भारत में उपराष्ट्रपति पद का चुनाव हमेशा से राजनीतिक दलों के बीच शक्ति प्रदर्शन और रणनीतिक गठबंधन का अहम हिस्सा रहा है। 2025 का उपराष्ट्रपति चुनाव भी अपवाद नहीं है। इस बार खास बात यह है कि विपक्षी दलों का संयुक्त गठबंधन INDIA ब्लॉक (Indian National Developmental Inclusive Alliance) चुनाव मैदान में सक्रिय है और जल्द ही अपने उम्मीदवार की घोषणा करने वाला है। वहीं, गठबंधन की एक बड़ी सहयोगी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इस मुद्दे पर अलग रुख अपनाते हुए अपनी मांगें सामने रखी हैं।
इस चुनाव में सत्ता पक्ष और विपक्ष की भूमिका, गठबंधन की मजबूती, और भविष्य की राजनीति – सब कुछ दांव पर है। आइए विस्तार से जानते हैं कि उपराष्ट्रपति चुनाव क्यों महत्वपूर्ण है और इस बार क्या नई समीकरण देखने को मिल रहे हैं।
उपराष्ट्रपति पद का महत्व
भारत का उपराष्ट्रपति देश का दूसरा सर्वोच्च संवैधानिक पद है।
- उपराष्ट्रपति राज्यसभा के सभापति (Chairman) भी होते हैं।
- संसद की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने में उपराष्ट्रपति की भूमिका बेहद अहम रहती है।
- अगर राष्ट्रपति पद पर किसी कारणवश रिक्ति हो जाती है तो अस्थायी रूप से उपराष्ट्रपति ही कार्यकारी राष्ट्रपति का दायित्व संभालते हैं।
यानी यह पद केवल औपचारिक नहीं बल्कि संसदीय राजनीति का केंद्र है। इसलिए हर चुनाव में इसे लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के बीच खींचतान रहती है।
2025 के उपराष्ट्रपति चुनाव की पृष्ठभूमि
पूर्व उपराष्ट्रपति के इस्तीफा देने के कारण राजनीतिक दल नए चेहरे को लाने की तैयारी में हैं।
- सत्ताधारी NDA गठबंधन पहले से ही उम्मीदवार पर मंथन कर रहा है।
- विपक्षी INDIA गठबंधन भी अपनी रणनीति बनाने में जुटा है।
यह चुनाव ऐसे समय में हो रहा है जब संसद में विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच टकराव लगातार बढ़ रहा है। खासकर राज्यसभा में सरकार के लिए कानून पास कराना कई बार चुनौतीपूर्ण हो जाता है। ऐसे में उपराष्ट्रपति का चुनावी नतीजा संसद की राजनीति पर सीधा असर डालेगा।
INDIA गठबंधन की रणनीति
INDIA गठबंधन, जिसमें कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, राजद, DMK, जेडीयू और कई अन्य दल शामिल हैं, इस चुनाव को एकजुटता दिखाने का मौका मान रहा है।
- गठबंधन के नेताओं का मानना है कि एक संयुक्त उम्मीदवार खड़ा करके NDA के खिलाफ मजबूत संदेश दिया जा सकता है।
- उम्मीदवार ऐसा चेहरा होगा जो सभी दलों को स्वीकार्य हो और विपक्ष की एकजुटता का प्रतीक बने।
कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी और सोनिया गांधी की मौजूदगी में विपक्षी नेताओं की कई बैठकें हुई हैं। इन बैठकों में यह तय किया गया कि उम्मीदवार का नाम अंतिम क्षणों तक गोपनीय रखा जाए ताकि NDA अपनी रणनीति न बदल सके।
TMC का अलग रुख
INDIA गठबंधन का हिस्सा होने के बावजूद तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इस मुद्दे पर अलग रुख अपनाया है।
- ममता बनर्जी की पार्टी का कहना है कि उपराष्ट्रपति का पद एक पूर्वोत्तर या पूर्वी भारत से आने वाले नेता को मिलना चाहिए।
- उनका तर्क है कि इससे क्षेत्रीय संतुलन बना रहेगा और राष्ट्रीय राजनीति में पूर्वी भारत की आवाज़ मज़बूत होगी।
TMC की यह मांग गठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़े करती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर INDIA गठबंधन उम्मीदवार पर सहमति नहीं बना पाया तो यह NDA के लिए बड़ी राहत साबित होगी।
NDA की स्थिति
सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के पास संसद में संख्या बल का फायदा है।
- NDA पहले से ही अपने उम्मीदवार की तलाश में है।
- चर्चा है कि बीजेपी किसी ऐसे चेहरे को आगे ला सकती है जो न केवल पार्टी का कद्दावर नेता हो बल्कि विपक्ष के कुछ गुटों को भी स्वीकार्य लगे।
संभावना जताई जा रही है कि NDA महिला उम्मीदवार या किसी दलित/आदिवासी समुदाय के नेता को मैदान में उतारकर एक बड़ा राजनीतिक संदेश देने की कोशिश कर सकता है।
संभावित उम्मीदवारों के नाम
INDIA गठबंधन से संभावित नाम:
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पूर्व वैज्ञानिक माइलस्वामी अन्नादुरई
NDA से संभावित नाम:
- सीपी राधाकृष्णन
चुनाव प्रक्रिया
- उपराष्ट्रपति का चुनाव इलेक्टोरल कॉलेज द्वारा होता है, जिसमें लोकसभा और राज्यसभा के सभी सांसद वोट डालते हैं।
- कुल 788 सांसदों में से NDA के पास बहुमत है, लेकिन अगर विपक्षी दल एकजुट हो जाएं तो मुकाबला कड़ा हो सकता है।
- वोटिंग गुप्त मतपत्र (secret ballot) से होती है।
राजनीतिक असर
यह चुनाव सिर्फ एक संवैधानिक पद का नहीं, बल्कि आने वाले समय की राजनीति का भी संकेत है।
- अगर INDIA गठबंधन मजबूत उम्मीदवार उतारकर अच्छी संख्या जुटाता है तो 2029 के आम चुनाव की राह में विपक्ष को नया जोश मिलेगा।
- अगर NDA सहजता से जीत हासिल करता है तो यह विपक्ष की कमजोर एकजुटता को उजागर करेगा।
विशेषज्ञों की राय
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि:
- NDA की जीत लगभग तय है, लेकिन विपक्षी एकता पर सभी की निगाहें होंगी।
- TMC का अलग रुख गठबंधन की एकता को कमजोर कर सकता है।
- उपराष्ट्रपति चुनाव विपक्ष के लिए “सेमीफाइनल” जैसा है, जिसमें एकजुटता की परीक्षा होगी।
उपराष्ट्रपति चुनाव 2025 केवल एक संवैधानिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि भारतीय राजनीति की बड़ी तस्वीर को दर्शाने वाला चुनाव है।
- एक ओर NDA अपने बहुमत और रणनीति के भरोसे मैदान में उतरेगा।
- दूसरी ओर INDIA गठबंधन अपनी एकजुटता दिखाने की कोशिश करेगा।
आखिरकार, यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या विपक्ष इस चुनाव में एकजुट रह पाएगा या TMC जैसी पार्टियों के अलग रुख से उसकी रणनीति कमजोर हो जाएगी।








