मिडिल स्कूल परिसर के अनुपयोगी भवन में चल रहे कॉलेज, 700 छात्र पढ़ते हैं ,335 सरकारी कॉलेजों में से 109 के पास खुद का भवन नहीं :-
प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में नर सत्र के लिए दाखिले शुरू हो गए हैं। पर शिक्षा व्यवस्था बदहाल है। 335 सरकारी कॉलेजों में 109 के पास खुद का भवन नहीं है। इसमें से कई ऐसे हैं जो 7-8 साल से चल रहे हैं। लैब, लाइबेरी जैसी सुविधाएं ही नहीं है।
लैब के अभाव में छात्र दूसरे कॉलेज में जाकर प्रेक्टिकल करने को मजबूर है। कमरे भी इतने कम हैं कि इनमें सभी छात्रों को बैठा पाना मुश्किल है। ऐसे में यह सरकारी कॉलेज ग्रेजुएट तैयार करने में लगे हैं।
सरकारी कॉलेजों को लेकर पड़ताल की। इसमें पता चला कि ये कॉलेज 2018 से लेकर 2023 तक में स्थापित हुए हैं। शहीद राजीव पांडेय गवर्नमेंट कॉलेज भाटागांव रायपुर, नवीन कॉलेज गुडियारी, नवीन गवर्नमेंट कॉलेज माना कैंप रायपुर, गवर्नमेंट कॉलेज समौदा रायपुर आदि कॉलेजों के पास ते खुद का भवन ही नहीं है।
यहां जरूरी सुविधाएं भी नहीं है। जैसे-तैसे प्रैक्टिकल कर साईस ग्रेजुएट निकल रहे हैं। यह हाल सिर्फ रायपुर के कॉलेजों का नहीं प्रदेश में 100 से ज्यादा ऐसे कॉलेज हैं। औसतन एक कॉलेज में 200 छात्र भी दाखिला लेते हैं तो हर साल 20 हजार से अधिक छात्र ग्रेजुएट की डिग्री हासिल कर रहे हैं।
केस-1 ,कॉलेज 8 कमरों में, स्टोर रूम में क्लास :
भाडागांव स्थित शहीद राजीव पांडेय कॉलेज, जो 2018 में बना। यह पूर्व माध्यमिक शाला परिसर में संचालित बाहर बोर्ड नहीं था। विसिंपल ऑफिस समेत 8 कमरे हैं। स्टाफ रूम भी है।। कमरे में कक्षाएं लगती हैं और यह स्टोर रूम भी है। बीबीकॉम बीएससी मिलाकर 700 से अधिक छात्र-छात्राएं हैं।
केस-2 ,पढ़ाई कहीं, प्रैक्टिकल दूसरी जगह गवर्नमेंट नवीन कॉलेज मुखियारी की स्थापना :
2018 में गुहिवारी के गवर्नमेंट प्राइमरी स्कूल भवन में इसकी कक्षाएं लगती थी। पिछले साल से इसे संस्कृत कॉलेज रायपुर में शिफ्ट किया गया। यहां कमरे है। बीए, बीकॉम, बीएससी में फस्र्ट ईगर में 270 सीटें हैं।
वहां भी न लैब है और न ही लाइबेरी। इस वजह से प्रैक्टिकल के भी स्टूडेंट्स को माईस कॉलेज जाना पड़ता है। फाइल रखने के लिए अलमारी भी स्टाफ अपने घर से लेकर आए हैं। ऑफिस में काम करने वाले नहीं है। कॉलेज के लिए जमीन अलॉट हो चुकी है।
“यहां की स्थिति के बारे में उच्च शिक्षा विभाग को सूचित किया जा चुका है। लैब नहीं होने से छात्र साईस कॉलेज में प्रिक्टिकल के लिए जाते हैं।” -डॉ. मधुलिका अग्रवाल,प्राचार्य ,गवर्नमेंट नवीन कॉलेज
“केंद्र से अनुदान मिला है। राज्य के बजट में भी प्रावधान है। कॉलेजों में इंस्ट्रक्बर सुधार प्राथमिकता है। जहां जरूरत है, सुधार होगा।” – एस भारतीदासन,सचिव उच्च शिक्षा
“भवन की कमी तो है। इस बारे में शासन को अवगत कराया जा चुका है। लैब नहीं है। प्रैक्टिकल के लिए छात्र राधाबाई नवीन कन्या कॉलेज में जाते हैं।” -डॉ. राजेश दुबे, प्राचार्य
इन कॉलेजों के पास खुद का भवन नहीं :-
-
शहीद राजीव पांडेय कॉलेज, रायपुरः 2018
-
नवीन कॉलेज गुठियारीः 2018
-
नवीन कॉलेज, बलौदाबाजारः 2018
-
लेट रामनाथ वर्मा गवर्नमेंट कॉलेज निपानिया बलौदाबाजारः 2018
-
नवीन कॉलेज कंदेल, धमतरीः 2021
-
नवीन कॉलेज अमडी धमतरीः 2018
-
बाबू पंढरी राव कृदत्त गवर्नमेंट कॉलेज सिलीठी धमतरीः 2018
-
नवीन गर्ल्स कॉलेज गरियाबंदः 2023
-
नवीन कॉलेज गोहरापादर गरियाबंदः 2018
-
आत्मानंद इंग्लिश मीडियम कॉलेज महासमुंदः 2023
-
बुधन शाह जी नवीन गवर्नमेंट कॉलेज तेंदुकोना महासमुंदः 2018
-
नवीन कॉलेज पिरदा महासमुंदः 2018
-
नवीन कॉलेज छिरको महासमुंदः 2018
-
नवीन कॉलेज कोमाखान महासमुंदः 2023
-
नवीन कॉलेज भनवारपुर महासमुंदः 2023
-
नवीन गर्ल्स कॉलेज गोधरा-नवापत तवपुरः 2021
-
नवीन शासकीय महाविद्यालय तामासिवनी रायपुरः 2023
-
भक्त माता कर्मा गवर्नमेंट कॉलेज समोदा रायपुरः 2018
-
नवीन कॉलेज माना कैंप रायपुरः 2023








