और एंटी-स्मॉग गन: सड़कों पर धूल कम करने के लिए लगातार इस्तेमाल हो रहा है।

💬 राजनीतिक बयानबाजी तेज

दिवाली के तुरंत बाद बढ़े प्रदूषण को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी शुरू हो गए हैं।

  • आप सरकार का बयान: दिल्ली सरकार ने कहा कि “प्रदूषण का बड़ा हिस्सा बाहरी राज्यों की पराली जलाने से आता है।”
  • विपक्ष का आरोप: विपक्षी दलों ने सरकार की नीतियों को विफल बताया और कहा कि हर साल दिवाली के बाद यही स्थिति बन जाती है।
  • केंद्र बनाम राज्य विवाद: प्रदूषण नियंत्रण पर केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच समन्वय की कमी भी एक बड़ा मुद्दा बन गई है।

🩺 स्वास्थ्य पर असर

डॉक्टरों का कहना है कि लगातार बढ़ते प्रदूषण से अस्थमा, खांसी, सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन और हृदय रोग जैसे खतरे बढ़ जाते हैं।
विशेष रूप से बुजुर्गों, बच्चों और गर्भवती महिलाओं को घर से बाहर निकलने से बचने की सलाह दी जा रही है।
AIIMS और सफदरजंग अस्पताल में प्रदूषण से जुड़ी बीमारियों के मामलों में वृद्धि दर्ज की जा रही है।


🌿 क्या कर सकते हैं आम लोग?

  1. N95 या N99 मास्क पहनें
  2. सुबह-सुबह टहलने से बचें
  3. एयर प्यूरिफायर का उपयोग करें
  4. घर में पौधे लगाएं (जैसे मनी प्लांट, स्नेक प्लांट, एलोवेरा)
  5. पब्लिक ट्रांसपोर्ट या कारपूल का इस्तेमाल करें
  6. पटाखे और कूड़ा जलाने से परहेज करें

🌏 दीर्घकालिक समाधान की ज़रूरत

विशेषज्ञों का कहना है कि यह समस्या केवल दिवाली तक सीमित नहीं है।
जरूरी है कि:

  • हरियाणा और पंजाब में पराली के वैकल्पिक निपटान की तकनीक अपनाई जाए।
  • इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहन मिले।
  • हर क्षेत्र में ग्रीन बेल्ट बढ़ाई जाए।
  • औद्योगिक उत्सर्जन की निगरानी कड़ी हो।

हर साल दिवाली के बाद दिल्ली की हवा जहरीली हो जाती है, लेकिन केवल एक-दूसरे पर दोषारोपण से समाधान नहीं मिलेगा। अब जरूरत है मिलजुलकर स्थायी और सख्त कदम उठाने की — ताकि आने वाली पीढ़ियाँ धुंध नहीं, साफ नीला आसमान देख सकें।

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