हिमाचल: उपराष्ट्रपति धनखड़ ने ग्रामीण युवाओं से कृषि उद्यमी बनने का आग्रह किया, किसानों को सीधे समर्थन देने का आह्वान किया
शिमला, हिमाचल प्रदेश: भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने हाल ही में हिमाचल प्रदेश में ग्रामीण युवाओं को कृषि उद्यमी बनने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने किसानों को सीधे और सशक्त समर्थन प्रदान करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। शिमला में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, उन्होंने राज्य के कृषि और ग्रामीण विकास परिदृश्य पर अपने विचार साझा किए।
कृषि में उद्यमिता: ग्रामीण युवाओं के लिए सुनहरा अवसर
उपराष्ट्रपति धनखड़ ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ कृषि है, और ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की अपार संभावनाएं निहित हैं। उन्होंने विशेष रूप से युवा पीढ़ी से आग्रह किया कि वे केवल पारंपरिक खेती तक सीमित न रहें, बल्कि कृषि-तकनीक, खाद्य प्रसंस्करण, जैविक खेती और कृषि-पर्यटन जैसे क्षेत्रों में उद्यमिता के नए अवसर तलाशें। उन्होंने कहा, “आज के युवा नवाचार और ऊर्जा से भरे हैं। यदि वे कृषि क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का उपयोग करते हैं, तो वे न केवल अपनी आय बढ़ा सकते हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नया आयाम दे सकते हैं।”
किसानों को सीधा समर्थन: पारदर्शिता और सशक्तिकरण
उपराष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार और नीति निर्माताओं को ऐसी योजनाओं पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए जो किसानों को सीधे लाभ पहुंचाएं। उन्होंने स्पष्ट किया, “किसानों को सब्सिडी या अन्य माध्यमों से जो समर्थन मिलता है, वह सीधे उनके खातों तक पहुंचना चाहिए ताकि बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो सके और पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।” उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि ऐसी नीतियां बनाई जाएं जो किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाएं और उन्हें बाजार तक सीधी पहुंच प्रदान करें।
हिमाचल की कृषि क्षमता और आधुनिक पद्धतियाँ
धनखड़ ने हिमाचल प्रदेश के किसानों की प्रशंसा करते हुए कहा कि राज्य की जलवायु और भौगोलिक स्थिति बागवानी और विशेष फसलों के लिए आदर्श है। उन्होंने किसानों को आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाने, पानी के कुशल उपयोग और फसल विविधीकरण पर जोर देने की सलाह दी। उनका मानना था कि कृषि को लाभ का व्यवसाय बनाने के लिए प्रौद्योगिकी का अधिकतम उपयोग आवश्यक है।
कृषि-उद्यमिता को बढ़ावा देने का सरकार का संकल्प
उपराष्ट्रपति ने युवाओं को आश्वासन दिया कि सरकार कृषि-उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए हर संभव सहायता प्रदान करने को प्रतिबद्ध है। उन्होंने ग्रामीण युवाओं को कौशल विकास कार्यक्रमों, ऋण सुविधाओं और बाजार लिंकेज से जुड़ने का आह्वान किया ताकि वे सफल कृषि उद्यमी बन सकें।
यह संबोधन ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार कृषि क्षेत्र को मजबूत करने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए विभिन्न पहल कर रही है। उपराष्ट्रपति का यह आग्रह ग्रामीण भारत के लिए एक नई दिशा प्रदान कर सकता है, जहां युवा अपनी जड़ों से जुड़कर देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। यह भारत को ‘आत्मनिर्भर’ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
कृषि उद्यमिता (Agri-Entrepreneurship) क्या है और इसमें अवसर:
