‘सागर से समृद्धि’: पीएम मोदी ने ‘इंडिया मैरीटाइम वीक 2025’ से दिया 10 ट्रिलियन डॉलर ‘ब्लू इकोनॉमी’ का विजन
मुंबई, 29 अक्टूबर 2025: भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई आज एक ऐतिहासिक अवसर की गवाह बनी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गोरेगांव स्थित नेस्को ग्राउंड्स में भव्य ‘इंडिया मैरीटाइम वीक 2025’ (India Maritime Week 2025) का उद्घाटन किया। यह आयोजन, जो अगले कुछ दिनों तक चलेगा, भारत के समुद्री क्षेत्र के लिए एक ‘कुंभ’ के समान है, जहाँ दुनिया भर के निवेशक, शिपिंग जायंट्स, नीति निर्माता और प्रौद्योगिकी प्रदाता एक साथ आए हैं।
इस शिखर सम्मेलन का केवल एक ही लक्ष्य है: भारत की 7,500 किलोमीटर से अधिक लंबी तटरेखा की अपार क्षमताओं को अनलॉक करना और देश की ‘ब्लू इकोनॉमी’ (Blue Economy) को वैश्विक मंच पर स्थापित करना। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने उद्घाटन भाषण में स्पष्ट कर दिया कि भारत का ‘अमृत काल’ समुद्र के रास्ते से होकर गुजरेगा और यह क्षेत्र 2047 तक भारत को ‘विकसित राष्ट्र’ बनाने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
‘इंडिया मैरीटाइम वीक 2025’ क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
यह आयोजन सिर्फ एक सम्मेलन या प्रदर्शनी नहीं है; यह भारत की समुद्री महत्वाकांक्षा का एक जीवंत प्रदर्शन है। भारत सरकार ने इस मंच का उपयोग दुनिया को यह दिखाने के लिए किया है कि भारत निवेश के लिए तैयार है।
- वैश्विक भागीदारी: अमेरिका, यूरोप, मध्य पूर्व और दक्षिण-पूर्व एशिया के 30 से अधिक देशों के प्रतिनिधिमंडल इसमें भाग ले रहे हैं।
- निवेश का महाकुंभ: इस आयोजन में लाखों करोड़ रुपये के समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है, जो सीधे तौर पर बंदरगाहों के आधुनिकीकरण, नए बंदरगाहों के निर्माण, जहाज निर्माण (Shipbuilding) और अंतर्देशीय जलमार्गों (Inland Waterways) में निवेश लाएंगे।
- प्रौद्योगिकी प्रदर्शन: यहां ‘ग्रीन शिपिंग’ (Green Shipping), यानी पर्यावरण-अनुकूल जहाज, बंदरगाहों का डिजिटलीकरण और समुद्री सुरक्षा के लिए नवीनतम तकनीकों का प्रदर्शन किया जा रहा है।
पीएम मोदी का विजन: ‘सागरमाला’ से ‘सागर समृद्धि’ तक
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में भारत के समुद्री क्षेत्र के लिए एक स्पष्ट रोडमैप पेश किया। उन्होंने कहा कि भारत केवल एक ‘तटीय राष्ट्र’ (Coastal Nation) बनकर नहीं रह सकता, उसे एक ‘अग्रणी समुद्री शक्ति’ (Leading Maritime Power) बनना होगा।
1. ब्लू इकोनॉमी: अगला ट्रिलियन-डॉलर अवसर
पीएम ने जोर देकर कहा कि 21वीं सदी ‘ब्लू इकोनॉमी’ की सदी है। उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य भारत की ब्लू इकोनॉमी को देश की जीडीपी का एक प्रमुख स्तंभ बनाना है। इसमें मत्स्य पालन से लेकर समुद्री पर्यटन, शिपिंग से लेकर समुद्री ऊर्जा तक सब कुछ शामिल है।” सरकार का लक्ष्य आने वाले दशक में इस क्षेत्र को 10 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का है।
2. ‘पोर्ट-लेड डेवलपमेंट’ (Port-Led Development)
