उत्तर प्रदेश में सोनभद्र जिले के शक्तिनगर की राजकिशन कालोनी में रहने वाले 200 बनवासी परिवारों के 580 लोगों की सनातन धर्म में वापसी :-

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सोनभद्र में 200 वनवासी परिवारों के 580 लोगों ने अपनाया सनातन धर्म : सनातन धर्म में वापसी के लिए दीक्षा यज्ञ करते वनवासी समाज के लोग :-

विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने उत्तर प्रदेश में सेनभद्र जिले के शक्तिनगर की राजकिशन कालोनी में रहने वाले 200 बनवासी परिवारों के 580 लोगों की सनातन धर्म में वापसी कराई है। इन परिवारों की मांतरित कर ईसाई बनाया गया था। गुरुवार को संस्कृति दीक्षा यज्ञ के माध्यम से तीर्थ पुरोहित दुर्गा प्रसाद शास्त्री और पंडित वेदांती मिश्र ने हवन पूजन कर घर वापसी कराईं। विहिप अब शेष 50 परिवारों को भी सनातन धर्म में वापस लाने के लिए प्रयासरत है, जिनमें से कुछ पास्टर की भूमिका निभा रहे हैं।

नौकरी, शिक्षा व चिकित्सा का प्रलोभन देकर बनाया गया था ईसाई :

झारखंड, बिहार और ओडिशा से वनवासी परिवार 1976 में शक्तिनगर की विभिन्न परियोजनाओं में काम करने के लिए आए थे और राजकिशन कालोनने में बस गए थे। आरोप है कि सेंट जोसेफ स्कूल प्रबंधन ने करीब चार दशकों तक इन परिवारों को नौकरी, मुफ्त शिक्षा, चिकित्सा और आर्थिक सहायता का लालच देकर मतांतरित किया। विहिप के केंद्रीय मंत्री सुधांशु पटनायक ने कहा कि ये सभी मूलतः सनातन धर्म के हैं। इन लोगों को प्रलोभन देकर मांतरण कराया। आज ये अपने धर्म में वापस लौट रहे हैं।

विहिप के प्रांत प्रमुख नरसिंह त्रिपाठी ने बताया कि 2023 में मांतरण की गतिविधियों में संलिप्त 42 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था।इनमें सेंट जोसेफ स्कूल के शिक्षक प्रकाश सफाईकर्मी दुर्गावती देवी और अनपरा निवासी पास्टर अक्षय विश्वकर्मा भी थे। सभी आरोपितों को जमानत मिल चुकी है, लेकिन मुकदमा चल रहा है।

झारखंड में आठ ईसाई परिवार के 40 सदस्यों ने की घर वापसी :

जाएं, गुमलाः झारखंड के गुमला जिले में शुक्रवार को आठ जनजाति परिवारों के 40 सदस्यों ने ईसाई धर्म से सरना धर्म में वापसी की। कुदरा गांव में ईसाई पास्टर द्वारा चंगाई के नाम पर इन जनजातियों का मतांतरण किया गया था, जिससे गांव का सामाजिक ताना-बाना प्रभावित हो रहा था। पिछले एक सप्ताह से ग्रामीणों के बीच इस मुद्दे पर बैठकों का सिलसिला जारी था।

एक बैठक में निर्णय लिया गया था कि पास्टरों को गांव में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा और मत्तांतरित लोगों का हुक्का-पानी बंद किया जाएगा। इस संदर्भ में रविवार की एक बड़ी बैठक भी प्रस्तावित थी, लेकिन उससे पहले ही शुक्रवार को आठ परिवारों ने घर वापसी कर ली। मतातरित लोगों ने गांव के देवी मंडप में पूजा-पाठ किया।

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