कृषि उद्यमिता का अर्थ है कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में व्यावसायिक अवसरों की पहचान करना, उनका विकास करना और उन्हें सफलतापूर्वक चलाना। यह सिर्फ पारंपरिक खेती से कहीं अधिक है। इसमें कई आयाम हैं जहाँ ग्रामीण युवा अपनी रचनात्मकता, कौशल और आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर सकते हैं:
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खाद्य प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन (Food Processing & Value Addition):
- फल और सब्जी प्रसंस्करण: जैम, जेली, अचार, सॉस, सूखे मेवे और सब्जियां बनाना।
- अनाज प्रसंस्करण: आटा मिल, दाल मिल, बेकरी उत्पाद।
- दूध उत्पाद: पनीर, दही, घी, आइसक्रीम का उत्पादन।
- रेडी-टू-ईट/कुक उत्पाद: पैक्ड मसाले, instant mix (जैसे डोसा मिक्स), आदि।
- अवसर: ब्रांडिंग, पैकेजिंग और स्थानीय तथा ऑनलाइन बिक्री के माध्यम से उच्च मार्जिन प्राप्त करना।
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जैविक खेती और प्रमाणन (Organic Farming & Certification):
- बढ़ती उपभोक्ता जागरूकता के साथ जैविक उत्पादों की मांग बढ़ रही है।
- अवसर: जैविक सब्जियों, फलों, दालों या अनाजों की खेती करना और प्रमाणित जैविक उत्पाद के रूप में उन्हें बेचना। इसमें जैविक प्रमाणन प्राप्त करना और फिर सीधे ग्राहकों या विशेष जैविक स्टोर को बेचना शामिल है।
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कृषि-तकनीक (Agri-Tech/Farm Tech):
- स्मार्ट फार्मिंग समाधान: ड्रिप सिंचाई, सेंसर-आधारित खेती, ड्रोन का उपयोग करके फसल स्वास्थ्य निगरानी और छिड़काव।
- ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म: किसानों को सीधे उपभोक्ताओं या बड़े खरीदारों से जोड़ने वाले ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बनाना।
- खेती प्रबंधन सॉफ्टवेयर: किसानों को फसल चक्र, कीट नियंत्रण और वित्तीय प्रबंधन में मदद करने वाले ऐप्स या सॉफ्टवेयर विकसित करना।
- अवसर: कृषि में दक्षता और उत्पादकता बढ़ाने वाले तकनीकी समाधान प्रदान करना।
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पशुधन और मत्स्य पालन उद्यमिता (Livestock & Fisheries Entrepreneurship):
- डेयरी फार्मिंग, मुर्गी पालन, बकरी पालन, मत्स्य पालन आदि में आधुनिक तरीकों का उपयोग करना।
- अवसर: उच्च गुणवत्ता वाले पशुधन उत्पादों (दूध, अंडे, मांस) का उत्पादन और प्रसंस्करण, या आधुनिक मछली पालन तकनीकें जैसे बायोफ्लॉक।
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कृषि-पर्यटन (Agri-Tourism/Farm Tourism):
- पर्यटकों को कृषि गतिविधियों का अनुभव प्रदान करना।
- अवसर: फार्महाउस पर आवास, ग्रामीण जीवन शैली का अनुभव, फसल कटाई में भागीदारी, स्थानीय व्यंजनों का स्वाद। यह ग्रामीण क्षेत्रों में अतिरिक्त आय का एक बड़ा स्रोत बन सकता है।
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कृषि इनपुट और सेवाएँ (Agri-Input & Services):
- गुणवत्तापूर्ण बीज, उर्वरक, जैविक खाद, कृषि उपकरण किराए पर देना।
- मृदा परीक्षण (soil testing) लैब, फसल सलाह (crop advisory) सेवाएँ प्रदान करना।
- अवसर: किसानों की जरूरतों को पूरा करने वाली आवश्यक इनपुट और विशेषज्ञ सलाह प्रदान करना।
किसानों के लिए प्रमुख सरकारी योजनाएँ (Major Government Schemes for Farmers):
भारत सरकार कृषि क्षेत्र को मजबूत करने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए कई योजनाएं चला रही है। यहाँ कुछ प्रमुख योजनाएं हैं:
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प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN):
- उद्देश्य: छोटे और सीमांत किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान करना।
