पटना/दिल्ली:
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 नजदीक आते ही राजनीतिक हलचल तेज़ हो गई है। विपक्षी दलों के बड़े मंच ‘INDIA’ गठबंधन के भीतर सीट बंटवारे को लेकर मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। सूत्रों के मुताबिक, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और कांग्रेस के बीच सीटों की संख्या को लेकर गंभीर मतभेद बने हुए हैं। तेजस्वी यादव की दिल्ली में कांग्रेस नेतृत्व के साथ प्रस्तावित बैठक नहीं हो सकी, जिससे गठबंधन के भीतर दरार की खबरें और गहरी हो गई हैं।
🔹 बैठक रद्द, पटना लौटे तेजस्वी यादव
मिली जानकारी के अनुसार, बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और RJD नेता तेजस्वी यादव की दिल्ली में कांग्रेस के शीर्ष नेताओं — मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और के.सी. वेणुगोपाल — से मुलाकात तय थी।
लेकिन, ऐन मौके पर यह बैठक रद्द हो गई और तेजस्वी पटना लौट गए। पार्टी सूत्रों का कहना है कि बैठक स्थगित होने के पीछे कोई तकनीकी कारण था, लेकिन अंदरखाने में सीट बंटवारे पर सहमति न बनने की वजह बताई जा रही है।
🔹 सीटों पर खींचतान — कौन कितनी सीटें चाहता है?
बिहार विधानसभा की कुल 243 सीटों में से RJD, जो गठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी है, अधिकतम हिस्सेदारी चाहती है। सूत्रों के मुताबिक, RJD कांग्रेस को 60 से कम सीटें देना चाहती है, जबकि कांग्रेस 70 से अधिक सीटों की मांग पर अड़ी हुई है।
कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि पिछले चुनाव में पार्टी का वोट शेयर बेहतर रहा और कई सीटों पर मुकाबला कांटे का था। वहीं, RJD मानती है कि मुख्य लड़ाई उसके कार्यकर्ताओं और संगठन ने लड़ी थी, इसलिए उसे “लीडिंग रोल” मिलना चाहिए।
🔹 गठबंधन में अन्य दलों की स्थिति
INDIA गठबंधन में बिहार से RJD और कांग्रेस के अलावा वाम दल [CPI, CPI(M), CPI(ML)] भी शामिल हैं।
CPI(ML) के सूत्रों का कहना है कि वे 15 से 20 सीटों की मांग कर सकते हैं, जबकि CPI और CPM को मिलाकर 10 सीटों तक पर बात हो सकती है।
ऐसे में अगर RJD कांग्रेस को 70 से ज्यादा सीटें देती है, तो अन्य सहयोगियों की हिस्सेदारी घटनी तय है, जिसे लेकर भी अंदरूनी असंतोष बढ़ सकता है।
🔹 2020 के आंकड़े क्या कहते हैं?
बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में RJD ने 144 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 75 सीटों पर जीत हासिल की थी, जबकि कांग्रेस ने 70 सीटों पर चुनाव लड़ा और सिर्फ 19 सीटें जीतीं।
वामदलों का प्रदर्शन अपेक्षाकृत बेहतर रहा — CPI(ML) ने 12 सीटें, CPI ने 2 और CPM ने 2 सीटें जीती थीं।
इन आंकड़ों के आधार पर RJD का मानना है कि कांग्रेस को 60 से ज्यादा सीटें देना “राजनीतिक रूप से जोखिम भरा” होगा।
🔹 कांग्रेस की दलील — “जमीनी कार्यकर्ताओं को साथ रखना ज़रूरी”
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि पार्टी के पास बिहार के कई जिलों में मजबूत कार्यकर्ता और संगठन हैं, खासकर सीमांचल, मिथिलांचल और मगध क्षेत्रों में।
पार्टी चाहती है कि गठबंधन की सीटें “सम्मानजनक संतुलन” के साथ तय हों ताकि कार्यकर्ता निराश न हों।
कांग्रेस का यह भी कहना है कि 2024 लोकसभा चुनाव में कई सीटों पर उसका वोट शेयर RJD से अधिक रहा है, इसलिए उसका दावा “तथ्यों पर आधारित” है।
🔹 क्या टूट सकता है INDIA गठबंधन?
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, यह तनाव अस्थायी हो सकता है, क्योंकि गठबंधन के लिए “साझा दुश्मन” बीजेपी है।
RJD और कांग्रेस दोनों यह जानते हैं कि अलग-अलग लड़ने से बीजेपी-एनडीए को सीधा फायदा मिलेगा।
हालांकि, अगर सीटों पर समझौता नहीं हुआ तो छोटे दलों और निर्दलीयों को भी मौका मिल सकता है, जिससे चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल जाएंगे।
🔹 तेजस्वी की रणनीति — “मुख्यमंत्री चेहरा तय”
तेजस्वी यादव पहले ही साफ कर चुके हैं कि बिहार में INDIA गठबंधन का मुख्यमंत्री चेहरा RJD की ओर से होगा।
उन्होंने कहा, “हमने महागठबंधन को मजबूत करने के लिए सब कुछ किया है, लेकिन अगर कोई पार्टी अनुचित मांग रखती है, तो जनता सब देख रही है।”
इस बयान से यह भी संकेत मिलता है कि RJD समझौते की सीमा से आगे जाने को तैयार नहीं है।
🔹 बीजेपी और एनडीए की तैयारी
इधर दूसरी ओर, एनडीए (BJP, JDU, HAM, LJP) ने सीटों का प्राथमिक ढांचा तय कर लिया है।
जानकारी के अनुसार, बीजेपी 160 से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ेगी, जबकि शेष सीटें सहयोगियों को दी जाएंगी।
सीट बंटवारे के इस विवाद से एनडीए को “पॉलिटिकल नेरेटिव” बनाने का मौका मिल गया है।
भाजपा नेताओं ने इसे “INDIA गठबंधन की अव्यवस्था” करार दिया है।
🔹“समझौता ही जीत की कुंजी”
बिहार का राजनीतिक इतिहास बताता है कि गठबंधन तभी सफल होता है जब अंदरूनी मतभेदों को सार्वजनिक न किया जाए।
RJD और कांग्रेस दोनों के सामने चुनौती यह है कि वे एकजुट रहकर बीजेपी-जेडीयू के मजबूत संगठन को टक्कर दे सकें।
अब सबकी नजर इस पर है कि क्या आने वाले हफ्तों में दोनों दल सीटों पर समझौता कर पाते हैं या नहीं।








