राष्ट्रपति मुर्मू ने 10 वर्षीय श्रवण सिंह को ‘प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार’ से किया सम्मानि


देश के लिए गर्व का क्षण तब आया जब द्रौपदी मुर्मू, राष्ट्रपति भारत, ने पंजाब के 10 वर्षीय बालक श्रवण सिंह को ‘प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार’ से सम्मानित किया। यह सम्मान उन्हें उनकी अदम्य साहस, सूझबूझ और मानवता से भरे कार्यों के लिए दिया गया। कम उम्र में दिखाई गई उनकी बहादुरी ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है और मीडिया से लेकर आम जनता तक उन्हें ‘नन्हा नायक’ कहकर सम्मानित किया जा रहा है।
क्या है प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार भारत सरकार द्वारा दिया जाने वाला सर्वोच्च बाल सम्मान है। यह पुरस्कार उन बच्चों को दिया जाता है जिन्होंने 18 वर्ष से कम आयु में असाधारण साहस, समाज सेवा, खेल, कला, संस्कृति, नवाचार या शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया हो। इसका उद्देश्य बच्चों की प्रतिभा और साहस को राष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाना है।
श्रवण सिंह को क्यों मिला यह सम्मान
श्रवण सिंह ने बेहद कम उम्र में साहस और समझदारी का परिचय देते हुए एक ऐसी परिस्थिति में बहादुरी दिखाई, जिसने कई लोगों की जान बचाने या गंभीर नुकसान को टालने में अहम भूमिका निभाई।
- संकट के समय घबराने के बजाय उन्होंने सूझबूझ से काम लिया
- समय पर सही निर्णय लेकर दूसरों की मदद की
- उनकी तत्परता और साहस ने समाज के लिए एक मिसाल कायम की
इन्हीं गुणों के कारण उन्हें इस प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए चुना गया।
राष्ट्रपति भवन में सम्मान समारोह
सम्मान समारोह का आयोजन राष्ट्रपति भवन में किया गया, जहाँ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने श्रवण सिंह को पुरस्कार प्रदान किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि देश का भविष्य ऐसे ही साहसी, संवेदनशील और जिम्मेदार बच्चों के हाथों में सुरक्षित है। राष्ट्रपति ने श्रवण को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए अन्य बच्चों को भी उनसे प्रेरणा लेने का संदेश दिया।
‘नन्हा नायक’ बना श्रवण सिंह
श्रवण सिंह की कहानी सामने आने के बाद सोशल मीडिया और समाचार माध्यमों में उनकी खूब चर्चा हो रही है। लोग उन्हें ‘नन्हा नायक’ कहकर सम्मानित कर रहे हैं।
- बच्चों में आत्मविश्वास और साहस का संचार
- अभिभावकों और शिक्षकों के लिए प्रेरणादायक उदाहरण
- समाज में सकारात्मक मूल्यों को बढ़ावा
परिवार और राज्य के लिए गर्व
श्रवण सिंह की इस उपलब्धि से न केवल उनका परिवार बल्कि पूरा पंजाब गौरवान्वित है। राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन ने भी उनकी सराहना की है। स्कूल, शिक्षक और सहपाठी उन्हें प्रेरणास्रोत के रूप में देख रहे हैं।
बच्चों के लिए प्रेरणा का संदेश
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार का उद्देश्य सिर्फ सम्मान देना नहीं, बल्कि बच्चों को यह संदेश देना है कि उम्र कभी भी साहस, जिम्मेदारी और नेतृत्व की राह में बाधा नहीं बनती। श्रवण सिंह की कहानी यह साबित करती है कि सही सोच और हिम्मत से कोई भी बच्चा समाज में बड़ा बदलाव ला सकता है।
10 वर्षीय श्रवण सिंह को मिला प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार देश के हर बच्चे के लिए प्रेरणा है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा दिया गया यह सम्मान न केवल श्रवण की बहादुरी का प्रतीक है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि भारत अपने बच्चों की प्रतिभा और साहस को पहचानता और सम्मान देता है। ऐसे ‘नन्हे नायक’ ही देश के उज्ज्वल भविष्य की नींव हैं।








