प्रधानमंत्री मोदी ने किया एम.एस. स्वामीनाथन शताब्दी अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन!

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📅 7 अगस्त 2025 | नई दिल्ली

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज भारत की कृषि क्रांति के मार्गदर्शक और “हरित क्रांति के जनक” माने जाने वाले डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन की जन्म शताब्दी के अवसर पर आयोजित “एम.एस. स्वामीनाथन शताब्दी अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन” का उद्घाटन किया। यह सम्मेलन देश और विदेश के कृषि वैज्ञानिकों, नीति निर्माताओं और किसानों को एक साथ जोड़ने का एक ऐतिहासिक प्रयास है।


🌾 डॉ. स्वामीनाथन को श्रद्धांजलि और किसानों को प्राथमिकता

उद्घाटन भाषण के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा:

“किसानों का हित हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। डॉ. स्वामीनाथन ने जिस आत्मनिर्भर कृषि का सपना देखा था, आज भारत उसी दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहा है।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि डॉ. स्वामीनाथन की सोच ने भारत को खाद्य संकट से निकालकर खाद्य सुरक्षा प्रदान की। उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान सरकार किसानों की आय दोगुनी करने, तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने और जलवायु अनुकूल कृषि को अपनाने के लिए कई ऐतिहासिक कदम उठा रही है।


🌍 अंतर्राष्ट्रीय सहभागिता और नवाचार पर जोर

सम्मेलन में भारत सहित विभिन्न देशों के कृषि विशेषज्ञ, शोधकर्ता और नीति निर्माता शामिल हुए। मुख्य विषयों में शामिल हैं:

  • सतत कृषि (Sustainable Agriculture)
  • कृषि में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग
  • जलवायु परिवर्तन और फसल सुरक्षा
  • जैविक खेती और उन्नत बीज तकनीक

🏆 कृषि अनुसंधान और किसानों के लिए नए अवसर

प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर यह भी घोषणा की कि डॉ. स्वामीनाथन के नाम पर राष्ट्रीय कृषि नवाचार पुरस्कार की शुरुआत की जाएगी, जो हर वर्ष अग्रणी कृषि वैज्ञानिकों को दिया जाएगा।

इसके अतिरिक्त, सरकार आने वाले वर्षों में स्मार्ट कृषि तकनीकों के प्रचार-प्रसार पर विशेष ध्यान देगी ताकि छोटे और सीमांत किसानों को भी इसका लाभ मिल सके।


📚 डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन: हरित क्रांति के शिल्पकार

डॉ. स्वामीनाथन का जन्म 7 अगस्त 1925 को हुआ था। उन्होंने ऐसे समय में भारत को हरित क्रांति की ओर अग्रसर किया जब देश गंभीर खाद्य संकट से जूझ रहा था। उनके योगदान के कारण ही भारत ने गेहूं और चावल उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल की।

उनका विचार था — “If agriculture goes wrong, nothing else will have a chance to go right.”


✍️ निष्कर्ष

एम.एस. स्वामीनाथन शताब्दी सम्मेलन भारत के कृषि भविष्य को समर्पित एक प्रेरणादायक पहल है। यह न केवल एक महान वैज्ञानिक को श्रद्धांजलि है, बल्कि एक कृषि नवाचार आंदोलन की शुरुआत भी है, जो आने वाले वर्षों में किसानों को सशक्त बनाएगा।


 


 

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