सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के संरक्षित रिज क्षेत्र में पेड़ों की कटाई के मामले में दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के अधिकारियों को अवमानना का दोषी ठहराया है। कोर्ट ने माना कि सड़क चौड़ी करने के लिए पेड़ों की कटाई की गई लेकिन डीडीए अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट की अनुमति नहीं ली जो कि 1996 के फैसले के तहत जरूरी थी। अदालत ने डीडीए अधिकारियों पर जुर्माना लगाया।
पीटीआई, नई दिल्ली। दिल्ली के संरक्षित रिज क्षेत्र में पेड़ों की कटाई मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के अधिकारियों को राजधानी के रिज क्षेत्र में पेड़ों की कटाई के लिए अवमानना का दोषी ठहराया है। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने पेड़ों की कटाई मामले में ये फैसला सुनाया है।
दिल्ली सरकार ने वाहनों से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए इलेक्ट्रिक वाहन नीति लागू की है। जिसमें वाहनों की खरीद पर सब्सिडी दी जा रही है। वाहनों की श्रेणी के हिसाब से सब्सिडी की रकम रखी गई है। ऐसे वाहनों की खरीद पर रोड टैक्स माफ करने के अलावा सरकार अब वाहनों का पंजीकरण शुल्क भी माफ करने जा रही है। जानकारों का मानना है कि सब्सिडी शुरू होते ही इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रति लोगों का और रुझान बढ़ेगा। बहुत से लोग सब्सिडी का इंतजार कर रहे हैं।
हालांकि कोर्ट ने ये भी माना कि ये कटाई सड़क चौड़ी करने के उद्देश्य से की गई थी। न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एन.के. सिंह की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा, डीडीए अधिकारियों ने क्षेत्र में पेड़ों की कटाई की अनुमति देने से पहले सुप्रीम कोर्ट की अनुमति नहीं ली है और कोर्ट की अवमानना की है, जो कि 1996 के एक फैसले के तहत आवश्यक थी।
पीठ ने पेड़ों की कटाई मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के उल्लंघन और दिल्ली के एलजी और आईएएस अधिकारी सुभाषिश पांडा की तरफ से डीडीए के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के रूप में आदेशों का जानबूझकर पालन न करने का आरोप लगाने वाली अवमानना याचिका पर फैसला सुनाया है।
डीडीए अधिकारियों पर 25,000 का जुर्माना
पीठ ने कहा कि यह मामला प्रशासनिक गलत निर्णय की श्रेणी में आता है और डीडीए अधिकारियों पर 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया। अदालत ने डीडीए को रिज क्षेत्र में रहने वाले अमीर व्यक्तियों पर टैक्स लगाने के लिए भी कहा, जिन्हें सड़क के चौड़ीकरण से लाभ हुआ है।
वनरोपण के लिए समिति का गठन
कोर्ट ने आगे व्यापक वनरोपण योजना की देखरेख के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया और पैनल को निर्देश दिया कि वह पहुंच मार्ग के दोनों ओर घने पेड़ लगाना सुनिश्चित करें। 21 जनवरी को अदालत ने अपना आदेश सुरक्षित रखते हुए कहा था कि उसे याचिकाओं में कथित अवमानना की गंभीरता को देखने की जरूरत है।
कब का है मामला?
यह मामला पिछले साल 3 फरवरी 2024 का है, जब मैदानगढ़ी में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल आयुर्विज्ञान संस्थान (CAPFIMS) तक सड़क चौड़ी करने के लिए रिज क्षेत्र में पेड़ काटे गए।
कोर्ट ने आगे व्यापक वनरोपण योजना की देखरेख के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया और पैनल को निर्देश दिया कि वह पहुंच मार्ग के दोनों ओर घने पेड़ लगाना सुनिश्चित करें। 21 जनवरी को अदालत ने अपना आदेश सुरक्षित रखते हुए कहा था कि उसे याचिकाओं में कथित अवमानना की गंभीरता को देखने की जरूरत है।




