पश्चिम एशिया में युद्ध तेज, सातवें दिन भी जारी संघर्ष
पश्चिम एशिया में ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ता सैन्य टकराव अब गंभीर युद्ध का रूप लेता जा रहा है। संघर्ष का सातवां दिन भी हिंसक घटनाओं और मिसाइल हमलों के साथ गुजर रहा है। हालात इतने तनावपूर्ण हो चुके हैं कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध की आशंका सताने लगी है।
ताजा घटनाक्रम में अमेरिका ने हिंद महासागर में एक ईरानी युद्धपोत को निशाना बनाकर डुबो दिया है। बताया जा रहा है कि यह हमला अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा किया गया। विशेषज्ञों के अनुसार द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यह पहली बार है जब किसी अमेरिकी पनडुब्बी ने इस तरह सीधे किसी युद्धपोत को डुबोया हो।
इस घटना के बाद ईरान ने भी कड़ा जवाब देते हुए इजराइल की राजधानी तेल अवीव पर अपनी नई ‘खैबर’ मिसाइलों से हमला किया है। इससे पूरे क्षेत्र में तनाव और भी बढ़ गया है।
हिंद महासागर में ईरानी युद्धपोत डूबा
अमेरिकी रक्षा विभाग के सूत्रों के अनुसार हिंद महासागर में तैनात एक अमेरिकी परमाणु पनडुब्बी ने ईरान के एक युद्धपोत को निशाना बनाया। बताया जा रहा है कि यह जहाज ईरानी नौसेना के महत्वपूर्ण मिशन पर था और क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों की निगरानी कर रहा था।
हमले के बाद जहाज को भारी नुकसान हुआ और कुछ ही समय में वह समुद्र में डूब गया। इस घटना को सैन्य विश्लेषक बेहद गंभीर मान रहे हैं क्योंकि इससे समुद्री क्षेत्र में भी युद्ध का दायरा बढ़ गया है।
अमेरिका ने कहा है कि यह कार्रवाई अपने सहयोगी देशों की सुरक्षा और समुद्री मार्गों की रक्षा के लिए की गई है।
ईरान का पलटवार: तेल अवीव पर ‘खैबर’ मिसाइलें
अमेरिकी कार्रवाई के कुछ ही घंटों बाद ईरान ने इजराइल पर बड़ा मिसाइल हमला किया। ईरानी सेना ने दावा किया कि उसने तेल अवीव की ओर कई ‘खैबर’ मिसाइलें दागी हैं।
‘खैबर’ मिसाइल ईरान की नई बैलिस्टिक मिसाइल मानी जाती है, जिसकी मारक क्षमता और सटीकता पहले की मिसाइलों से ज्यादा बताई जा रही है।
इजराइली रक्षा प्रणाली ने कई मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया, लेकिन कुछ मिसाइलें शहर के आसपास गिरीं जिससे कई इलाकों में अफरा-तफरी मच गई। इजराइल ने नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है।
इजराइल की जवाबी कार्रवाई
ईरान के हमले के बाद इजराइल ने भी जवाबी कार्रवाई तेज कर दी है। इजराइली वायुसेना ने ईरान समर्थित ठिकानों पर कई हवाई हमले किए हैं।
इजराइल का कहना है कि वह किसी भी कीमत पर अपने नागरिकों की सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा। इजराइली सेना ने यह भी संकेत दिया है कि अगर ईरान ने हमले जारी रखे तो और बड़े सैन्य ऑपरेशन किए जा सकते हैं।
अमेरिका की भूमिका
इस पूरे संघर्ष में अमेरिका खुलकर इजराइल के समर्थन में नजर आ रहा है। अमेरिका पहले से ही क्षेत्र में अपने युद्धपोत, विमानवाहक पोत और सैन्य ठिकानों के जरिए मजबूत उपस्थिति बनाए हुए है।
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यदि ईरान ने अपने हमले जारी रखे तो अमेरिका और कड़ी कार्रवाई कर सकता है। इससे यह आशंका और बढ़ गई है कि यह संघर्ष एक बड़े अंतरराष्ट्रीय युद्ध का रूप ले सकता है।
वैश्विक चिंता बढ़ी
इस युद्ध ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। संयुक्त राष्ट्र सहित कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह संघर्ष लंबा चला तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था, तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है।
पश्चिम एशिया पहले से ही दुनिया के लिए ऊर्जा आपूर्ति का महत्वपूर्ण केंद्र है। ऐसे में युद्ध बढ़ने से तेल की कीमतों में भारी उछाल आने की संभावना है।
आम नागरिकों पर असर
युद्ध का सबसे बड़ा असर आम नागरिकों पर पड़ रहा है। इजराइल और आसपास के क्षेत्रों में लोग लगातार बमबारी और मिसाइल हमलों के डर में जी रहे हैं।
स्कूल, बाजार और कई सार्वजनिक स्थान बंद कर दिए गए हैं। कई परिवार सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं।
मानवीय संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि युद्ध जारी रहा तो मानवीय संकट भी गहरा सकता है।
आगे क्या हो सकता है
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिन इस युद्ध की दिशा तय करेंगे। यदि दोनों पक्षों के बीच कूटनीतिक बातचीत शुरू नहीं होती तो संघर्ष और तेज हो सकता है।
कई देश मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन फिलहाल हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं।
दुनिया की नजर अब पश्चिम एशिया पर टिकी हुई है और सभी को उम्मीद है कि जल्द ही शांति की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।








