आर्टेमिस-2: नासा ने रचा इतिहास, 50 साल बाद टूटा अपोलो 13 का सबसे लंबी दूरी का रिकॉर्ड
अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में आज एक नया अध्याय लिखा गया है। नासा (NASA) का आर्टेमिस-2 (Artemis-2) मिशन सफलतापूर्वक चंद्रमा के चारों ओर अपनी यात्रा पूरी कर रहा है। यह न केवल 50 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद इंसानों की चंद्रमा तक वापसी है, बल्कि इस मिशन ने वह कर दिखाया है जो अब तक के मानव इतिहास में कभी नहीं हुआ।
टूटा अपोलो 13 का ऐतिहासिक रिकॉर्ड
1970 में अपोलो 13 मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी से लगभग 400,171 किलोमीटर दूर गए थे। 6 अप्रैल 2026 को, आर्टेमिस-2 के ओरियन (Orion) कैप्सूल ने इस रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। ओरियन ने पृथ्वी से 406,771 किलोमीटर (252,756 मील) की अधिकतम दूरी तय की, जो किसी भी मानव-रेटेड अंतरिक्ष यान द्वारा तय की गई अब तक की सबसे लंबी दूरी है।
मिशन के 4 जांबाज नायक
इस ऐतिहासिक यात्रा पर चार अंतरिक्ष यात्री सवार हैं, जो विविधता और साहस का प्रतीक हैं:
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रीड वाइजमैन (कमांडर): मिशन का नेतृत्व कर रहे अनुभवी अंतरिक्ष यात्री।
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विक्टर ग्लोवर (पायलट): चंद्रमा मिशन पर जाने वाले पहले अश्वेत अंतरिक्ष यात्री।
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क्रिस्टिना कोच (मिशन स्पेशलिस्ट): चंद्रमा के करीब पहुंचने वाली पहली महिला।
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जेरेमी हैनसेन (मिशन स्पेशलिस्ट): कनाडा के पहले नागरिक जो गहरे अंतरिक्ष की यात्रा पर हैं।
क्यों खास है आर्टेमिस-2?
यह मिशन चंद्रमा पर उतरने के लिए नहीं, बल्कि आर्टेमिस-3 की नींव रखने के लिए भेजा गया है। इसके मुख्य उद्देश्य इस प्रकार हैं:
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ओरियन कैप्सूल की जांच: क्या ओरियन का लाइफ सपोर्ट सिस्टम गहरे अंतरिक्ष में इंसानों के लिए सुरक्षित है?
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फ्री-रिटर्न प्रक्षेपवक्र (Free-return Trajectory): यान ने पृथ्वी और चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण का उपयोग करके ‘फिगर-8’ (8 की आकृति) का लूप बनाया है, जिससे ईंधन की बचत होती है।
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चंद्रमा का ‘फॉर साइड’: अंतरिक्ष यात्रियों ने अपनी नंगी आँखों से चंद्रमा के उस हिस्से (Far Side) को देखा जो पृथ्वी से कभी दिखाई नहीं देता।








