
पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा शुरू हो गई है। सबसे पहले भगवान बलभद्र का रथ भक्तों ने खींचा। कुछ दूर खींचने के बाद अभी रथ रुक गया है। बलभद्र के बाद देवी सुभद्रा और फिर भगवान जगन्नाथ का रथ खींचा जाएगा।
सुबह मंगल आरती और विधि विधान पूजा के बाद भगवान जगन्नाथ को नंदी घोष रथ, देवी सुभद्रा को दर्पदलन और बलभद्र को तालध्वज रथ पर विराजित किया गया है।
रथ पर भगवान की विधिवत पूजा और भोग हुआ। दोपहर 3 बजे पुरी राजपरिवार के गजपति दिव्य सिंह देव रथ के आगे सोने के झाडू से बुहारा लगाकर रथ यात्रा की शुरुआत की।
रथ से भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ करीब 3 किलोमीटर दूर गुंडिचा मंदिर जाएंगे। ये उनकी मौसी का घर माना जाता है।
उधर, अहमदाबाद समेत देश के कई शहरों में रथ यात्राएं निकाली गई हैं। अहमदाबाद में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा निकाली गई। गृह मंत्री अमित शाह ने सुबह 4 बजे मंगल आरती की। इसके बाद मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने पाहिंद विधि कर रथ यात्रा की शुरुआत की। रात तकरीबन 8:30 बजे भगवान वापस मंदिर लौटेंगे।



अहमदाबाद जगन्नाथ रथयात्रा में हाथी बेकाबू, एक व्यक्ति घायल

अहमदाबाद में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा में शुक्रवार सुबह 10 बजे एक हाथी बेकाबू हो गया और 100 मीटर तक भागा। इसके बाद रथ यात्रा में भगदड़ सी मच गई। लोग इधर-उधर भागते दिखे। बेकाबू हुआ हाथी 17 हाथियों के ग्रुप में सबसे आगे चल रहा था। मुश्किल से काबू पाया गया। इस हादसे में एक व्यक्ति घायल हो गया है।
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इम्फाल में रथ यात्रा को कांग चिंगबा कहा जाता है। यह मणिपुर का एक महत्वपूर्ण त्योहार है। जो पुरी की रथ यात्रा की तरह ही होता है।
पणजी की रथ यात्रा में सीएम प्रमोद सावंत ने भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा की पूजा की।
कालुपुर से सरसपुर के बीच में रथ के पहिए में खराबी आई थी। जिससे करीबन 20 मिनट यात्रा रुकी रही। पहिए को ठीक कर लिया गया है। यात्रा सरसपुर पहुंच गई।
पश्चिम बंगाल के दीघा में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा शुरू हो गई है। यात्रा में सीएम ममता बनर्जी ने भगवान की आरती की और फिर छेरा पोहरा की परंपरा निभाई। इस परंपरा में भगवान के रथ के आगे झाड़ू लगाई जाती है।
जगदीश चौक से भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा रवाना हुई। सबसे पहले मेवाड़ राज परिवार के पूर्व सदस्य विधायक विश्वराज सिंह मेवाड़ ने रथ खींचा।
पुरी रथ यात्रा की शुरुआत हो गई है। सबसे पहले बलभद्र का रथ खींचा गया। बलभद्र का रथ रुक-रुककर आगे बढ़ रहा है। कुछ देर में देवी सुभद्रा और फिर भगवान जगन्नाथ का रथ खींचा जाएगा।
भगवान जगन्नाथ को मंदिर से बाहर लाया गया। जैसे ही वे बाहर आए 21 बंदूकों के साथ सलामी दी गई। राजघराने के पूर्व सदस्य विश्वराज सिंह पहले पूजा और आरती करेंगे। इसके बाद वे रथ खींचेंगे।

