
दिल्ली-एनसीआर में लगातार बढ़ रही आवारा कुत्तों के हमले की घटनाओं को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि अब इन कुत्तों को सड़कों से हटाकर सुरक्षित शेल्टर होम में रखा जाए, और इन्हें किसी भी हालत में वापस सड़कों पर न छोड़ा जाए।
लोगों की सुरक्षा पर जोर
पिछले कुछ महीनों में दिल्ली-एनसीआर के कई इलाकों में आवारा कुत्तों द्वारा बच्चों और बुजुर्गों पर हमले की घटनाएं सामने आई हैं। इन घटनाओं के बाद स्थानीय लोगों में भय और आक्रोश दोनों देखने को मिला। सुप्रीम कोर्ट ने इसे गंभीर मानते हुए कहा—
“लोगों की जान की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।”
जानवरों के प्रति संवेदनशीलता भी जरूरी
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि यह कदम जानवरों के प्रति नफरत फैलाने के लिए नहीं, बल्कि मानव और पशु—दोनों की सुरक्षा के लिए है। शेल्टर होम में इन कुत्तों की उचित देखभाल, भोजन और चिकित्सा की व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
लागू करने की चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि इस आदेश को जमीन पर लागू करना आसान नहीं होगा, क्योंकि दिल्ली-एनसीआर में आवारा कुत्तों की संख्या लाखों में है। इसके लिए पर्याप्त शेल्टर होम, बजट और प्रशिक्षित कर्मचारियों की जरूरत होगी।
अगले कदम
स्थानीय निकायों, नगर निगम और पशुपालन विभाग को तुरंत कार्रवाई का निर्देश दिया गया है। यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में इस आदेश को कितनी सख्ती से लागू किया जाता है और क्या इससे आवारा कुत्तों के हमलों में कमी आती है।








