रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच वैश्विक कूटनीति के लिहाज़ से एक बेहद अहम मुलाकात होने जा रही है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की रविवार को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से मुलाकात करेंगे। इस बैठक पर पूरी दुनिया की नज़र टिकी है, क्योंकि इसमें यूक्रेन की सुरक्षा गारंटी, सैन्य सहायता और भूमि विवाद जैसे संवेदनशील मुद्दों पर खुलकर बातचीत होने की संभावना जताई जा रही है। विश्लेषकों का मानना है कि इस वार्ता के नतीजे रूस-यूक्रेन युद्ध की दिशा और भविष्य को प्रभावित कर सकते हैं।
बैठक का महत्व क्यों है खास
ज़ेलेंस्की-ट्रम्प बैठक ऐसे समय हो रही है जब युद्ध लंबे दौर में प्रवेश कर चुका है और कूटनीतिक समाधान की मांग तेज हो रही है। अमेरिका अब तक यूक्रेन का सबसे बड़ा रणनीतिक और सैन्य सहयोगी रहा है।
- यूक्रेन की रक्षा क्षमता
- पश्चिमी समर्थन की निरंतरता
- युद्धविराम या समाधान की संभावनाएं
इन सभी मुद्दों पर अमेरिका की भूमिका निर्णायक मानी जाती है।
एजेंडा: किन मुद्दों पर होगी दो टूक चर्चा
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मुलाकात में औपचारिक कूटनीति से आगे बढ़कर सीधी और स्पष्ट बातचीत होने की उम्मीद है।
1. यूक्रेन की सुरक्षा गारंटी
यूक्रेन लगातार नाटो और पश्चिमी देशों से दीर्घकालिक सुरक्षा गारंटी की मांग करता रहा है। ज़ेलेंस्की इस बैठक में अमेरिका से स्पष्ट आश्वासन चाहते हैं कि युद्ध के बाद भी यूक्रेन की संप्रभुता और सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।
2. भूमि विवाद और क्षेत्रीय अखंडता
रूस द्वारा कब्जाए गए इलाकों को लेकर यूक्रेन का रुख सख्त रहा है।
- क्या अमेरिका यूक्रेन की क्षेत्रीय अखंडता के समर्थन में पहले जैसी नीति जारी रखेगा?
- किसी संभावित समझौते में भूमि को लेकर क्या रुख होगा?
इन सवालों पर चर्चा अहम मानी जा रही है।
3. सैन्य और आर्थिक सहायता
यूक्रेन को हथियार, गोला-बारूद और आर्थिक मदद लगातार मिलती रही है। ट्रम्प की विदेश नीति को लेकर पहले भी यह सवाल उठते रहे हैं कि अमेरिका किस हद तक सहायता जारी रखेगा।
डोनाल्ड ट्रम्प की नीति और संभावित बदलाव
डोनाल्ड ट्रम्प अपने “अमेरिका फर्स्ट” दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं। उनके पिछले बयानों से संकेत मिलता रहा है कि वे युद्ध को जल्द समाप्त करने के पक्षधर हैं, चाहे इसके लिए कूटनीतिक समझौता क्यों न करना पड़े।
- क्या अमेरिका की नीति में बदलाव आएगा?
- क्या यूक्रेन को शर्तों के साथ समर्थन मिलेगा?
इन बिंदुओं पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हैं।
रूस-यूक्रेन युद्ध पर संभावित असर
यह बैठक केवल द्विपक्षीय नहीं, बल्कि वैश्विक रणनीति से जुड़ी है।
- यदि अमेरिका का रुख सख्त रहता है, तो युद्ध लंबा खिंच सकता है
- यदि समझौते पर जोर दिया गया, तो वार्ता का रास्ता खुल सकता है
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बैठक के संकेत आने वाले महीनों की कूटनीति तय कर सकते हैं।
रूस और यूरोप की प्रतिक्रिया
इस मुलाकात पर रूस के साथ-साथ यूरोपीय देशों की भी नजर है। यूरोप पहले से ही ऊर्जा संकट और सुरक्षा चिंताओं से जूझ रहा है। अमेरिका-यूक्रेन संबंधों में किसी भी बदलाव का सीधा असर यूरोपीय रणनीति पर पड़ेगा।
वैश्विक राजनीति में इस बैठक का स्थान
ज़ेलेंस्की और ट्रम्प की मुलाकात सिर्फ दो नेताओं की बातचीत नहीं, बल्कि यह वैश्विक शक्ति संतुलन, नाटो की भूमिका और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे से भी जुड़ी है। यही वजह है कि इसे रूस-यूक्रेन युद्ध का संभावित “टर्निंग पॉइंट” माना जा रहा है।
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की यह मुलाकात रूस-यूक्रेन युद्ध के भविष्य के लिए बेहद अहम साबित हो सकती है। सुरक्षा गारंटी, भूमि विवाद और अमेरिकी समर्थन जैसे मुद्दों पर होने वाली दो टूक बातचीत न केवल यूक्रेन, बल्कि पूरी दुनिया की राजनीति को प्रभावित कर सकती है। आने वाले दिनों में इस बैठक से निकलने वाले संकेत वैश्विक कूटनीति की दिशा तय करेंगे।