गजपति बलभद्र और सुभद्रा के रथ पर छेरा पहरा की विधि करने के बाद भगवान जगन्नाथ के रथ पर पूजा कर रहे हैं। इस विधि के बाद रथ खिंचने की तैयारी होगी।
वडोदरा में रथ यात्रा की तैयारियों के दौरान तबीयत बिगड़ने से पुलिसकर्मी की मौत हो गई। पुलिसकर्मी ने घबराहट और उल्टी की शिकायत की थी। बाद में इसे सयाजी अस्पताल ले जाया गया। वहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। मृतक पुलिस कांस्टेबल हरनी थाने में तैनात था।


पुरी में गजपति भगवान बलभद्र के रथ पर पहुंचे

रथ यात्रा शुरू होने के पहले राजघराने से गजपति महाराज दिव्यदेव सिंह रथों की पूजा करते हैं। उसके बाद छेरा पहरा की रस्म होती है।

मंदिर परिसर में ही भगवान को छोटे रथ में बैठाकर परिक्रमा करवाई जाती है। इसके बाद बाहर मुख्य रथ में भगवान को बैठाया जाता है।
दीघा में 2022 में मंदिर निर्माण शुरू हुआ था। मंदिर का उद्धाटन 30 अप्रैल 2025 को हुआ था। मंदिर में भगवान जगन्नाथ के साथ उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की मूर्तियां भी स्थापित की गई है।
पुराने रथ के कुछ हिस्से टूटने के बाद 2021 में भक्तों के आर्थिक सहयोग से चांदी का नया रथ तैयार किया गया। तब से इसी रथ में भगवान की यात्रा होती है।

रथ पर विराजित करने के बाद भगवान का समर्पण तिलक होता है और भगवान को सजाया जाता है। इसके बाद पुरी के गजपति महाराज के द्वारा छेरा पहरा नीति होती है, जिसमें रथ को सोने की झाड़ू से बुहारा जाता है।





पुरी में इस समय हल्की बारिश हो रही है। भगवान जगन्नाथ अपने रथ नंदीघोष में विराजित हो गए हैं, इनसे पहले देवी सुभद्रा दर्पदलन रथ में और बलभद्र तालध्वज रथ में विराजमान हुए। अब भगवान विधिवत पूजा की जाएगी और करीब 4 बजे रथों को खींचा जाएगा।
पुरी रथयात्रा में बलभद्र तालध्वज रथ और सुभद्रा दर्पदलन रथ में विराजित हो चुके हैं। अब कुछ ही देर बार भगवान जगन्नाथ भी अपने नंदीघोष पर विराजमान होने वाले हैं।
ओडिशा के एडीजी संजय कुमार ने कहा- हमारा अनुमान है कि आज की रथयात्रा में 10 से 12 लाख भक्त आए हुए हैं। लोगों की सुरक्षा के लिए क्राउड मैनेजमेंट को लेकर उचित इंतजाम किए गए हैं।

पुरी रथयात्रा में बलभद्र के बाद भगवान जगन्नाथ और देवी सुभद्रा की प्रतिमाएं भी भक्त रथ की ओर ले जा रहे हैं। कुछ देर बाद पहले सुभद्रा और फिर जगन्नाथ अपने रथ विराजित होंगे।