प्रधानमंत्री ने अपनी सरकार की प्रमुख ‘सागरमाला परियोजना’ की प्रगति पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कैसे बंदरगाहों की क्षमता को दोगुना किया जा रहा है और उन्हें सड़कों, रेलवे और जलमार्गों (मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी) से जोड़ा जा रहा है। इसका उद्देश्य लॉजिस्टिक्स की लागत को कम करना है, जिससे भारतीय उत्पाद वैश्विक बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकें।
3. ‘आत्मनिर्भर भारत’ और जहाज निर्माण
“भारत दुनिया के लिए जहाज क्यों नहीं बना सकता?” पीएम मोदी ने यह सवाल उठाते हुए जहाज निर्माण और जहाज मरम्मत (Ship Repair) के क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भर’ बनने का आह्वान किया। उन्होंने वैश्विक शिपिंग कंपनियों को ‘मेक इन इंडिया’ के तहत भारत में अपने जहाज बनाने और मरम्मत कराने के लिए आमंत्रित किया।
4. ‘ग्रीन शिपिंग’ और सस्टेनेबिलिटी
पर्यावरण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए, प्रधानमंत्री ने ‘ग्रीन पोर्ट्स’ और ‘ग्रीन शिपिंग’ पर जोर दिया। इसका मतलब है कि बंदरगाहों को सौर और पवन ऊर्जा पर चलाना और जहाजों के लिए ग्रीन हाइड्रोजन जैसे स्वच्छ ईंधनों के उपयोग को बढ़ावा देना।
मुंबई: आयोजन स्थल के रणनीतिक मायने
इस भव्य आयोजन के लिए मुंबई का चयन अपने आप में एक रणनीतिक निर्णय है।
- भारत का प्रवेश द्वार: मुंबई ऐतिहासिक रूप से भारत का ‘गेटवे’ रहा है।
- वित्तीय और समुद्री केंद्र: यह न केवल देश की वित्तीय राजधानी है, बल्कि भारत के सबसे व्यस्ततम बंदरगाहों (JNPA) में से एक का घर भी है।
- मजबूत संदेश: मुंबई में यह आयोजन करके, सरकार ने वैश्विक निवेशकों को यह संदेश दिया है कि भारत का समुद्री क्षेत्र देश के वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र के साथ गहराई से जुड़ा हुआ है और यहां किया गया निवेश सुरक्षित और लाभदायक है।
निवेशकों और वैश्विक समुदाय की प्रतिक्रिया
‘इंडिया मैरीटाइम वीक’ के पहले दिन ही वैश्विक समुदाय में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। डेनमार्क की एक प्रमुख शिपिंग कंपनी के सीईओ ने कहा, “हम भारत की विकास दर और यहाँ के स्पष्ट नीतिगत ढांचे से प्रभावित हैं। हम भारत के ‘ग्रीन शिपिंग’ लक्ष्यों में भागीदार बनने के लिए तैयार हैं।”
इसी तरह, एक प्रमुख जापानी निवेश फर्म ने भारतीय बंदरगाहों के डिजिटलीकरण और स्वचालन (Automation) में गहरी रुचि दिखाई है।
निष्कर्ष: अवसरों के महासागर का दोहन
‘इंडिया मैरीटाइम वीक 2025’ की शुरुआत एक मजबूत वादे के साथ हुई है। यह स्पष्ट है कि भारत सरकार समुद्री क्षेत्र को केवल परिवहन के एक साधन के रूप में नहीं, बल्कि आर्थिक विकास के एक शक्तिशाली इंजन के रूप में देख रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मुंबई में होना और इस आयोजन का नेतृत्व करना, इस क्षेत्र के प्रति उनकी गंभीरता को दर्शाता है। जैसा कि उन्होंने अपने भाषण में कहा, “भारत के पास एक लंबा समुद्र तट ही नहीं, बल्कि एक लंबा ऐतिहासिक समुद्री अनुभव भी है। अब समय आ गया है कि हम उस अनुभव को आधुनिक तकनीक और निवेश के साथ जोड़कर ‘सागर से समृद्धि’ के एक नए युग का सूत्रपात करें।”
अगले कुछ दिन यह तय करेंगे कि भारत अवसरों के इस महासागर का कितनी गहराई से दोहन कर पाता है।