- लाभ: प्रति वर्ष ₹6,000 की वित्तीय सहायता, ₹2,000 की तीन समान किस्तों में सीधे किसानों के बैंक खातों में जमा की जाती है।
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प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY):
- उद्देश्य: प्राकृतिक आपदाओं, कीटों और बीमारियों के कारण फसल के नुकसान की स्थिति में किसानों को बीमा कवरेज प्रदान करना।
- लाभ: खरीफ फसलों के लिए 2%, रबी फसलों के लिए 1.5% और वाणिज्यिक/बागवानी फसलों के लिए 5% का बहुत कम प्रीमियम।
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किसान क्रेडिट कार्ड (KCC):
- उद्देश्य: किसानों को उनकी खेती की जरूरतों के लिए पर्याप्त और समय पर ऋण सहायता प्रदान करना।
- लाभ: कृषि और संबद्ध गतिविधियों के लिए लचीले और कम ब्याज दर वाले ऋण।
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राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY – Raftar):
- उद्देश्य: कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में समग्र विकास को बढ़ावा देना, जिसमें पूर्व-फसल से लेकर कटाई के बाद के प्रबंधन तक शामिल है।
- लाभ: कृषि उत्पादन बढ़ाने और किसानों की आय में सुधार के लिए विभिन्न परियोजनाओं और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए राज्यों को वित्तीय सहायता।
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प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY):
- उद्देश्य: ‘हर खेत को पानी’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सिंचाई कवरेज का विस्तार करना और पानी के उपयोग की दक्षता में सुधार करना।
- लाभ: ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई (प्रति बूंद अधिक फसल) को बढ़ावा देना, जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण।
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राष्ट्रीय बागवानी मिशन (NHM):
- उद्देश्य: बागवानी क्षेत्र के समग्र विकास को बढ़ावा देना।
- लाभ: फलों, सब्जियों, फूलों आदि की खेती, कटाई के बाद के प्रबंधन और विपणन के लिए सहायता।
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कृषि अवसंरचना कोष (Agriculture Infrastructure Fund – AIF):
- उद्देश्य: कटाई के बाद के प्रबंधन बुनियादी ढांचे और सामुदायिक कृषि परिसंपत्तियों के लिए मध्यम से लंबी अवधि के ऋण वित्तपोषण की सुविधा प्रदान करना।
- लाभ: कृषि उद्यमियों, किसानों, FPOs (किसान उत्पादक संगठनों) आदि को ऋण पर ब्याज सबवेंशन और क्रेडिट गारंटी।
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फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन (FPOs) को बढ़ावा देना:
- उद्देश्य: किसानों के छोटे समूहों को एक साथ लाकर उन्हें एक बड़े संगठन के रूप में काम करने में सक्षम बनाना।
- लाभ: FPO को वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण और विशेषज्ञता प्रदान की जाती है ताकि वे बेहतर मोलभाव कर सकें, इनपुट खरीद सकें और अपनी उपज को सीधे बेच सकें।
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ई-नाम (e-NAM – National Agriculture Market):
- उद्देश्य: पूरे देश में कृषि वस्तुओं के लिए एक एकीकृत ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म बनाना।
- लाभ: किसानों को अपनी उपज को विभिन्न बाजारों में बेचने की सुविधा मिलती है, जिससे उन्हें बेहतर मूल्य प्राप्त करने में मदद मिलती है।
यह जानकारी आपको कृषि उद्यमिता के दायरे और किसानों के लिए उपलब्ध सरकारी समर्थन को समझने में मदद करेगी। यदि आपके कोई विशिष्ट प्रश्न हैं तो कॉमेंट बॉक्स के जरिए पूछ सकते हैं





