अफगानिस्तान में फिर भूकंप का कहर — 6.3 तीव्रता से हिली धरती
पड़ोसी देश अफगानिस्तान एक बार फिर भूकंप के तेज झटकों से दहल गया है। भूवैज्ञानिक विभाग के अनुसार, शुक्रवार देर रात और तड़के सुबह के बीच दो बार शक्तिशाली भूकंप आया।
रिक्टर स्केल पर इन झटकों की तीव्रता 6.3 दर्ज की गई, जिससे राजधानी काबुल समेत कई इलाकों में लोग दहशत में अपने घरों से बाहर निकल आए।
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, भूकंप का केंद्र पश्चिमी अफगानिस्तान के हेरात प्रांत के पास स्थित था। इस क्षेत्र में पहले भी कई बार भूकंप के झटके महसूस किए जा चुके हैं।
5 घंटे में दो बार कांपी धरती
जानकारी के मुताबिक, पहला झटका देर रात करीब 2:30 बजे आया, जबकि दूसरा झटका सुबह लगभग 7:15 बजे महसूस किया गया।
दोनों बार झटकों की तीव्रता 6.3 मापी गई, जिससे इमारतों में दरारें पड़ गईं और कई जगह दीवारें ढह गईं।
हेरात, फराह, और बदगीस प्रांतों में सबसे ज्यादा नुकसान की आशंका जताई जा रही है। कई गांवों में दर्जनों घर पूरी तरह तबाह हो गए हैं।
सैकड़ों मौतों की आशंका, बचाव कार्य जारी
हालांकि आधिकारिक आंकड़े अभी तक नहीं आए हैं, लेकिन प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार सैकड़ों लोगों की मौत की आशंका जताई जा रही है।
कई लोग मलबे में दबे हुए हैं और राहत व बचाव अभियान जारी है।
तालिबान प्रशासन ने आपात बैठक बुलाई है और स्थानीय सुरक्षा बलों तथा रेड क्रिसेंट टीमों को राहत कार्यों में लगाया गया है।
घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया जा रहा है, जहाँ रक्त की भारी कमी बताई जा रही है।
हेरात सबसे ज्यादा प्रभावित
भूकंप का सबसे भीषण असर हेरात प्रांत में देखने को मिला है, जो हाल के वर्षों में भूकंप की चपेट में कई बार आ चुका है।
- शहर के बाहरी इलाकों में कई घर मलबे में तब्दील हो गए हैं।
- दूरस्थ गांवों में सड़क संपर्क टूट गया है।
- बिजली और मोबाइल नेटवर्क बाधित हैं।
स्थानीय निवासियों ने बताया कि झटके इतने तेज थे कि “जमीन हिलने के साथ ही दीवारें गिर पड़ीं और लोग चीखते हुए सड़कों पर निकल आए।”
अंतरराष्ट्रीय सहायता की अपील
अफगान सरकार ने संयुक्त राष्ट्र (UN), विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और पड़ोसी देशों से तत्काल सहायता की मांग की है।
UN ने कहा है कि वह स्थिति पर नजर रखे हुए है और जरूरत पड़ने पर आपात राहत टीम भेजी जाएगी।
भारत, पाकिस्तान, और ईरान ने भी इस प्राकृतिक आपदा पर दुख जताया है और मदद की पेशकश की है।
विशेषज्ञों की चेतावनी
भूवैज्ञानिकों का कहना है कि अफगानिस्तान का पश्चिमी क्षेत्र भूकंपीय रूप से अत्यंत संवेदनशील है।
यह इलाका यूरो-एशियन और इंडियन टेक्टोनिक प्लेट्स के जंक्शन पर स्थित है, जहाँ अक्सर धरती के भीतर ऊर्जा का जमाव होता है।
विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी है कि अगले कुछ दिनों तक आफ्टरशॉक्स (Aftershocks) आने की संभावना बनी हुई है, इसलिए लोगों को सतर्क रहना चाहिए।
मानवीय संकट की स्थिति
भूकंप प्रभावित इलाकों में भोजन, पानी और आश्रय की भारी कमी बताई जा रही है।
कई परिवार खुले आसमान के नीचे रात गुजारने को मजबूर हैं।
मदद पहुँचाने में कठिनाई हो रही है क्योंकि कई सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हो चुके हैं।
रेड क्रॉस की रिपोर्ट के अनुसार, घायलों की संख्या हजारों में हो सकती है, और कई जगह तापमान गिरने के कारण ठंड से मौतों का खतरा भी बढ़ गया है।
निष्कर्ष
अफगानिस्तान में आया यह 6.3 तीव्रता वाला भूकंप देश के लिए एक और मानवीय त्रासदी बनकर उभरा है।
पहले से ही आर्थिक और राजनीतिक संकट से जूझ रहे इस देश में राहत कार्य एक बड़ी चुनौती बने हुए हैं।
विश्व समुदाय से अपेक्षा की जा रही है कि वह अफगानिस्तान को तत्काल राहत और पुनर्वास सहायता प्रदान करे, ताकि हजारों प्रभावित लोगों की जिंदगी बचाई जा सके।