भगवान बलभद्र को भक्त रथ की ओर ले जा रहे हैं। कुछ देर बाद बलभद्र अपने तालध्वज रथ पर विराजित हो जाएंगे।
पुरी रथयात्रा मार्ग पर मरीज को ले जा रही एक एंबुलेंस आई तो आरएसएस के स्वयंसेवकों ने पुलिस, एनडीआरफ और रेपिड एक्शन फोर्स की मदद से स्पेशल कॉरिडोर बनाया, ताकि एंबुलेंस को रास्ता मिल सके।
सांसद संबित पात्रा ने कहा- भगवान जगन्नाथ ब्रह्मांड का संचालन करते हैं। भगवान अपने भाई बलभद्र, बहन सुभद्रा, देवी लक्ष्मी और सुदर्शन चक्र के साथ यहां वास करते हैं। जगन्नाथ जी नवयोवन दर्शन के बाद अपनी मौसी के घर गुंडिचा मंदिर पहुंचेंगे।
दीघा जगन्नाथ मंदिर में रथ यात्रा शुरू हो गई है। पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने रथयात्रा का उद्धाटन किया। सीएम बनर्जी ने दिसंबर 2018 में दीघा जगन्नाथ मंदिर बनाने की घोषणा की थी।
भगवान जनन्नाथ ,बलभद्र और सुभद्रा जी का श्रृंगार कर गुरुवार को भोर में रथ पर मंगला आरती की गई। इसके साथ ही यहां तीन दिवसीय रथ यात्रा मेले का शुभारंभ हुआ।
दीघा जगन्नाथ मंदिर में रथ यात्रा की तैयारियां शुरू हो गई है। रथ यात्रा थोड़ी देर में शुरू होगी। पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने दिसंबर 2018 में दीघा जगन्नाथ मंदिर बनाने की घोषणा की थी। इसके बाद 2022 में मंदिर निर्माण शुरू हुआ। मंदिर का उद्धाटन 30 अप्रैल को हुआ था। मंदिर में जगन्नाथ जी के साथ ही बलभद्र और सुभद्रा की प्रतिमा विराजित है।
पुरी के डीएम में कहा – रथयात्रा का मार्ग श्रद्धालुओं से भरा हुआ है। रथयात्रा से जुड़ी सभी परंपराओं समय पर निभाई जाएंगी।
पश्चिम बंगाल के दीघा में भगवान जगन्नाथ मंदिर में पहली रथ यात्रा निकाली जाएगी। यात्रा करीब एक किलोमीटर लंबी होगी। इस्कॉन कोलकाता के उपाध्यक्ष राधारमण दास ने बताया, दीघा जगन्नाथ यात्रा पुरी रथ यात्रा से प्रेरित है। यहां के रथ पुरी के रथों की तरह ही बनाए गए हैं। कुछ ही देर में भगवान अपने रथ पर आ जाएंगे और रथ यात्रा शुरू हो जाएगी। CM ममता बनर्जी दोपहर 2 बजे यहां आएंगी।


रथ यात्रा की शुरुआत राज्य के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने पहिंद रस्म अदा करने के बाद की है। भगवान जगन्नाथ का पहला रथ मंदिर से निकला, इस साल रथ यात्रा 10 मिनट पहले शुरू हुई। हर साल भगवान जगन्नाथजी का पहला रथ सुबह 7.10 बजे निकलता है, लेकिन इस साल भगवान जगन्नाथ का पहला रथ सुबह 6.56 बजे मंदिर के बाहर लाया गया। बारिश के बीच रथ यात्रा शुरू हुई है। भगवान बलराम का दूसरा रथ जमालपुर मंदिर से निकल चुका है।
इस साल पहली बार भगवान को गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाएगा। रथयात्रा में 18 हाथी, भारतीय संस्कृति को प्रदर्शित करने वाले 101 ट्रक, 30 अखाड़े, 18 भजन मंडलियां और 3 बैंड दल शामिल होंगे। हरिद्वार, अयोध्या, नासिक, उज्जैन, जगन्नाथपुरी और सौराष्ट्र से करीब 2500 संत भी बड़ी संख्या में शामिल होंगे।

तीनों भगवान को रथ में बैठाया गया है। भगवान जगन्नाथ के बाद भाई बलराम को तालध्वज रथ, फिर बहन सुभद्राजी को देवदलन रथ में बैठाया गया। दर्शन के लिए जमालपुर जगन्नाथ मंदिर में भक्तों की भीड़ है। रथ में विराजमान भगवान की तस्वीरें लेने के लिए लोगों की भीड़ देखी जा रही है।

अहमदाबाद में भगवान की आंखों से पट्टी हटाने की रस्म निभाई गई। नेत्रोत्सव की रस्म निभाने के बाद भगवान की आंखों पर पट्टी बांधी गई। भगवान के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में भक्त जगन्नाथ मंदिर पहुंचे हैं।





