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“ऑपरेशन शील्ड” भारत में एक महत्वपूर्ण सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल (सैन्य अभ्यास) है, जिसका उद्देश्य युद्ध जैसी स्थितियों और आतंकी हमलों से निपटने के लिए नागरिक सुरक्षा व्यवस्था और सरकारी तंत्र की तैयारियों को जांचना और मजबूत करना है। यह अभ्यास गृह मंत्रालय के निर्देश पर पाकिस्तान से सटे सीमावर्ती राज्यों में आयोजित किया जाना था।
यहाँ कुछ और विस्तृत जानकारी दी गई है:
मुख्य उद्देश्य:
- आपातकालीन स्थितियों में प्रतिक्रिया की जांच: इसका प्राथमिक उद्देश्य यह देखना था कि आतंकी हमलों, मिसाइल हमलों, या ड्रोन हमलों जैसी अप्रत्याशित स्थितियों में नागरिक, स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां कितनी कुशलता से प्रतिक्रिया देती हैं।
- नागरिक सुरक्षा को मजबूत करना: नागरिकों को हवाई हमलों, ब्लैकआउट और निकासी प्रोटोकॉल के बारे में प्रशिक्षित करना ताकि वे आपातकाल में अपनी और दूसरों की सुरक्षा कर सकें।
- समन्वय का परीक्षण: सिविल डिफेंस वार्डन, स्थानीय प्रशासन, एनसीसी, एनएसएस, एनवाईकेएस और अन्य स्वयंसेवक संगठनों के बीच समन्वय क्षमता का परीक्षण करना।
- ब्लैकआउट का अभ्यास: दुश्मन के हवाई हमलों के दौरान महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों और शहरों को अंधेरे में छिपाकर उन्हें निशाना बनने से बचाना। साथ ही, बिजली के अभाव में नागरिक संचार व्यवस्था और सुरक्षा बनाए रखने का अभ्यास करना।
शामिल राज्य और केंद्र शासित प्रदेश:
यह मॉक ड्रिल मुख्य रूप से पाकिस्तान से सटे संवेदनशील सीमावर्ती राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के चुनिंदा जिलों में आयोजित की जानी थी, जिनमें शामिल हैं:
- जम्मू-कश्मीर
- राजस्थान
- गुजरात
- हरियाणा
- चंडीगढ़
- पंजाब (कुछ रिपोर्टों में इसका भी उल्लेख है)
अभ्यास में शामिल गतिविधियां:
- नागरिक सुरक्षा वार्डन और स्वयंसेवकों की भागीदारी: सिविल डिफेंस वार्डन, स्थानीय प्रशासन के कर्मचारी और एनसीसी, एनएसएस, एनवाईकेएस, भारत स्काउट्स और गाइड्स जैसे युवा स्वयंसेवकों को अलग-अलग कार्यों में नागरिक प्रशासन की मदद के लिए बुलाया जाना था।
- हवाई हमले और ड्रोन हमले का अभ्यास: दुश्मन के विमानों, ड्रोन और मिसाइल हमलों की स्थिति का अनुकरण किया जाना था।
- हॉटलाइन सक्रियता: एयर फोर्स और नागरिक सुरक्षा कंट्रोल रूम्स के बीच हॉटलाइन सक्रिय करना।
- हवाई हमले की चेतावनी सायरन: हवाई हमले की चेतावनी देने वाले सायरन बजाना और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने का अभ्यास करवाना।
- ब्लैकआउट: शाम 8:00 बजे से 8:15 बजे तक आम नागरिक इलाकों (जरूरी सेवाओं को छोड़कर) में ब्लैकआउट करना। इसका उद्देश्य सायरन की जांच और नागरिकों को अंधेरे में प्रतिक्रिया के लिए प्रशिक्षित करना था।
- बचाव और निकासी: ड्रोन हमले के बाद घायलों का बचाव और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना, जिसमें 20 लोगों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने का सिमुलेशन शामिल था।
- चिकित्सा सहायता: बड़ी संख्या में घायलों की स्थिति में अतिरिक्त मेडिकल टीमों की तैनाती और 30 यूनिट रक्त की आवश्यकता का अभ्यास।
- सीमा क्षेत्र गृह रक्षक दलों की तैनाती: सीमा क्षेत्र गृह रक्षक दलों की सेना के साथ त्वरित तैनाती और संचालन स्थल तक पहुंचने का अभ्यास।
- जन जागरूकता: नागरिकों को अफवाहों से बचने और केवल सरकारी सूत्रों से प्राप्त जानकारी पर भरोसा करने के लिए जागरूक करना।

स्थगन का कारण:
ऑपरेशन शील्ड, जो 29 मई 2025 को होने वाला था, प्रशासनिक कारणों से स्थगित कर दिया गया है। कुछ रिपोर्टों में जम्मू-कश्मीर में वीवीआईपी दौरे (गृह मंत्री अमित शाह का दौरा) को भी एक कारण बताया गया है, जिसके कारण वहां इस अभ्यास को स्थगित करना पड़ा। नई तारीख की घोषणा बाद में की जाएगी।
“ऑपरेशन सिंदूर” से संबंध:
“ऑपरेशन शील्ड” को “ऑपरेशन सिंदूर” के कुछ हफ्तों बाद प्रस्तावित किया गया था। “ऑपरेशन सिंदूर” भारतीय सेना द्वारा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में आतंकी ठिकानों को नष्ट करने के लिए चलाया गया एक बड़ा सैन्य अभियान था। यह पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में किया गया था, जिसमें 26 निर्दोष नागरिकों की मौत हुई थी। “ऑपरेशन सिंदूर” का लोगो लेफ्टिनेंट कर्नल हर्ष गुप्ता और हवलदार सुरिंदर सिंह द्वारा डिजाइन किया गया था, जो विधवा महिलाओं के दर्द और न्याय का प्रतीक था। “ऑपरेशन शील्ड” को “ऑपरेशन सिंदूर” के बाद की स्थिति में नागरिकों और प्रशासन की तैयारी को परखने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा था।




